देश में सब्जी खेती के क्षेत्र में उन्नत किस्मों की मांग लगातार बढ़ रही है और इसी कड़ी में कद्दू की ‘काशी हरित’ वैरायटी किसानों के लिए एक लाभदायक विकल्प बनकर उभर रही है। यह एक उन्नत हाइब्रिड किस्म है, जो तेज़ी से बढ़ने, एक समान आकार के फल देने और अच्छी गुणवत्ता के कारण किसानों के बीच लोकप्रिय हो रही है। इसके फल मध्यम से बड़े आकार के होते हैं, जिनका वजन लगभग 4 से 6 किलोग्राम तक होता है। फल का रंग गहरा हरा या हल्की धारियों वाला होता है, जबकि इसका गूदा पीला-नारंगी, मोटा और स्वादिष्ट होता है, जिससे बाजार में इसकी मांग अच्छी रहती है।
इस वैरायटी की खेती साल में दो बार आसानी से की जा सकती है। किसान फरवरी से मार्च के बीच गर्मी की फसल के लिए और जून से जुलाई के बीच बरसात की फसल के लिए इसकी बुवाई कर सकते हैं। यदि खेती वैज्ञानिक तरीके से की जाए, तो प्रति एकड़ 15 से 20 टन तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है, जो किसानों के लिए बेहतर आमदनी का जरिया बन सकता है। इसके लिए समय पर सिंचाई, संतुलित खाद का उपयोग और कीट-रोग प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना जरूरी होता है।
खेती के लिए प्रति एकड़ लगभग 1 से 1.5 किलो बीज पर्याप्त माना जाता है। बुवाई से पहले खेत में अच्छी तरह से जैविक खाद मिलाना फायदेमंद रहता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पौधों का विकास बेहतर होता है। फसल के दौरान नियमित सिंचाई और खेत की निगरानी जरूरी होती है, ताकि किसी भी प्रकार के रोग या कीट का समय रहते नियंत्रण किया जा सके।
कुल मिलाकर, ‘काशी हरित’ वैरायटी पारंपरिक किस्मों की तुलना में ज्यादा उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता देती है, जिससे किसानों को बाजार में अच्छी कीमत मिलती है। ऐसे में जो किसान सब्जी खेती में कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमाना चाहते हैं, उनके लिए कद्दू की यह उन्नत वैरायटी एक बेहतर विकल्प साबित हो सकती है।