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Rose Farming: फ्लोरिकल्चर से आय पर केंद्रित दृष्टिकोण

04 Feb, 2026 05:11 PM

Rose Farming किसानों के लिए फूलों की खेती के सबसे प्रैक्टिकल ऑप्शन में से एक है जो लगातार डिमांड और हर यूनिट एरिया में बेहतर रिटर्न चाहते हैं।

FasalKranti
Himali, समाचार, [04 Feb, 2026 05:11 PM]
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Rose Farming किसानों के लिए फूलों की खेती के सबसे प्रैक्टिकल ऑप्शन में से एक है जो लगातार डिमांड और हर यूनिट एरिया में बेहतर रिटर्न चाहते हैं। यह छोटे ज़मीन वालों और कमर्शियल किसानों, दोनों के लिए सही है क्योंकि गुलाब खुले खेतों, शेड नेट या पॉलीहाउस में उगाए जा सकते हैं। इसका मार्केट बड़ा और अलग-अलग तरह का है। खुले फूलों का इस्तेमाल रोज़ माला और धार्मिक कामों के लिए किया जाता है, कटे हुए फूलों की गुलदस्ते, इवेंट और रिटेल दुकानों में हमेशा डिमांड रहती है, और पंखुड़ियों का इस्तेमाल गुलाब जल और गुलकंद जैसे वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट के लिए किया जाता है। प्रॉफिट काफी हद तक टारगेट मार्केट के लिए सही वैरायटी चुनने और लगातार क्वालिटी मैनेज करने पर निर्भर करता है। जब प्लान्ड प्रोडक्शन, सही इनपुट और स्मार्ट मार्केटिंग के साथ एक बिज़नेस के तौर पर देखा जाए, तो rose farming भरोसेमंद और स्केलेबल इनकम दे सकती है।

यह आर्टिकल Rose Farming को इनकम के नज़रिए से समझाता है: क्या उगाएं, कैसे सेट अप करें, क्रॉप मैनेजमेंट, कॉस्ट, रिस्क और स्मार्ट तरीके से कैसे बेचें।

Rose Farming इनकम वाली फसल के तौर पर क्यों काम करती है

गुलाब की खपत साल भर होती है, लेकिन शादियों, त्योहारों, वैलेंटाइन वीक, होटल और इवेंट सीजन और शहर के मार्केट में इसकी डिमांड सबसे ज़्यादा होती है। कई दूसरी फसलों के उलट, जहाँ कीमत MSP या मौसम के हिसाब से आने वाली चीज़ों पर बहुत ज़्यादा निर्भर करती है, गुलाब को अलग-अलग तरीकों और तरीकों से बेचा जा सकता है। इस फ्लेक्सिबिलिटी से किसानों को ऑप्शन मिलते हैं।

Rose Farming “इनकम पर फोकस” करने वाली हो जाती है जब आप इन चीज़ों के हिसाब से प्लान बनाते हैं:

1. मार्केट टाइप: लगाने से पहले मार्केट चुनें। खुले फूल वॉल्यूम और फ्रेशनेस पर फोकस करते हैं, कटे हुए फूलों को प्रीमियम क्वालिटी की ज़रूरत होती है, जबकि पंखुड़ियाँ प्रोसेसिंग यूनिट के लिए सही होती हैं। सही मार्केट चुनने से वैरायटी, कीमत और प्रॉफिट तय होता है।

2. क्वालिटी स्टैंडर्ड: कीमत तने की लंबाई, कली के साइज़, रंग एक जैसा होने और फ्रेशनेस पर निर्भर करती है। एक जैसी क्वालिटी खरीदारों का भरोसा बनाती है और किसानों को एवरेज रेट से प्रीमियम प्राइसिंग पर जाने में मदद करती है।

3. कटाई का समय: सुबह जल्दी कटाई करने से फ्रेशनेस और फूलदान की लाइफ बनी रहती है। रोज़ाना, डिसिप्लिन से तोड़ने से फूल का साइज़ एक जैसा रहता है, क्वालिटी बेहतर होती है और रेगुलर खरीदारों को लगातार सप्लाई मिलती रहती है।

