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ज़ोरिन बीन मिज़ो किसान बने दूसरे किसानों के लिए बने प्रेरणा

17 Nov, 2025 03:52 PM

मिजोरम के पहाड़ी इलाकों में खेती हमेशा से एक चुनौतीपूर्ण कार्य रही है। झूम खेती (शिफ्टिंग कल्टीवेशन), भारी वर्षा और कीट-बीमारियों का दबाव किसानों की उत्पादन क्षमता को सीमित करता रहा है।

FasalKranti
Fiza, समाचार, [17 Nov, 2025 03:52 PM]
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मिजोरम के पहाड़ी इलाकों में खेती हमेशा से एक चुनौतीपूर्ण कार्य रही है। झूम खेती (शिफ्टिंग कल्टीवेशन), भारी वर्षा और कीट-बीमारियों का दबाव किसानों की उत्पादन क्षमता को सीमित करता रहा है। ऐसी स्थिति में फ्रेंच बीन किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण नकदी फसल के रूप में उभरी, लेकिन उच्च उत्पादकता और बेहतर गुणवत्ता के लिए उपयुक्त किस्मों की कमी हमेशा महसूस की गई।

इसी आवश्यकता को देखते हुए भाकृअनुप-पूर्वोत्तर पहाड़ी क्षेत्र के लिए अनुसंधान परिसर (ICAR–NEH), मिजोरम केंद्र ने मिजो किसानों के लिए उच्च उपज देने वाली फ्रेंच बीन किस्मों पर विस्तृत शोध शुरू किया। इसी क्रम में साल 2019 में एक ऐसी किस्म सामने आई, जिसने मिजोरम के किसानों के जीवन में नई रोशनी भर दी—ज़ोरिन बीन (MZFB-48)

 

कैसे पहचानी गई ‘ज़ोरिन बीन’ की क्षमता?

शुरुआत में कई फ्रेंच बीन किस्मों का परीक्षण झूम क्षेत्रों और आर्द्रभूमि चावल परती खेती में किया गया। भारी वर्षा और कीट-बीमारियों (जैसे पॉड बग और फ्यूज़ैरियम रोट) के कारण पारंपरिक किस्में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकीं। दूसरी ओर, सिंचित परिस्थितियों में सर्दियों की खेती ने स्पष्ट संकेत दिए कि सही किस्म अपनाने पर किसान बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।

इसी दौरान वैज्ञानिकों ने एक बैंगनी रंग की (एंथोसाइनिन-समृद्ध) फ्रेंच बीन किस्म की पहचान की, जिसे बाद में ‘ज़ोरिन बीननाम दिया गया। इसकी खासियतें थीं—

  • उच्च उपज क्षमता
  • विभिन्न कृषि-पारिस्थितिक परिस्थितियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन
  • विशिष्ट बैंगनी रंग के कारण बाज़ार में अधिक मांग
  • झूम और रबी दोनों मौसमों में बेहतर उत्पादन

5 मार्च 2019 को इसे राज्य किस्म विमोचन समिति (SVRC) द्वारा जारी किया गया। इसके बाद यह किस्म मिजोरम के किसानों में तेजी से लोकप्रिय होने लगी।

 

उत्पादन क्षमता जिसने किसानों का दिल जीता

झूम क्षेत्रों में फली उपज: 7.02 से 8.20 टन/हेक्टेयर
आर्द्रभूमि (रबी) में बीज उपज: 3.54 से 3.87 टन/हेक्टेयर

ये आंकड़े पारंपरिक किस्मों की तुलना में कहीं अधिक थे। इसके आकर्षक रंग, स्वाद और बाजार मूल्य ने इसे किसानों के लिए आर्थिक रूप से लाभदायक फसल बना दिया।

 

गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन: उद्यमिता का सुनहरा मौका

ज़ोरिन बीन की तेज़ी से बढ़ती मांग को देखते हुए, केंद्र ने आदिवासी उप योजना (TSP) के तहत किसानों को गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन का प्रशिक्षण देना शुरू किया।

  • किसानों को बीज, उर्वरक, सिंचाई साधन और पौध संरक्षण सामग्री उपलब्ध कराई गई।
  • कोलासिब जिले में सर्दियों के महीनों में बड़े पैमाने पर बीज उत्पादन को बढ़ावा दिया गया।

इस कार्यक्रम से किसानों को न केवल अतिरिक्त आय मिली बल्कि वे स्थानीय स्तर पर बीज उत्पादन के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने लगे।

 

सफल किसान: श्री पु कैस्पर लालनुनमाविया की मिसाल

38 चयनित किसानों में से कैस्पर लालनुनमाविया इस योजना के सबसे सफल उद्यमी किसानों में शामिल हुए। रबी सीजन 2019 और 2020 में उन्होंने ज़ोरिन बीन के गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन में असाधारण सफलता हासिल की।

उनकी कहानी बताती है कि—

  • सही तकनीक
  • वैज्ञानिक मार्गदर्शन
  • उच्च गुणवत्ता वाली किस्म
  • और सरकार–संस्थान की साझेदारी

किसी भी किसान के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है। उनकी उद्यमिता ने न केवल उनकी आय को बढ़ाया बल्कि पूरे जिले में गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता भी सुनिश्चित की।

 

मिजोरम का बड़ा कदम: ‘वोकल फॉर लोकल’ की ओर

बीज उत्पादन कार्यक्रम ने मिजोरम में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार किया। अब राज्य स्थानीय स्तर पर गुणवत्तायुक्त ज़ोरिन बीन बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने की ओर बढ़ रहा है, जो "वोकल फॉर लोकल" के सिद्धांतों का जीवंत उदाहरण है।

 

ज़ोरिन बीन बनी किसानों की नई आशा

ज़ोरिन बीन ने यह साबित किया है कि—
वैज्ञानिक शोध + किसानों की मेहनत + सरकारी सहायता
=
आर्थिक समृद्धि और स्थायी कृषि विकास

ज़ोरिन बीन न केवल एक फसल है, बल्कि मिजो किसानों के लिए समृद्धि, आत्मनिर्भरता और कृषि नवाचार का प्रतीक बन चुकी है।

 




Tags : Agriculture | Farming | Indian Agriculture

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