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Sarso ki kheti में पीली पत्तियां समाधान और सही स्प्रे

07 Feb, 2026 04:49 PM

Sarso ki kheti में पीली पत्तियां पोषण या प्रबंधन की कमी का संकेत होती हैं। सही समय पर कारण पहचानकर संतुलित स्प्रे और उचित देखभाल से फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है।

FasalKranti
Taniyaa Ahlawat, समाचार, [07 Feb, 2026 04:49 PM]
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सरसों की फसल में पत्तियों का पीला होना किसानों के सामने अक्सर दिखाई देने वाली समस्या है, लेकिन इसे हल्के में लेना नुकसानदेह हो सकता है। समय रहते इसकी वजह न समझी जाए तो पौधों की बढ़वार रुक जाती है और दानों की भरावट पर सीधा असर पड़ता है। राहत की बात यह है कि अधिकतर मामलों में सही पोषण प्रबंधन, संतुलित सिंचाई और उपयुक्त स्प्रे अपनाकर इस समस्या को आसानी से संभाला जा सकता है और फसल को फिर से स्वस्थ बनाया जा सकता है।

Sarso में पत्तियां yellow क्यों होती हैं

Mustard यानी सरसों की फसल में पत्तियों का पीला (Yellow) पड़ना हमेशा किसी एक वजह से नहीं होता। ज्यादातर मामलों में यह समस्या पोषण की कमी से जुड़ी होती है। जब मिट्टी में नाइट्रोजन, सल्फर या जिंक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं होते, तो सरसों के पौधे धीरे-धीरे अपना प्राकृतिक हरा रंग खोने लगते हैं। इसके अलावा खेत में पानी का ज्यादा ठहराव, ठंडा मौसम, जड़ों का कमजोर विकास या खाद का असंतुलित उपयोग भी mustard फसल में पीलापन बढ़ा सकता है। कई बार शुरुआत में हल्का yellow रंग दिखाई देता है, जिसे किसान मामूली समझकर छोड़ देते हैं। यही छोटी लापरवाही आगे चलकर फसल की बढ़वार और पैदावार दोनों को नुकसान पहुंचा देती है।

समस्या की सही पहचान कैसे करें

Yellow Sarso की फसल में yellow पत्तियां अलग-अलग संकेत देती हैं। यदि सबसे पहले निचली पत्तियां पीली पड़ने लगें और पौधे की बढ़त धीमी दिखे, तो आमतौर पर नाइट्रोजन की कमी इसका कारण होती है। नई निकलने वाली पत्तियां अगर पीली हों लेकिन उनकी नसें हरी रहें, तो यह जिंक की कमी की ओर इशारा करता है। वहीं, पूरे पौधे में हल्का पीलापन और तने की कमजोरी अक्सर सल्फर की कमी से जुड़ी होती है। कारण की सही पहचान जरूरी है, क्योंकि बिना वजह किया गया स्प्रे कई बार असर नहीं दिखाता।

Sarso में yellow पत्तियों का समाधान

समाधान की शुरुआत खेत की नमी जांचने से करनी चाहिए। अगर खेत में पानी रुक रहा है, तो सबसे पहले जल निकास सुधारना जरूरी होता है। इसके बाद पोषण संतुलन पर ध्यान देना चाहिए। सही मात्रा में खाद देने से कई बार पीलापन अपने आप कम हो जाता है। समय पर निराई-गुड़ाई करने से जड़ें मजबूत होती हैं और पौधे पोषक तत्वों को बेहतर तरीके सेशोषित कर पाते हैं, जिससे फसल फिर से हरी और स्वस्थ दिखने लगती है।

सही स्प्रे का महत्व

जब मिट्टी से पोषक तत्व जल्दी उपलब्ध नहीं हो पाते, तब पत्तियों पर स्प्रे एक असरदार उपाय बन जाता है। Sarso की फसल में yellow पत्तियों के लिए पोषक तत्व आधारित स्प्रे ज्यादा कारगर माने जाते हैं। स्प्रे करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि मात्रा संतुलित हो और मौसम शांत हो। बहुत तेज धूप या हवा में किया गया स्प्रे असर कम कर सकता है।

