धान की खेती भारत की सबसे पुरानी और प्रमुख कृषि गतिविधियों में से एक है। भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है और यहाँ का अधिकतर ग्रामीण जीवन धान की खेती पर आधारित है। धान केवल भोजन का मुख्य स्रोत नहीं, बल्कि किसानों की आमदनी, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी है।
धान की खेती क्या है?
धान की खेती वह प्रक्रिया है जिसमें किसान खेतों में चावल उत्पादन के लिए पौधे उगाते हैं। यह मुख्य रूप से पानी पर निर्भर फसल है और इसके लिए गीली मिट्टी व गर्म जलवायु की आवश्यकता होती है।
धान की सबसे खास बात यह है कि यह बढ़ती आबादी के लिए मुख्य भोजन प्रदान करता है और बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है।
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धान की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु (Climate Requirements)
धान गर्म और आर्द्र (humid) जलवायु में सबसे अधिक उत्पादन देता है।
तापमान: 20°C से 35°C
बारिश: 100–200 सेमी
धूप: भरपूर धूप आवश्यक
हवा: तेज हवा से नुकसान, खासकर फूल आने के समय
यदि किसान सिंचाई की सुविधा रखते हैं, तो कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी धान की खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है।
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धान के लिए मिट्टी (Soil Requirements)
धान लगभग सभी प्रकार की मिट्टी में उग सकता है, लेकिन—
सबसे उपयुक्त मिट्टियाँ:
- जलोढ़ मिट्टी
- चिकनी (Clayey) मिट्टी
- दोमट मिट्टी
- पानी रोकने वाली मिट्टी
pH 5.5–6.5 आदर्श माना जाता है।
धान की रोपाई में मिट्टी का समतल (leveling) होना बेहद ज़रूरी है ताकि पानी सही तरीके से खेत में रुके।
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धान की लोकप्रिय किस्में (Best High-Yield Varieties)
आजकल हाई-यील्डिंग और रोग-प्रतिरोधी किस्में किसानों द्वारा ज्यादा उगाई जाती हैं:
- Basmati varieties: Pusa Basmati 1121, 1509, 1708
- Hybrid varieties: PHB 71, KRH-2
- Normal varieties: IR-64, Sona Masuri, MTU-1010, Swarna
- Early-maturity varieties: 1001, 1010 (कम समय में उत्पादन)
किसान अपने क्षेत्र की कृषि विज्ञान केंद्र की सलाह के अनुसार किस्म चुनें।
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धान की बुवाई की विधि (Methods of Rice Cultivation)
धान की खेती अलग-अलग तरीकों से की जा सकती है:
(1) परंपरागत रोपाई विधि (Transplanting Method)
- सबसे लोकप्रिय तरीका।
- पौध तैयार कर 20–25 दिन बाद खेत में रोपाई की जाती है।
- उत्पादन अधिक मिलता है।
(2) सीधी बुवाई (Direct Sowing)
- इसमें बीज सीधे खेत में डाले जाते हैं।
- समय और लागत दोनों कम
- पानी की जरूरत भी कम
(3) SRI तकनीक (System of Rice Intensification)
- आधुनिक और कम पानी वाली विधि।
- कम बीज
- कम पानी
- ज्यादा उपज
- अधिक जड़ विकास
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बीज उपचार और पौध तैयार करना
बीज को 10% नमक घोल में डुबोकर हल्के (खराब) बीज निकाल दें।
फफूंदनाशक जैसे कार्बेन्डाजिम से उपचार करें।
पौधशाला में 4–6 सेमी मोटी परत में बीज फैलाएँ।
20–25 दिनों में पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं।
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खेत की तैयारी (Land Preparation)
धान के लिए खेत की तैयारी इस प्रकार की जाती है:
- खेत में पानी भरें
- जुताई करें
- पडलिंग (कीचड़ बनाना)
