गन्ने की खेती के लिए काली-भूरी दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है। बुवाई का सर्वोत्तम समय अक्टूबर-नवंबर या फरवरी-मार्च है, जिसमें मिट्टी को भुरभुरी बनाकर गहराई तक जुताई की जाती है। उच्च गुणवत्ता वाले, 9-10 महीने के स्वस्थ गन्ने के बीजों का उपयोग करें और बीजों को बीमारियों से बचाने के लिए उचित उपचार करें। बीज को 2-3 आंखों वाले टुकड़ों में काटकर नाली विधि से या समतल विधि से बोया जाता है। फसल को अच्छी उपज के लिए नियमित सिंचाई की आवश्यकता होती है, और कीटों व खरपतवारों से बचाने के लिए उचित प्रबंधन आवश्यक है।
गन्ने की अच्छी पैदावार के लिए काली, भारी दोमट मिट्टी सर्वोत्तम होती है, जिसमें जल निकास की उचित व्यवस्था हो। खेत की तैयारी में सबसे पहले गहरी जुताई करें, तत्पश्चात कल्टीवेटर व रोटावेटर चलाकर मिट्टी को भुरभुरी बना लें। इससे गन्ने की जड़ों को पर्याप्त पोषण मिलता है और विकास अच्छा होता है।
उच्च उपज के लिए 9-10 महीने के स्वस्थ, रोगरहित गन्ने के बीज का चयन करें। बीजोपचार अत्यंत महत्वपूर्ण है: पहले कार्बेनडाज़िम जैसे कवकनाशक से उपचारित करें, फिर एज़ोस्पिरिलम जैसे जैव उर्वरक से उपचार करने के बाद ही बुवाई करें। इससे अंकुरण बेहतर होता है और रोगों से सुरक्षा मिलती है।
गन्ने की बुवाई के लिए नाली विधि (90 सेमी की दूरी पर 20-25 सेमी गहरी नालियाँ) या समतल विधि (90 सेमी दूरी पर कूँड़ बनाकर) अपनाई जा सकती है। बीज को 2-3 आँखों वाले टुकड़ों में काटकर बोया जाता है। बुवाई का सर्वोत्तम समय अक्टूबर-नवंबर (शरद काल) या फरवरी-मार्च (बसंत काल) है।
गन्ने को पूरी अवधि में 1500-2500 मिमी पानी की आवश्यकता होती है। सिंचाई का समय मिट्टी के प्रकार के अनुसार निर्धारित करें: दोमट मिट्टी में 10-11 दिन के अंतराल पर और भारी चिकनी मिट्टी में 16-20 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें। विशेषकर टिल्लरिंग और गाँठ बनने के समय नमी का ध्यान रखना आवश्यक है।
बुवाई के समय नालियों में गोबर की खाद या कम्पोस्ट डालें। रासायनिक उर्वरकों में यूरिया, फॉस्फोरस और पोटाश की संतुलित मात्रा का प्रयोग करें। फसल की वृद्धि के साथ-साथ पोषक तत्वों की आपूर्ति करते रहें।
खरपतवार नियंत्रण के लिए जमाव पूरा होने के बाद पंक्तियों के बीच पलवार (Mulching) की तकनीक अपनाएँ। कीटों जैसे काला चिकटा और गुलाबी चिकटा के नियंत्रण के लिए समय पर उचित कीटनाशकों का छिड़काव करें। समन्वित कीट प्रबंधन (IPM) अपनाना लाभदायक रहता है।
गन्ने के साथ मटर, आलू, प्याज, मूली जैसी अन्तः फसलें लेकर अतिरिक्त आय प्राप्त की जा सकती है। गन्ने की फसल 9-10 महीने में पककर तैयार होती है। कटाई से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि गन्ना पूरी तरह से पका हुआ है।
वैज्ञानिक विधियों से गन्ने की खेती करके किसान भाई न केवल उपज बढ़ा सकते हैं, बल्कि लागत कम करके अपनी आय में भी वृद्धि कर सकते हैं। उन्नत किस्मों, समय पर बुवाई, संतुलित सिंचाई और एकीकृत कीट प्रबंधन पर विशेष ध्यान देकर गन्ने की खेती को और भी लाभदायक बनाया जा सकता है।