4. कटाई के बाद हैंडलिंग: सही ग्रेडिंग, जल्दी हाइड्रेशन, ध्यान से पैकिंग और तेज़ ट्रांसपोर्ट से नुकसान कम होता है। अच्छी हैंडलिंग से खेती की लागत बढ़ाए बिना मार्केट प्राइस बढ़ सकता है।

5. खरीदार का रिश्ता: स्टेबल खरीदारों के साथ काम करने से प्राइस सिक्योरिटी और अनुमानित डिमांड मिलती है। लंबे समय के रिश्ते मार्केट के झटकों को कम करते हैं और किसानों को कॉन्फिडेंस के साथ प्रोडक्शन प्लान करने में मदद करते हैं।

अपने टारगेट मार्केट के लिए सही तरह का गुलाब चुनें

रोपने से पहले, पहले अपना मार्केट तय करें, फिर वैरायटी चुनें।

1. खुले फूल वाले गुलाब (लोकल मंडियां, मालाएं, धार्मिक इस्तेमाल): ये गुलाब मुख्य रूप से कलियों या फूलों के लिए उगाए जाते हैं, जिन्हें वज़न के हिसाब से या बंडलों में बेचा जाता है। ये मज़बूत होते हैं और खराब हैंडलिंग को भी सह लेते हैं। आसान ग्रेडिंग, जल्दी लोकल बिक्री और तेज़ टर्नओवर से इनकम का फ़ायदा मिलता है। मंडियों के पास के किसानों, छोटे ज़मीन मालिकों और फूलों की खेती शुरू करने वालों के लिए सबसे सही हैं।

2. कटे हुए फूल वाले गुलाब (गुलदस्ते, फूलवाले, इवेंट, एक्सपोर्ट-ग्रेड): कटे हुए गुलाब लंबे तने, एक जैसी कलियों और प्रीमियम लुक के लिए उगाए जाते हैं। इस सेगमेंट में ज़्यादा कीमत मिलती है लेकिन फसल और कटाई के बाद के मैनेजमेंट का सख्ती से ध्यान रखना पड़ता है। पॉलीहाउस (Polyhouse) या शेड नेट खेती से लगातार क्वालिटी पक्की होती है। इनकम प्रीमियम खरीदारों, हर तने के बेहतर रेट और कॉन्ट्रैक्ट सेल्स से होती है।

3. पंखुड़ियों का मकसद / प्रोसेसिंग (गुलकंद, गुलाब जल, ज़रूरी प्रोडक्ट): कुछ किसान मुख्य रूप से पंखुड़ियों के लिए गुलाब उगाते हैं और प्रोसेसिंग यूनिट को सप्लाई करते हैं। इनकम का फ़ायदा थोक में बिक्री और सही कली के आकार पर कम निर्भरता में है। यह आस-पास के प्रोसेसर के साथ क्लस्टर में सबसे अच्छा काम करता है। आसान नियम: फूलवाले खरीदारों तक पहुँच कटे हुए फूलों के लिए सही है, जबकि खुले फूलों का मतलब है आसान बिक्री और कम जोखिम।

मौसम और मिट्टी की ज़रूरतें (गुलाब को असल में क्या चाहिए)

गुलाब हल्के तापमान में अच्छी धूप और कंट्रोल की हुई नमी में सबसे अच्छा करते हैं। भारत के कई हिस्सों में, उन्हें मौसमी बदलाव और बेहतर सिंचाई से सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है।

1. मिट्टी: अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी गुलाब के लिए सबसे अच्छी होती है। भारी या पानी भरी मिट्टी जड़ों में बीमारी का खतरा बढ़ाती है और पौधे की ताकत और फूलों की पैदावार को कम करती है।

2. pH: थोड़ा एसिडिक से न्यूट्रल pH लगभग 6–7 जड़ों की अच्छी ग्रोथ, बेहतर पोषक तत्व लेने और लगातार फूल खिलने में मदद करता है।

