अपराजिता का पौधा देखने में साधारण लगता है, लेकिन सही समय पर की गई देखभाल इसे पूरे मौसम फूलों से भर सकती है। कई लोगों के यहाँ पौधा हरा-भरा तो रहता है, पर फूल कम आते हैं या कुछ समय बाद रुक जाते हैं। इसका कारण अक्सर एक ही होता है, February महीने को हल्के में लेना।
फरवरी वह समय है जब अपराजिता सर्दी से बाहर निकलकर नई ग्रोथ और फूलों के लिए खुद को तैयार करती है। अगर इस महीने सही देखभाल मिल जाए, तो फूल लंबे समय तक आते रहते हैं। नीचे फरवरी के लिए एक पूरी तरह नया, अपडेट और व्यावहारिक गाइड दिया गया है।
February Aprajita Flower की सही छंटाई बहुत जरूरी होती है। सर्दियों के बाद बेल में कई सूखी, कमजोर और उलझी हुई टहनियां रह जाती हैं, जो पौधे की ऊर्जा खींचती रहती हैं लेकिन फूल नहीं देतीं। इन टहनियों को हटाने और बहुत लंबी बेल को हल्का छोटा करने से पौधे को नई ग्रोथ का मौका मिलता है। पुराने फूलों के डंठल काटने से भी पौधा हल्का रहता है। सही छंटाई के बाद अपराजिता नई शाखाएं निकालती है और इन्हीं नई टहनियों पर आगे चलकर ज्यादा और लगातार फूल आते हैं
लंबे समय तक एक ही मिट्टी में रहने से अपराजिता की जड़ों को पूरा पोषण नहीं मिल पाता। ऊपर से मिट्टी ठीक दिखती है, लेकिन अंदर से उसकी ताकत धीरे-धीरे कम हो जाती है। February में पौधा नई बढ़वार और फूलों की तैयारी करता है, इसलिए इस समय मिट्टी को फिर से सक्रिय करना जरूरी होता है। अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट मिलाने से मिट्टी में जान लौट आती है। 10–15 दिन में एक बार हल्का जैविक खाद घोल देने और ऊपर की मिट्टी को हल्का सा ढीला करने से जड़ों को हवा और पोषण दोनों मिलते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि जड़ें मजबूत बनती हैं और पौधा बार-बार नई कलियां निकालने लगता है। अपराजिता को अच्छी बढ़वार और फूलों के लिए धूप की जरूरत होती है, लेकिन बहुत तेज और लगातार धूप इसे कमजोर भी कर सकती है। सही संतुलन यही है कि पौधे को रोजाना लगभग 5–6 घंटे हल्की से मध्यम धूप मिले। फरवरी में दोपहर की धूप अचानक तेज हो सकती है, ऐसे में हल्की छाया देना फायदेमंद रहता है। अगर पौधे को कम धूप मिले, तो वह हरा-भरा तो दिखता है, लेकिन फूल टिक नहीं पाते और जल्दी झड़ने लगते हैं।
पानी देने में भी फरवरी में समझदारी जरूरी होती है। मौसम बदलते ही लोग अक्सर जरूरत से ज्यादा पानी देने लगते हैं, जिससे जड़ों को नुकसान पहुंचता है। सही तरीका यह है कि तभी पानी दें जब ऊपर की मिट्टी सूखी लगे और गमले में पानी रुकने न दें। सामान्य तौर पर सप्ताह में 2–3 बार पानी काफी होता है। इस संतुलन से जड़ें सुरक्षित रहती हैं, सड़न नहीं होती और फूल लंबे समय तक पौधे पर बने रहते हैं।
अपराजिता बेल वाली प्रकृति का पौधा है और उसकी फूल देने की क्षमता इस बात पर भी निर्भर करती है कि उसे बढ़ने की सही दिशा मिल रही है या नहीं। जब बेल जमीन पर फैलती रहती है या उलझी रहती है, तो पौधे की ऊर्जा बिखर जाती है और फूलों की संख्या कम हो जाती है। फरवरी में पौधे को मजबूत सहारा देना बहुत फायदेमंद रहता है। इसके लिए जाली, तार या बांस का सहारा लगाया जा सकता है और नई बेल को हल्के हाथ से ऊपर की ओर मोड़ा जा सकता है। जब बेल ऊपर की तरफ बढ़ती है, तो हर गांठ पर नई शाखा और कली बनने की संभावना बढ़ जाती है। इसका सीधा असर यह होता है कि पौधा ज्यादा व्यवस्थित रहता है और फूलों की संख्या साफ तौर पर बढ़ने लगती है।