- खेत को समतल करें
इससे पौधों को मजबूत पकड़ और पौष्टिकता मिलती है।
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रोपाई की दूरी (Spacing)
- सामान्य धान: 20×20 सेमी
- हाई-यील्डिंग varieties: 25×25 सेमी
- SRI विधि: 30×30 सेमी
Distant planting से पौधों को हवा और सूर्य प्रकाश बेहतर मिलता है।
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खाद और उर्वरक (Fertilizer Management)
जैविक खाद
- गोबर खाद
- वर्मी कम्पोस्ट
- हरी खाद
- नीम खली
रासायनिक खाद (NPK)
आम तौर पर 60:40:40 की मात्रा का प्रयोग होता है।
पहली किस्त – रोपाई के 10–15 दिन
दूसरी – 30–35 दिन
तीसरी – 45–50 दिन
जिंक सल्फेट की कमी होने पर जिंक का छिड़काव करें।
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पानी की आवश्यकता (Irrigation System)
- धान पानी पर निर्भर फसल है।
- रोपाई के बाद 2–3 सेंटीमीटर पानी
- विकास के दौरान 5–7 सेंटीमीटर
- दाना बनने के समय 10–12 सेंटीमीटर
SRI तकनीक में आवश्यकता 50% कम होती है।
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कीट और रोग नियंत्रण
मुख्य कीट
- स्टेम बोरर
- पत्ती लपेटक
- भूरे तिलक कीट (Brown Planthopper)
जैविक नियंत्रण: नीम तेल, ट्राइकोग्रामा उपयोग करें।
मुख्य रोग
- झुलसा रोग
- धब्बा रोग
- ब्लास्ट रोग
बीज उपचार, फसल चक्रीकरण और उचित नमी नियंत्रण से रोग कम होते हैं।
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कटाई, मड़ाई और भंडारण
- धान की कटाई उस समय करें जब 80–85% दाने पक जाएँ।
- थ्रेसिंग मशीन से मड़ाई करें।
- दानों को अच्छी तरह सुखाकर 14% नमी पर स्टोर करें।
यह दानों के खराब होने से बचाता है।
- लागत और मुनाफ़ा (Cost & Profit of Rice Farming)
प्रति एकड़ औसत लागत
- बीज: ₹800–1500
- खाद/उर्वरक: ₹2000–3000
- मजदूरी: ₹3000–5000
- सिंचाई: ₹1500–2500
- अन्य खर्च: ₹1000
- कुल लागत: ₹10,000–14,000 प्रति एकड़
प्रति एकड़ उत्पादन
18–25 क्विंटल (Variety और Management पर निर्भर)
प्रति एकड़ मुनाफ़ा
₹15,000–35,000 (बासमती में उच्च लाभ)
धान एक लाभदायक फसल है और बाजार में इसकी हमेशा मांग बनी रहती है।
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धान की खेती में नई तकनीकें (Modern Technologies)
- ड्रिप व स्प्रिंकलर (कम पानी में धान)
- ड्रोन से स्प्रे
- हाई-यील्डिंग varieties
- Precision farming
- जलवायु-स्मार्ट कृषि
निष्कर्ष
धान की खेती सही तकनीक, उचित किस्म, समय पर रोपाई, उर्वरक और सिंचाई प्रबंधन के साथ बेहद लाभदायक साबित होती है। आज आधुनिक तकनीकें जैसे SRI, ड्रिप सिंचाई और हाई-यील्डिंग varieties किसानों को कम लागत में ज्यादा उत्पादन देती हैं। यदि किसान वैज्ञानिक सलाह के अनुसार खेती करें, तो धान से अच्छी आमदनी संभव है।
FAQs: धान की खेती से जुड़े सामान्य प्रश्न
Q1. धान की खेती के लिए सबसे अच्छी किस्म कौन सी है?
Pusa Basmati 1121, 1509, IR-64, MTU-1010, Swarna, Sona Masuri सबसे लोकप्रिय किस्में हैं।
Q2. धान में कितना पानी चाहिए?
औसतन 5–10 सेंटीमीटर पानी लगातार बनाए रखना चाहिए।
Q3. धान की फसल कब काटी जाती है?
जब 80–85% दाने पक जाएँ, तब कटाई सही रहती है।
Q4. एक एकड़ धान में कितना उत्पादन मिलता है?
18–25 क्विंटल, जबकि कुछ हाई-यील्ड varieties में 30 क्विंटल तक।
Q5. क्या धान की खेती में मुनाफ़ा है?
हाँ, सही प्रबंधन के साथ प्रति एकड़ ₹15,000–35,000 तक लाभ मिल सकता है।
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