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डिजिटल प्लेटफॉर्मों से बढ़ रही किसानों की आय, सरकार उठा रही ठोस कदम

24 Jul, 2025 11:45 AM

किसानों की आय बढ़ाने और उनकी उपज को बेहतर मूल्य दिलाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार लगातार प्रयासरत है। इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत वर्ष 2016 में 'राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम)' योजना

FasalKranti
Emren, समाचार, [24 Jul, 2025 11:45 AM]
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किसानों की आय बढ़ाने और उनकी उपज को बेहतर मूल्य दिलाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार लगातार प्रयासरत है। इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत वर्ष 2016 में 'राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम)' योजना की शुरुआत की गई, जिसका उद्देश्य किसानों को पारदर्शी और इलेक्ट्रॉनिक तरीके से विभिन्न बाजारों तक पहुंच दिलाना था ताकि वे अपनी फसल को अधिक से अधिक खरीदारों को बेच सकें।

अब सरकार किसानों की डिजिटल मार्केट तक पहुंच और भी आसान बना रही है। इसके लिए किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को ई-नाम के साथ-साथ ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) और गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) जैसे प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्मों से जोड़ा जा रहा है, जिससे किसानों को अधिक बाजार, बेहतर मूल्य और नई संभावनाएं मिल सकें।

इसी बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी एक वर्किंग पेपर के अनुसार, टमाटर, प्याज और आलू जैसे आवश्यक सब्जियों की कीमतों में किसानों की हिस्सेदारी काफी सीमित है। उपभोक्ता द्वारा दिए गए प्रत्येक रुपये में से टमाटर के लिए किसान को लगभग 33%, प्याज के लिए 36% और आलू के लिए 37% हिस्सा मिलता है। एक अन्य वर्किंग पेपर में बताया गया कि फलों की कीमतों में यह हिस्सा केले के लिए 31%, अंगूर के लिए 35% और आम के लिए 43% है। इस अंतर का मुख्य कारण बाजार चैनलों की अधिकता, ऊँची मार्केटिंग लागत, मार्जिन और फसल की बर्बादी है, जो किसानों की आय को सीमित कर देती है।

इन्हीं समस्याओं के समाधान के लिए सरकार न केवल उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने पर ध्यान दे रही है, बल्कि कृषि उपज के बेहतर विपणन और फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने की दिशा में भी कई कदम उठा रही है।

एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) के तहत खेत स्तर पर शीतगृह (कोल्ड स्टोरेज) की स्थापना को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि फसलें खराब होने से बच सकें और किसानों को उपज का उचित मूल्य मिल सके। यह सुविधा न सिर्फ छोटे और सीमांत किसानों के लिए उपलब्ध है, बल्कि एपीएमसी मंडियों, कृषि निर्यात समूहों और बड़े व्यवसायों के लिए भी खुली है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, 30 जून 2025 तक AIF के तहत 8258 करोड़ रुपये की स्वीकृति के साथ 2454 शीतगृह परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है।

इसके अलावा, बागवानी क्षेत्र के विकास के लिए मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) योजना के तहत भी सरकारी सहायता दी जा रही है। इसमें पैक हाउस, कोल्ड स्टोरेज, रीफर ट्रांसपोर्ट, राइपनिंग चैंबर आदि की स्थापना को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत सामान्य क्षेत्रों में परियोजना लागत का 35% और पहाड़ी व अनुसूचित क्षेत्रों में 50% तक सब्सिडी दी जा रही है, जो राज्य बागवानी मिशनों के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है।

लोकसभा में यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने एक लिखित उत्तर के माध्यम से दी। सरकार के इन ठोस प्रयासों से यह स्पष्ट है कि कृषि क्षेत्र को तकनीक, संरचना और विपणन के माध्यम से सशक्त बनाकर किसानों की आमदनी को बढ़ाने की दिशा में व्यापक काम हो रहा है।

 




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