3. धूप: गुलाब को रोज़ाना लगभग 6–8 घंटे सीधी धूप की ज़रूरत होती है। सही रोशनी कली बनने, तने की मज़बूती और फूलों की क्वालिटी को बेहतर बनाती है।

4. पानी निकलने की व्यवस्था: Rose Farming में सफलता के लिए अच्छी जल निकासी बहुत ज़रूरी है। ऊँची क्यारियाँ पानी भरने से रोकने और ज़्यादा सिंचाई या बारिश के दौरान जड़ों को बचाने में मदद करती हैं।

अगर आपकी मिट्टी में मिट्टी भारी है, तो ऊँची क्यारियाँ बनाएँ, ऑर्गेनिक चीज़ें बेहतर करें, और पानी निकलने की जगह पक्की करें ताकि बारिश का पानी जड़ों के पास जमा न हो।

खेत के लेआउट और पौधे लगाने के सामान की प्लानिंग

1. लाइन और पौधों के बीच की दूरी: वैरायटी और मार्केट टाइप के हिसाब से दूरी तय करें। सही दूरी से हवा का बहाव बेहतर होता है, बीमारी का प्रेशर कम होता है, और पौधे एक जैसे बढ़ते हैं।

2. क्यारी का लेआउट: ऊँची क्यारियाँ ऐसी डिज़ाइन करें जिनमें आने-जाने के लिए साफ़ रास्ते हों। अच्छा लेआउट सिंचाई की कुशलता, कटाई में आसानी, और रोज़ाना के खेती के कामों में मदद करता है।

3. पौधे लगाने के सामान की क्वालिटी: भरोसेमंद नर्सरी से हेल्दी, बीमारी-मुक्त पौधे लगाने का सामान इस्तेमाल करें। अच्छी शुरुआत से एक जैसी ग्रोथ होती है और फसल का जल्दी नुकसान कम होता है।

4. वैरायटी चुनना: टारगेट मार्केट के हिसाब से ही वैरायटी चुनें। कटे हुए फूल और खुले फूल वाले गुलाबों को बेहतर रिटर्न के लिए अलग-अलग खासियतों की ज़रूरत होती है।

5. भविष्य में बढ़ाने की प्लानिंग: बढ़ाने, स्टोरेज और पैकिंग एरिया के लिए जगह रखें। पहले से प्लानिंग करने से लेआउट में बदलाव और बाद में ज़्यादा खर्च से बचा जा सकता है।

ज़्यादा फूलों की पैदावार के लिए सिंचाई और न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट

1. सिंचाई की फ्रीक्वेंसी: बिना पानी भरे मिट्टी में नमी बनाए रखें। हल्की, रेगुलर सिंचाई से लगातार ग्रोथ होती है और फूलों की पैदावार कम करने वाले स्ट्रेस से बचा जा सकता है।

2. ड्रिप इरिगेशन का इस्तेमाल: ड्रिप इरिगेशन (Drip Irrigation) सिस्टम सीधे रूट ज़ोन में पानी पहुंचाते हैं, पानी बचाते हैं, और न्यूट्रिएंट एफिशिएंसी को बेहतर बनाते हैं, जिससे बेहतर फूल आते हैं।

3. बैलेंस्ड न्यूट्रिशन: न्यूट्रिएंट्स को बैलेंस्ड डोज़ में दें। ज़्यादा नाइट्रोजन से पत्तियों की ग्रोथ बढ़ती है, जबकि सही पोटैशियम से कलियों की क्वालिटी और रंग बेहतर होता है।

4. फर्टिगेशन का तरीका: फर्टिगेशन से सिंचाई के साथ न्यूट्रिएंट्स की छोटी, समय पर डोज़ मिलती है। इससे न्यूट्रिएंट्स बेहतर तरीके से सोख लिए जाते हैं और पौधे की ग्रोथ एक जैसी होती है।

5. मिट्टी और पत्तियों की टेस्टिंग: रेगुलर मिट्टी और पत्तियों का एनालिसिस कमियों को जल्दी ठीक करने में मदद करता है और फर्टिलाइज़र के बेकार इस्तेमाल से बचाता है, जिससे ज़्यादा और स्टेबल पैदावार मिलती है।

