SOMS 2025 : ग्रामीण पत्रकारिता और एग्री उद्यमिता को मिला नया आयाम, किसानों के लिए खुले नवाचार और आत्मनिर्भरता के नए द्वार
05 Jul, 2025 04:33 PM
गुजरात के महात्मा मंदिर कन्वेंशन सेंटर में आयोजित तीन दिवसीय SOMS 2025 सम्मेलन ने भारतीय कृषि जगत में एक नई सोच और दिशा का संकेत दिया।
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Emren, समाचार, [05 Jul, 2025 04:33 PM]
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रात के महात्मा मंदिर कन्वेंशन सेंटर में आयोजित तीन दिवसीय SOMS 2025 सम्मेलन ने भारतीय कृषि जगत में एक नई सोच और दिशा का संकेत दिया। सॉल्यूबल फर्टिलाइज़र इंडस्ट्री एसोसिएशन (SFIA) द्वारा आयोजित इस राष्ट्रीय स्तर के आयोजन ने कृषि नवाचार, एग्री उद्यमिता और ग्रामीण पत्रकारिता को एक साझा मंच पर लाकर संवाद, विकास और आत्मनिर्भरता की मजबूत बुनियाद रखी।
कृषि के भविष्य की दिशा तय करता सम्मेलन
सम्मेलन का उद्घाटन गुजरात सरकार के कृषि, पशुपालन, गौ पालन एवं मत्स्य पालन मंत्री राघवजीभाई हंसराजभाई पटेल ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने कृषि क्षेत्र में तेजी से आ रहे बदलावों की सराहना करते हुए कहा, "भारत में कृषि बदलाव के दौर से गुजर रही है। इस परिवर्तन में एग्री-उद्यमियों की भूमिका बेहद अहम है। आने वाले वर्षों में भारत खाद उत्पादन और नवाचार में वैश्विक नेतृत्व करता दिखाई देगा।"
SFIA की सोच: नवाचार, युवा और आत्मनिर्भरता
SFIA के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीब चक्रवर्ती ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि और फर्टिलाइज़र उद्योग को आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने के लिए युवाओं की भागीदारी अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि SFIA का लक्ष्य है रिसर्च और फील्ड के बीच की दूरी को खत्म करना ताकि किसान तक तकनीकी समाधान आसानी से पहुंच सके।
उन्होंने ‘SOMS’ फर्टिलाइज़र को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित, नॉन-रेजिड्युअल और भरोसेमंद उत्पाद बताया जिसे देश के 5 करोड़ किसान पहले ही अपना चुके हैं। उन्होंने सरकार से समान FCO नियम, चीनी कंपनियों के मुकाबले घरेलू निर्माताओं को बराबरी का मौका और निर्यात-प्रोत्साहन नीति की मांग की जिससे आने वाले 1 से 1.5 वर्षों में भारत खाद के आयात पर निर्भरता कम कर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ सके।
‘थीसिस शो डाउन’: युवा दिमागों की उड़ान
सम्मेलन का सबसे रोचक और ज्ञानवर्धक सत्र रहा ‘थीसिस शो डाउन’, जिसमें देशभर के प्रमुख कृषि विश्वविद्यालयों के छात्रों ने अपने रिसर्च प्रोजेक्ट्स प्रस्तुत किए। इनमें शामिल रहे
TNAU, मदुरै: बायोजेनिक नैनो पोटैशिक फर्टिलाइज़र पर शोध SKUAST, कश्मीर: स्मार्ट स्प्रेयर सिस्टम LITU: अमोनिया रिकवरी और रिसाइक्लिंग प्रोजेक्ट इस सत्र का निर्णायक मंडल कृषि और उद्योग जगत के अनुभवी विशेषज्ञों से सुसज्जित था, जिसमें शामिल थे: प्रांजीब चक्रवर्ती, कौशिक बनर्जी (NRC Grapes), पी.के. डे (ICAR-ATARI), बी.डी. जाडे (जैन इरिगेशन) और के.आर.के. रेड्डी (BIPA)। उन्होंने छात्रों को उनके इनोवेशन को बाजार तक पहुंचाने के व्यावसायिक पहलुओं पर भी मार्गदर्शन दिया।
वन नेशन, वन लाइसेंस की मांग
एक अन्य महत्वपूर्ण सत्र में फर्टिलाइज़र नियंत्रण आदेश (FCO) पर आधारित पैनल चर्चा आयोजित की गई, जिसमें IMMA अध्यक्ष राहुल मिर्चंदानी ने खाद उद्योग में व्यापारिक सुगमता के लिए “वन नेशन, वन लाइसेंस” नीति लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इस कदम से नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और उद्योग में पारदर्शिता आएगी। इस पैनल में उनके साथ Vijay Thakur (OAMA) और MN Vaidyanadhan (TAPMA) जैसे वरिष्ठ विशेषज्ञ शामिल रहे।
कृषि पत्रकारिता को सम्मान: ज़मीनी संवाद को पहचान
SOMS 2025 का एक अन्य आकर्षण रहा कृषि पत्रकारिता (Agriculture journalism) पुरस्कार समारोह, जिसमें विभिन्न भाषाओं और माध्यमों के पत्रकारों को सम्मानित किया गया। विजेताओं में शामिल थे:
पुजा दास (अंग्रेजी)
मुकुंद तायबा पिंगले (मराठी)
हिमांशु मिश्रा (हिंदी)
सुनील सुषिला शर्मा (यूट्यूब - हिंदी)
अनीशा जैन (यूट्यूब - अंग्रेजी)
धनंजय श्रीराम सानप (यूट्यूब - मराठी)
रनर-अप के रूप में संदीप दास, मनोज कुमार सिंह, गोपाल जगन्नाथ हगे, और फिजा काज़मी को भी मंच पर सम्मानित किया गया। निर्णायक मंडल में शामिल थे: आर.एन. पडरिया(ICAR), कल्याण कुमार सिन्हा (पूर्व संपादक, लोकमत) और सुहास बुधे (VIA नागपुर)।
फसल क्रांति की एंकर फिजा काज़मी को मिला पुरूस्कार इस कार्यक्रम में कृषि पत्रकारों को सम्मानित किया गया । इसी कड़ी में फसल क्रांति की एंकर और पत्रकार फिजा काज़मी को ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म यूट्यूब की श्रेणी में पुरुस्कृत किया गया।
संवाद, समाधान और संभावना की नई शुरुआत
SOMS 2025 ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि जब नवाचार, एग्री-उद्यमिता और निष्पक्ष पत्रकारिता एक मंच पर मिलते हैं, तो न केवल कृषि क्षेत्र को नई दिशा मिलती है बल्कि ग्रामीण भारत की संभावनाएं भी प्रबल होती हैं। इस आयोजन ने न केवल विचारों का आदान-प्रदान सुनिश्चित किया, बल्कि यह साबित किया कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ के कृषि क्षेत्र की नींव ऐसे ही मंचों से मजबूत होती है। यह सम्मेलन एक प्रेरक उदाहरण बना, जहाँ खेत से लेकर प्रयोगशाला तक और समाचार कक्ष से लेकर नीति निर्धारण तक हर स्तर पर संवाद हुआ, समाधान सामने आए और एक उज्जवल, नवाचारपूर्ण कृषि भविष्य की राहें प्रशस्त हुईं।