धान भारत की सबसे महत्वपूर्ण खाद्य फसल है जो देश की खाद्य सुरक्षा का आधार है। वैज्ञानिक तरीके से धान की खेती करने पर अच्छी पैदावार प्राप्त की जा सकती है। आइए जानते हैं धान की खेती के प्रमुख चरणों के बारे में:
1.बुवाई का सही समय और विधि
धान की खेती के लिए उपयुक्त समय मानसून के आने से पहले, यानी जून के पहले सप्ताह में बुवाई है, जबकि सीधी बुवाई के लिए मिट्टी और जलवायु की सही समझ ज़रूरी है. उपयुक्त मिट्टी के लिए दोमट या हल्की दोमट मिट्टी अच्छी होती है, और दिन का तापमान 25-35°C तथा रात का तापमान 18-20°C सर्वोत्तम होता है. रोपाई विधि में पहले पौध तैयार की जाती है और फिर उसे खेत में लगाया जाता है, जबकि सीधी बुवाई में बीज बो दिए जाते हैं
- रोपाई विधि:इस विधि में पहले नर्सरी में पौध तैयार की जाती है। 15-20 सेमी के पौधों को नर्सरी से निकालकर खेत में रोपा जाता है।
- सीधी बुवाई विधि:इस विधि में बीजों को सीधे खेत में बो दिया जाता है। इसके लिए गेहूँ की बुवाई वाली जीरो टीलेज मशीन का उपयोग किया जा सकता है।
2.मिट्टी और जलवायु
धान की अच्छी पैदावार के लिए दोमट, हल्की दोमट या मटियार मिट्टी सर्वोत्तम होती है। तापमान के संबंध में दिन का तापमान 25-35°C और रात का तापमान 18-20°C आदर्श माना जाता है।
3.बीज का चयन और उपचार
उच्च गुणवत्ता वाले भारी बीजों का चयन करें जो नमक के घोल में डूब जाते हैं। बीजों को बीमारियों से बचाने के लिए पंचगव्य या अन्य जैविक तरीकों से उपचारित करना चाहिए।
4.खाद एवं उर्वरक प्रबंधन
धान की फसल के लिए जैविक खाद जैसे गोबर खाद, केंचुआ खाद और हरी खाद (दैंचा) का उपयोग लाभदायक होता है। फास्फोरस की उपलब्धता बढ़ाने के लिए पी.एस.बी. कल्चर और यूरिया, जिंक सल्फेट व ह्यूमिक एसिड जैसे रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग करना चाहिए।
5.जल प्रबंधन
पारंपरिक विधि में खेत में पानी भरा रहता है जबकि श्री विधि में खेत को गीला और सूखा रखा जाता है। जल निकासी की उचित व्यवस्था होनी चाहिए।
6.खरपतवार नियंत्रण
खरपतवारों को नियंत्रित करने के लिए यांत्रिक विधि या रासायनिक खरपतवारनाशकों का उपयोग किया जा सकता है।
फायदे:
- सीधी बुवाई से कम लागत में अधिक उत्पादन मिलता है.
- जैविक खेती से मिट्टी की सेहत सुधरती है और कम लागत में अच्छा उत्पादन होता है.
सावधानियां:
- देर से बुवाई करने पर भारी वर्षा होने की आशंका रहती है, जिससे बुवाई प्रभावित हो सकती है.
- अधिक वर्षा होने पर पौध डूब सकती है, इसलिए पौध का विकास वर्षा से पहले हो जाना चाहिए.
निष्कर्ष:
वैज्ञानिक विधियों से धान की खेती करके किसान अच्छी पैदावार प्राप्त कर सकते हैं। उन्नत बीज, संतुलित उर्वरक और उचित जल प्रबंधन अपनाकर धान की खेती को और भी लाभदायक बनाया जा सकता है।
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