स्प्रे करते समय किन बातों का ध्यान रखें

स्प्रे करने का सही समय सुबह जल्दी या शाम को माना जाता है, जब धूप तेज न हो। बिना विशेषज्ञ सलाह के कई दवाओं या पोषक तत्वों को एक साथ मिलाकर छिड़काव करना नुकसानदेह हो सकता है। फसल किस अवस्था में है, यह देखकर ही स्प्रे का चुनाव करना चाहिए। बेवजह बार-बार छिड़काव करने से लागत तो बढ़ती है, लेकिन उत्पादन में अपेक्षित सुधार नहीं होता।

सरसों की खेती: किसानों के लिए कम लागत में भरोसेमंद लाभ

सरसों की खेती किसानों के लिए इसलिए लाभकारी मानी जाती है क्योंकि इसमें लागत अपेक्षाकृत कम आती है और बाजार मांग स्थिर रहती है। यह फसल कम पानी में भी अच्छी उपज देती है, जिससे सिंचाई खर्च घटता है। तेल और खली दोनों की मांग होने के कारण किसानों को अपनी उपज बेचने में दिक्कत नहीं होती। कम समय में तैयार होने वाली यह फसल रबी सीजन में दूसरी फसलों के साथ आसानी से फिट हो जाती है और किसानों को सुरक्षित व संतुलित आय का अवसर देती है।

भविष्य में yellow पत्तियों से कैसे बचें

Yellow Sarso की फसल को मजबूत और स्वस्थ बनाने के लिए बुवाई से पहले मिट्टी की जांच कराना बेहद जरूरी होता है। इससे यह साफ हो जाता है कि खेत में किन पोषक तत्वों की कमी है और किस तत्व की जरूरत नहीं है। इसी आधार पर संतुलित उर्वरक योजना बनाई जाती है। सही समय पर सिंचाई और नियमित देखभाल से सरसों के पौधे अच्छे से बढ़ते हैं, पत्तियां हरी बनी रहती हैं और उत्पादन भी स्थिर व बेहतर मिलता है।

निष्कर्ष

Sarso ki kheti में yellow पत्तियां दिखना हमेशा किसी गंभीर रोग का संकेत नहीं होता। अधिकतर मामलों में यह पोषण की कमी या खेत प्रबंधन में हुई चूक का नतीजा होता है। अगर समय रहते असली कारण पहचान लिया जाए और उसी के अनुसार सही समाधान व उपयुक्त स्प्रे किया जाए, तो फसल जल्दी ही सुधरने लगती है। सही समय पर लिया गया निर्णय न केवल पत्तियों का पीलापन दूर करता है, बल्कि सरसों की पैदावार को भी सुरक्षित और संतुलित बनाए रखता है।

Faqs

1.सरसों की खेती किसानों के लिए क्यों लाभकारी है?

सरसों में लागत कम आती है, पानी की जरूरत सीमित होती है और तेल व खली की स्थिर मांग के कारण किसानों को भरोसेमंद बाजार मिलता है।

2.सरसों की फसल कितने समय में तैयार हो जाती है?

सरसों की फसल आमतौर पर 110–130 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे यह रबी सीजन की तेज फसल मानी जाती है।

3.सरसों की खेती में पानी की कितनी जरूरत होती है?

सरसों को ज्यादा सिंचाई नहीं चाहिए। सही समय पर 2–3 सिंचाई पर्याप्त होती हैं, जिससे लागत भी कम रहती है।

4.सरसों की पत्तियां पीली क्यों हो जाती हैं?

अक्सर नाइट्रोजन, सल्फर या जिंक की कमी, ज्यादा पानी रुकना या असंतुलित खाद प्रबंधन इसके कारण होते हैं।

5.सरसों की खेती में मिट्टी जांच क्यों जरूरी है?

मिट्टी जांच से पोषक तत्वों की सही स्थिति पता चलती है, जिससे सही खाद योजना बनती है और अनावश्यक खर्च से बचाव होता है।

6.सरसों की उपज बेचने में क्या दिक्कत आती है?

सरसों की मांग तेल मिलों और मंडियों में बनी रहती है, इसलिए सही गुणवत्ता होने पर बिक्री में आमतौर पर समस्या नहीं आती।




Tags : Yellow Mustard | Sarso ki kheti | Agriculture

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