भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि यूरिया का राज्यवार आवंटन रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के उर्वरक विभाग द्वारा किया जाता है, जबकि राज्य के भीतर सहकारी समितियों, डीलरों और खुदरा विक्रेताओं को वितरण संबंधित राज्य सरकार की उर्वरक वितरण नीति के अनुसार होता है। उर्वरक विभाग मासिक आधार पर राज्यों को यूरिया आवंटित करता है और आवंटन प्राप्त होने के बाद राज्य का कृषि विभाग जिलों में आगे वितरण के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करता है।
सरकार के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में ‘इफको’ और ‘कृभको’ ने राजस्थान राज्य को बड़े पैमाने पर यूरिया की आपूर्ति की है। जिलावार आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022-23 से 2025-26 (31 जनवरी 2026 तक) के दौरान इफको द्वारा कुल 4,80,956 मीट्रिक टन, 4,51,459 मीट्रिक टन, 5,07,200 मीट्रिक टन और 5,23,278 मीट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति की गई। भीलवाड़ा, बीकानेर, गंगानगर, जयपुर, नागौर और बरान जैसे जिलों में उल्लेखनीय मात्रा में आपूर्ति दर्ज की गई है।
इसी अवधि में कृभको द्वारा वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 (31 जनवरी तक) में क्रमशः 1,59,127.245 मीट्रिक टन, 1,47,897.765 मीट्रिक टन और 1,03,039.515 मीट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति की गई। गंगानगर, हनुमानगढ़, जयपुर, जोधपुर, कोटा और बीकानेर जैसे जिलों में आपूर्ति का स्तर अपेक्षाकृत अधिक रहा।
सरकार ने बताया कि झालावाड़-बारां जैसे आकांक्षी और अल्पसेवित जिलों सहित सभी क्षेत्रों में उर्वरकों की समय पर और पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक फसल सत्र से पहले राज्यवार और माहवार आवश्यकता का आकलन किया जाता है। इसके आधार पर उर्वरक विभाग मासिक आपूर्ति योजना जारी करता है और निरंतर उपलब्धता की निगरानी करता है।
देशभर में सब्सिडी वाले उर्वरकों की आवाजाही की निगरानी ‘एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली’ (आईएफएमएस) नामक ऑनलाइन वेब-आधारित प्रणाली के माध्यम से की जाती है। साथ ही कृषि एवं किसान कल्याण विभाग तथा उर्वरक विभाग राज्य अधिकारियों के साथ नियमित साप्ताहिक वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित कर आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा करते हैं और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाते हैं।
छोटे और सीमांत किसानों तक यूरिया की सहज पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सरकार सहकारी वितरण नेटवर्क को सुदृढ़ कर रही है। पैक्स सहित खुदरा उर्वरक दुकानों को प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र (पीएमकेएसके) में परिवर्तित किया जा रहा है, जो उर्वरक, बीज, कीटनाशक, मृदा परीक्षण और परामर्श सेवाओं के लिए वन-स्टॉप सेंटर के रूप में कार्य करेंगे। वर्तमान में 38,000 से अधिक पैक्स पीएमकेएसके के रूप में कार्यरत हैं।
इसके अतिरिक्त, ब्रांड भ्रम को समाप्त करने और वितरण प्रणाली को सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से सभी सब्सिडी वाले उर्वरकों—यूरिया, डीएपी, एनपीके और एमओपी—की आपूर्ति ‘प्रधानमंत्री भारतीय जनउर्वरक परियोजना’ के अंतर्गत ‘भारत’ ब्रांड नाम और एकीकृत लोगो के तहत की जा रही है।