भारतीय एग्री-टेक स्टार्टअप वराह को फ्रांस की सस्टेनेबल एसेट मैनेजमेंट फर्म मिरोवा से 30 मिलियन डॉलर का महत्वपूर्ण निवेश प्राप्त हुआ है। यह धनराशि वराह के “खेती” मिट्टी-कार्बन प्रोजेक्ट को हरियाणा और पंजाब में बड़े पैमाने पर विस्तार देने के लिए दी गई है। यह मिरोवा का भारत में पहला कार्बन निवेश और अब तक का उसका सबसे बड़ा एकल कार्बन सौदा है।
परियोजना के अंतर्गत 6.75 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कार्य किया जाएगा, जिससे 3.37 लाख से अधिक लघुधारक किसानों को पुनर्योजी कृषि (Regenerative Agriculture) अपनाने में सहायता मिलेगी। यह निवेश इक्विटी आधारित नहीं है, बल्कि परियोजना-स्तर पर भविष्य में मिलने वाले कार्बन क्रेडिट के बदले किया गया है।
वराह के सीईओ मधुर जैन ने कहा कि निवेश की राशि पहले जारी की जाती है और अगले कुछ वर्षों में परियोजना से उत्पन्न कार्बन क्रेडिट मिरोवा को प्रदान किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि वैश्विक बाजार में अब खरीदार रिडक्शन क्रेडिट की तुलना में रिमूवल-बेस्ड कार्बन क्रेडिट को प्राथमिकता दे रहे हैं, क्योंकि यह अधिक वैज्ञानिक, डेटा-आधारित और विश्वसनीय माने जाते हैं।
कंपनी वर्तमान में चार प्रमुख रिमूवल रास्तों पर कार्य कर रही है—
जैन ने बताया कि वराह का विकास मॉडल कृषि और वैज्ञानिक विशेषज्ञता पर आधारित है। कंपनी आईएआरआई पूसा और IIT खड़गपुर जैसी संस्थाओं के साथ मिलकर विभिन्न कृषि हस्तक्षेपों से होने वाले कार्बन परिवर्तनों पर शोध करती है। उन्होंने कहा कि छोटे किसानों के साथ काम करने के लिए व्यावहारिक अनुभव आवश्यक होता है, इसलिए कंपनी की लगभग 36% टीम कृषि पृष्ठभूमि से आती है।
अब तक वराह 13 मिलियन डॉलर की इक्विटी जुटा चुकी है और मिरोवा निवेश से पहले कुल 23 मिलियन डॉलर के इक्विटी एवं क्रेडिट-लिंक्ड संसाधन प्राप्त कर चुकी थी। कंपनी के खरीदार टेक्नोलॉजी, एविएशन, टेलीकॉम, कंसल्टिंग और कमोडिटी क्षेत्र से हैं। इस वर्ष कंपनी ने Google के साथ बायोचार ऑफटेक का बहुवर्षीय समझौता भी किया है।
भारत, नेपाल, बांग्लादेश और भूटान में संचालित 13 कार्बन परियोजनाओं के साथ, वराह इस नए निवेश का उपयोग पुनर्योजी कृषि के विस्तार और फसल-विशिष्ट कार्बन मॉडल विकसित करने में करेगा, जिससे दक्षिण एशिया में जलवायु-अनुकूल कृषि को नई गति मिलेगी।