February में अपराजिता को ज्यादा भारी खाद देने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि इस समय पौधा धीरे-धीरे अपनी सक्रिय अवस्था में लौट रहा होता है। केमिकल खाद देने से पौधा अचानक पत्तों की ओर ज्यादा बढ़ सकता है, जिससे फूल प्रभावित होते हैं। इसकी जगह हल्का घरेलू पोषण ज्यादा असरदार रहता है। एक लीटर पानी में एक चम्मच छाछ मिलाकर पंद्रह दिन में एक बार जड़ों में देने से मिट्टी की सेहत सुधरती है और पौधा संतुलित तरीके से बढ़ता है। इसका असर यह होता है कि पौधा लंबे समय तक एक्टिव रहता है और फूलों का रंग ज्यादा गहरा व आकर्षक नजर आता है।
फरवरी के महीने में मौसम हल्का गर्म होते ही Aprajita Flower पर छोटे कीड़े और चूसक कीट दिखाई देने लगते हैं, जो पत्तियों और कलियों से रस चूसकर पौधे को कमजोर कर देते हैं। अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यही कीट फूल गिरने की वजह बन जाते हैं। इस स्थिति में हल्का और सुरक्षित उपाय सबसे बेहतर रहता है। नीम तेल का हल्का घोल बनाकर 10–12 दिन में एक बार छिड़काव करने से कीट नियंत्रित रहते हैं, बिना पौधे को नुकसान पहुंचाए। इसका फायदा यह होता है कि कलियां सुरक्षित रहती हैं और फूल समय से पहले झड़ते नहीं हैं।
Aprajita में फूलों की निरंतरता बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि पौधे को बीज बनाने में ज्यादा ऊर्जा खर्च न करने दी जाए। जैसे ही फूल मुरझाकर फलियां बनाने लगते हैं, पौधे की प्राथमिकता बदल जाती है और नए फूल आना कम हो जाता है। फरवरी में समय-समय पर मुरझाए हुए फूल तोड़ते रहना और सूखी फलियां हटा देना एक सरल लेकिन असरदार तरीका है। इससे पौधे की ऊर्जा बची रहती है और वह दोबारा नई कलियां बनाने पर ध्यान देता है, जिसका नतीजा ज्यादा और लगातार फूलों के रूप में दिखाई देता है।
February में अपराजिता की देखभाल करते समय कुछ आम गलतियां उसके फूलों पर सीधा असर डाल सकती हैं। इस मौसम में जरूरत से ज्यादा खाद देना पौधे की प्राकृतिक बढ़त को बिगाड़ देता है और फूलों की जगह केवल पत्तों की संख्या बढ़ने लगती है। रोजाना पानी देना भी उतना ही नुकसानदायक है, क्योंकि इससे जड़ों में नमी जमा होकर पौधा कमजोर हो सकता है। अगर छंटाई नहीं की जाती, तो सूखी और बेकार टहनियां पौधे की ऊर्जा खींचती रहती हैं। वहीं, सहारा न मिलने पर बेल बिखर जाती है और फूल कम लगते हैं। इन छोटी लेकिन अहम गलतियों में से कोई भी फूल आने की गति को धीमा कर सकती है।
Aprajita Flower कोई जटिल या ज्यादा मांग करने वाला पौधा नहीं है, बल्कि सही समय पर की गई देखभाल ही इसका असली आधार होती है। February में अगर पौधे को सही दिशा मिल जाए, तो वह पूरे मौसम भर अपनी पूरी क्षमता के साथ खिलता रहता है। हल्की छंटाई से नई बढ़त मिलती है, संतुलित खाद जड़ों को ताकत देती है, सही मात्रा की धूप पौधे को सक्रिय रखती है, नियंत्रित पानी जड़ों को सुरक्षित करता है और थोड़ा सा सहारा बेल को सही दिशा देता है।
February में छंटाई करने से सूखी और कमजोर टहनियां हट जाती हैं। इससे पौधे की ऊर्जा नई शाखाओं में लगती है और उन्हीं पर ज्यादा फूल आते हैं।
कम धूप, जरूरत से ज्यादा पानी, भारी खाद या छंटाई न होना फूल कम होने के आम कारण हैं। February में इन बातों पर खास ध्यान देना चाहिए।
जब ऊपर की मिट्टी सूखी लगे तभी पानी दें। आमतौर पर सप्ताह में 2–3 बार पानी देना पर्याप्त होता है।
नहीं। February में हल्का जैविक या घरेलू पोषण काफी होता है। ज्यादा केमिकल खाद देने से फूलों की जगह पत्ते ज्यादा बढ़ सकते हैं।
समय पर छंटाई, सही धूप, नियंत्रित पानी, हल्का पोषण और मुरझाए फूल हटाते रहना। यही उपाय फूलों की निरंतरता बनाए रखते हैं।