सबसे अच्छा तरीका: मिट्टी की टेस्टिंग + रेगुलर, बैलेंस्ड फीडिंग शेड्यूल। साथ ही, ऑर्गेनिक मैटर मिट्टी की लाइफ को बेहतर बनाता है और स्ट्रेस कम करता है, जिससे लगातार फूल आते हैं।

बिज़नेस माइंडसेट के साथ पेस्ट और बीमारी मैनेजमेंट

गुलाब (Roses) को एफिड्स, थ्रिप्स, माइट्स, पाउडरी मिल्ड्यू, ब्लैक स्पॉट और बोट्राइटिस (खासकर नमी वाली जगहों पर) जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। फायदेमंद तरीका है बचाव + जल्दी एक्शन लेना, न कि देर से स्प्रे करना। इनकम-फ्रेंडली बचाव चेकलिस्ट:

1. पौधों के बीच सही दूरी बनाए रखें और हवा का बहाव बनाए रखें: पौधों के बीच सही दूरी रखने से हवा का बहाव बेहतर होता है, नमी कम होती है, और गुलाब के खेतों में फंगल और बैक्टीरियल बीमारियों का फैलना कम होता है।

2. इंफेक्टेड हिस्सों को जल्दी हटा दें: इंफेक्टेड पत्तियों और फूलों को समय पर हटाने से बीमारी फैलने से रुकती है और हेल्दी पौधों को और नुकसान से बचाया जा सकता है।

3. खेत को साफ रखें: गिरी हुई पंखुड़ियों और पत्तियों में बीमारी के स्पोर्स हो सकते हैं। रेगुलर खेत की सफाई से इंफेक्शन का खतरा कम होता है और पौधे हेल्दी रहते हैं।

4. ज़्यादा पानी न दें: ज़्यादा पानी देने और ऊपर से सिंचाई करने से नमी और बीमारी का प्रेशर बढ़ता है। कंट्रोल्ड सिंचाई से जड़ें हेल्दी रहती हैं और पत्तियां सूखी रहती हैं।

5. स्टिकी ट्रैप का इस्तेमाल करें: स्टिकी ट्रैप सुरक्षित सेटअप में कीड़ों की एक्टिविटी पर नज़र रखने में मदद करते हैं। जल्दी पता चलने से कीड़ों का नुकसान बढ़ने से पहले समय पर कंट्रोल किया जा सकता है।

जब इन्फेक्शन शुरू हो, तो बताए गए मिले-जुले तरीकों (कल्चरल + बायोलॉजिकल + ज़रूरत के हिसाब से स्प्रे) से जल्दी काम करें। देर से कंट्रोल करने पर आमतौर पर ज़्यादा खर्च आता है और क्वालिटी कम हो जाती है, जिसका सीधा असर कीमत पर पड़ता है।

कटाई: जहाँ मुनाफ़ा तय होता है

1. कटाई का सही स्टेज: अपने मार्केट के लिए सही कली के स्टेज पर कटाई करें। जल्दी या देर से कटाई करने से फूलदान की लाइफ, लुक और फ़ाइनल सेलिंग प्राइस पर सीधा असर पड़ता है।

2. कटाई का समय: सुबह जल्दी कटाई करने से ताज़गी बनी रहती है, गर्मी का स्ट्रेस कम होता है, और ट्रांसपोर्ट और स्टोरेज के दौरान फूलों की क्वालिटी बेहतर होती है।

3. तेज़ कटिंग टूल: कटाई के लिए साफ़, तेज़ टूल का इस्तेमाल करें। सही कटाई से तने का नुकसान कम होता है, पानी सोखने में सुधार होता है, और फूल की लाइफ बढ़ती है।

4. रोज़ाना कटाई का तरीका: रोज़ाना रेगुलर कटाई से कली का साइज़ और क्वालिटी एक जैसी बनी रहती है। इससे खरीदारों के लिए लगातार सप्लाई और कैश फ़्लो भी बना रहता है।

