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राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन की राह पर दशहरी आम परंपरा और टिकाऊ खेती का संगम

18 Sep, 2025 05:21 PM

दशहरी आम सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का एक अटूट हिस्सा है। यह गर्मियों की यादें, बचपन के दिन और परिवार के साथ बिताए पलों की निशानी है।

FasalKranti
Himali, समाचार, [18 Sep, 2025 05:21 PM]
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दशहरी आम: भारत की स्वादिष्ट विरासत

दशहरी आम (Dasheri Aam) भारत के उत्तर प्रदेश के मलिहाबाद क्षेत्र की एक अनूठी धरोहर है, जिसकी उत्पत्ति लगभग 200 वर्ष पूर्व हुई थी। कहा जाता है कि मलिहाबाद के पास स्थित दशहरी गाँव में एक पुराने आम के पेड़ की एक डाल से यह किस्म अस्तित्व में आई, जिसका स्वाद और सुगंध इतना अनूठा था कि यह चर्चा का विषय बन गया। आज भी वह ऐतिहासिक "मदर प्लांट" मौजूद है, जिसकी संतानें दुनिया भर में इस स्वाद का जादू बिखेर रही हैं। दशहरी आम (Dasheri Mango) केवल अपने लंबोतरे आकार और सुनहरे-पीले रंग के लिए पहचाना जाता है, बल्कि इसकी अविश्वसनीय सुगंध और रसीले, गुठली-रहित गूदे ने इसे "आमों का राजा" की उपाधि दिलाई है। अंग्रेजी में इसे Dasheri Mango ही कहा जाता है, जो इसकी वैश्विक पहचान को दर्शाता है।

 

 राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (NMSA) और दशहरी आम

राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (National Mission for Sustainable Agriculture - NMSA) भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन विकसित करनाप्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना और किसानों की आय बढ़ाना है। इस मिशन के तहत सतत कृषि (Sustainable Agriculture) को बढ़ावा दिया जाता है, जो पर्यावरणीय स्वास्थ्य, आर्थिक लाभप्रदता और सामाजिक समानता को एक साथ साधती है। दशहरी आम की खेती में इस मिशन का समावेश होने से पारंपरिक बागवानी और आधुनिक टिकाऊ तकनीकों का एक सुंदर संगम देखने को मिल रहा है।

सतत कृषि के स्तंभ और दशहरी आम:

सतत कृषि का स्तंभ

दशहरी आम खेती में application

पर्यावरण संरक्षण

जैविक खाद प्राकृतिक कीटनाशकों का उपयोग

आर्थिक व्यवहार्यता

कम लागत, अधिक मुनाफा निर्यात opportunities

सामाजिक समानता

किसान सहकारिता महिला सशक्तिकरण

जलवायु लचीलापन

स्थानीय अनुकूलित किस्म जल संरक्षण

प्राकृतिक खेती बनाम जैविक खेती: एक तुलनात्मक विश्लेषण

दशहरी आम की खेती में प्राकृतिक खेती (Natural Farming) और जैविक खेती (Organic Farming) दोनों ही महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं, लेकिन इनमें कुछ मौलिक अंतर हैं। difference between organic farming and natural farming जैविक खेती में रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर वर्मीकम्पोस्ट जैसे जैविक खादों का उपयोग किया जाता है, जबकि प्राकृतिक खेती पूरी तरह से स्थानीय संसाधनों पर निर्भर करती है, जैसे गोबर, गोमूत्र, गुड़ और बेसन से बने जीवामृत और बीजामृत प्राकृतिक खेती का मुख्य सिद्धांत है कि यह मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की गतिविधि बढ़ाकर उसे स्वतः पोषण करने की क्षमता प्रदान करती है, जबकि जैविक खेती में बाहरी जैविक आदानों की आवश्यकता होती है।

 

प्राकृतिक खेती के लाभ:

  • लागत में कमी: किसान केवल 100 रुपये में जीवामृत तैयार कर सकते हैं, जो एक एकड़ भूमि के लिए पर्याप्त है।
  • पर्यावरण अनुकूल: रासायनिक कीटनाशकों के अभाव में मिट्टी, जल और जैव विविधता का संरक्षण।
  • बेहतर स्वाद और गुणवत्ता: प्राकृतिक रूप से उगाए गए दशहरी आम मेंअधिक मिठास और सुगंध होती है।

  • दशहरी आम का सीज़न और टिकाऊ खेती का प्रभाव 

दशहरी आम का सीज़न (Dasheri Mango Season) आमतौर पर मई से जुलाई के बीच होता है, जब बाजारों में इसकी खुशबू और रंगत छा जाती है। इस सीज़न में प्राकृतिक रूप से पके आमों का स्वाद ही कुछ और होता है, क्योंकि कृत्रिम रूप से पकाए गए आम उस सुगंध और मिठास से वंचित रह जाते हैं। टिकाऊ खेती अपनाने से दशहरी आम के सीज़न पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। मौसम अनुकूल होने और कीटों के प्रकोप में कमी के कारण 2025 में फसल की गुणवत्ता और quantity दोनों में सुधार देखा गया। इस साल पेड़ों पर 45-50% फल टिके हैं, जो पिछले साल के 35% की तुलना में एक सकारात्मक संकेत है।

वैश्विक बाजार में दशहरी आम की पहचान

टिकाऊ खेती अपनाने से दशहरी आम केवल घरेलू बाजार में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी पैठ बना रहा है। हाल ही में उत्तर प्रदेश के दो किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) ने 1200 kg दशहरी आम का दुबई को सीधा निर्यात किया, जिसकी कीमत 2.5 लाख रुपये आँकी गई। यह सफलता राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन के उद्देश्यों के अनुरूप है, जो किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ने पर बल देता है। दशहरी आम की Geographical Indication (GI) टैग प्राप्त पहचान ने भी इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक प्रीमियम उत्पाद बनाने में मदद की है।

निष्कर्ष: भविष्य की राह

दशहरी आम (Dasheri Aam) की खेती में सतत कृषि के समावेश ने केवल पर्यावरणीय स्वास्थ्य में सुधार किया है, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि की है। प्राकृतिक खेती के माध्यम से मिट्टी की उर्वरता बढ़ी हैजैव विविधता का संरक्षण हुआ है, और उपभोक्ताओं को रसायन-मुक्त  स्वादिष्ट फल मिल रहे हैं। राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन की राह पर दशहरी आम की यह यात्रा पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का एक आदर्श संगम है, जो भविष्य में कृषि क्षेत्र के लिए एक मॉडल प्रस्तुत करती है। आने वाले समय में और भी किसानों को इससे जोड़कर खाद्य सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि दोनों ही सुनिश्चित की जा सकती है।

 




Tags : Dasheri mango | Dasheri aam | dasheri mango season | National Mission for Sustainable Agriculture | Sustainable Agriculture

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