5. तुरंत हाइड्रेशन: कटाई के तुरंत बाद तनों को साफ़ पानी में रखें। जल्दी हाइड्रेशन से वे मुरझाते नहीं हैं और मार्केट वैल्यू बनी रहती है।

गर्मी में कुछ घंटों की देरी से फूलदान की लाइफ और खरीदार की कीमत कम हो सकती है। इसीलिए कई सफल किसान कटाई को रोज़ाना के "डिस्पैच रूटीन" की तरह मानते हैं।

कटाई के बाद हैंडलिंग और पैकिंग

अगर आप बेहतर इनकम चाहते हैं, तो आपको नुकसान कम करना होगा और ताज़गी बनाए रखनी होगी।

1. तुरंत ग्रेडिंग: फूलों की कटाई के तुरंत बाद तने की लंबाई, कली के साइज़ और ताज़गी के आधार पर ग्रेडिंग करनी चाहिए। एक जैसी ग्रेडिंग से खरीदार का भरोसा बनता है और बेहतर और ज़्यादा एक जैसी कीमतें पाने में मदद मिलती है।

2. पैकिंग से पहले हाइड्रेशन: पैकिंग से पहले तनों को साफ़ पानी या हाइड्रेशन सॉल्यूशन में रखना चाहिए। यह स्टेप नमी के स्ट्रेस को कम करता है और स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट (storage and transport) के दौरान फूलों को ताज़ा रखता है।

3. सावधानी से पैकिंग का तरीका: फूलों को ठीक से एक सीध में रखना चाहिए और झुकने या चोट लगने से बचाने के लिए धीरे से पैक करना चाहिए। अच्छी पैकिंग देखने की क्वालिटी को बचाती है, जिसका सीधा असर मार्केट वैल्यू पर पड़ता है।

4. साफ़ चीज़ों का इस्तेमाल: हमेशा साफ़ बॉक्स, स्लीव और पैकिंग मटीरियल का इस्तेमाल करें। साफ़-सफ़ाई से संभालने से बीमारी का खतरा कम होता है और तोड़े गए फूलों की शेल्फ लाइफ़ बढ़ती है।

5. मार्केट तक तेज़ी से ट्रांसपोर्ट: खेत से मार्केट तक तेज़ी से पहुँचना बहुत ज़रूरी है। कम ट्रांज़िट टाइम से ताज़गी बनी रहती है और किसानों को ज़्यादा कीमतें पाने में मदद मिलती है।

इनकम मॉडल: गुलाब के किसान असल में बेहतर पैसे कैसे कमाते हैं

1. मार्केट-फ़ोकस्ड प्रोडक्शन: जब किसान किसी खास मार्केट के लिए गुलाब उगाते हैं तो वे ज़्यादा कमाते हैं। खरीदार की डिमांड के हिसाब से वैरायटी और क्वालिटी का मिलान करने से रिजेक्शन से बचा जा सकता है और कीमत बेहतर मिलती है।

2. साल भर कटाई: अलग-अलग समय पर छंटाई और पौधे लगाने से लगातार कटाई हो पाती है। रेगुलर सप्लाई खरीदारों को जोड़े रखती है और सीज़नल इनकम में उछाल के बजाय लगातार कैश फ्लो पक्का करती है।

3. क्वालिटी के आधार पर कीमत: एक जैसी तने की लंबाई, कली का साइज़ और ताज़गी गुलाब को ज़्यादा कीमत वाले ब्रैकेट में ले जाती है। क्वालिटी मैनेजमेंट से अक्सर ज़मीन का एरिया बढ़ाए बिना इनकम बढ़ जाती है।

4. डायरेक्ट खरीदार लिंकेज: फूल बेचने वालों, इवेंट प्लानर या होलसेलर को सीधे बेचने से बिचौलियों का मार्जिन कम होता है और किसानों के लिए नेट रिटर्न बेहतर होता है।

5. रिस्क डाइवर्सिफिकेशन: खुले फूल, कटे हुए फूल या पंखुड़ियों को मिलाने से रिस्क फैलता है। जब एक मार्केट धीमा होता है, तो दूसरे मार्केट कुल मिलाकर इनकम में स्थिरता बनाए रखने में मदद करते हैं।

वैल्यू एडिशन सबसे अच्छा तब होता है जब आपके पास पहले से ही लगातार प्रोडक्शन हो और ऐसा खरीदार हो जो ऑर्डर बार-बार दे।

खर्च, रिस्क और उन्हें कैसे कम करें

1. पौधे लगाने और सेटअप का खर्च: शुरुआती खर्च में पौधे लगाने का सामान, क्यारी तैयार करना, सिंचाई और बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं। सही स्केल चुनना और छोटी शुरुआत करना, इन्वेस्टमेंट को कंट्रोल करने और बिना ज़्यादा पैसे के दबाव के सीखने में मदद करता है।

2. इनपुट और मेंटेनेंस का खर्च: फर्टिलाइज़र, लेबर, प्रूनिंग और पेस्ट कंट्रोल से रेगुलर खर्च जुड़ते हैं। अच्छी सिंचाई, बैलेंस्ड न्यूट्रिशन और बचाव की देखभाल से बर्बादी कम होती है और खर्च मैनेजेबल रहता है।

3. बीमारी और कीड़े का खतरा: गुलाब नमी और खराब हवा के प्रति सेंसिटिव होते हैं। अच्छी दूरी, साफ-सफाई और जल्दी मॉनिटरिंग से बीमारी का फैलना कम होता है और केमिकल पर निर्भरता कम होती है।

4. मार्केट प्राइस में उतार-चढ़ाव: फूलों के दाम डिमांड और मौसम के हिसाब से रोज़ बदलते हैं। खरीदारों के साथ अच्छे रिश्ते बनाने और मार्केट में अलग-अलग तरह के लोग लाने से इनकम में होने वाले झटके कम होते हैं।

5. कटाई के बाद नुकसान: खराब हैंडलिंग और देरी की वजह से नुकसान होता है। सही कटाई, जल्दी हाइड्रेशन और तेज़ ट्रांसपोर्ट से बर्बादी काफी कम होती है और मुनाफ़ा सुरक्षित रहता है।

आखिरी बात

Rose Farming एक अच्छा इनकम ऑप्शन बन जाती है जब इसे सिर्फ़ एक फसल नहीं, बल्कि क्वालिटी पर आधारित सप्लाई बिज़नेस माना जाता है। यह पौधा हर कदम पर डिसिप्लिन का इनाम देता है: अच्छा प्लांटिंग मटीरियल, बैलेंस्ड न्यूट्रिशन, समय पर प्रूनिंग और ध्यान से हार्वेस्ट हैंडलिंग। चाहे खुले फूलों वाले मार्केट के लिए देसी गुलाब (desi gulaab) हो या प्रीमियम कटे हुए गुलाब, रेगुलर रहने से ही इनकम तय होती है। प्रॉफिट में सबसे बड़ी बढ़ोतरी शायद ही कभी पौधों की संख्या बढ़ाने से होती है। यह आमतौर पर सही ग्रेड को सही खरीदार को बेचने, कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और प्रोडक्शन को असल मार्केट डिमांड के साथ अलाइन करने से होती है। जो किसान रोज़ाना क्वालिटी मैनेज करते हैं, उन्हें एक ही खेत के साइज़ से भी बेहतर दाम मिलते हैं।

शुरुआती लोगों के लिए, सबसे सुरक्षित रास्ता है कि वे मार्केट में एक साफ चॉइस के साथ शुरू करें, चाहे खुले फूल हों या कटे हुए फूल, एक भरोसेमंद खरीदार रिलेशनशिप बनाएं और रोज़ाना की फसल के रूटीन में माहिर हों। एक बार जब सप्लाई और क्वालिटी एक जैसी हो जाती है, तो स्केलिंग बढ़ाना बहुत कम रिस्की और काफी ज़्यादा प्रॉफिटेबल हो जाता है।




Tags : Rose | Rose Farming | Desi Gulaab

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