राजस्थान के नागौर जिले की प्रसिद्ध 'नागौरी अश्वगंधा' (Nagauri Ashwagandha) ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए भौगोलिक संकेतक (GI टैग) का दर्जा प्राप्त कर लिया है। केंद्र सरकार की इस मान्यता से न केवल स्थानीय किसानों की दशकों की मेहनत को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है, बल्कि वैश्विक बाजार में यह औषधीय फसल एक भरोसेमंद ब्रांड के रूप में स्थापित होगी। सोजत की मेहंदी के बाद यह राजस्थान का दूसरा GI टैग वाला कृषि उत्पाद है।
GI टैग की ऐतिहासिक उपलब्धि
मारवाड़ क्षेत्र की रेतीली मिट्टी और शुष्क जलवायु ने 'नागौरी अश्वगंधा' को अद्वितीय गुण प्रदान किए हैं। इसे 'भारतीय जिनसेंग' कहा जाता है और आयुर्वेद में यह एक बहुउद्देशीय रसायन (रिजूवनेटर) मानी जाती है। नागौर में उगने वाली अश्वगंधा की जड़ें अधिक पुष्ट और लंबी होती हैं, जिनमें एल्कलॉइड्स और विथानोलाइड्स जैसे औषधीय तत्वों की मात्रा अधिक होती है। इसका फल (बेरी) का गहरा लाल रंग इसकी उच्च गुणवत्ता का प्रमाण है।
प्रकृति का अनमोल खजाना
देश भर में अश्वगंधा की खेती लगभग 5,000 हेक्टेयर में होती है, जिसमें से 500 हेक्टेयर (10%) क्षेत्रफल अकेले नागौर जिले का है। GI टैग मिलने से 'नागौरी अश्वगंधा' का नाम दुरुपयोग से सुरक्षित हो गया है। इस मान्यता को हासिल करने की यात्रा आसान नहीं थी, जिसमें नागौरी वेलफेयर सोसाइटी, ICAR आनंद के वैज्ञानिक डॉ. परमेश्वरलाल सारण और राज्य कृषि विभाग के समन्वित प्रयास शामिल थे।
कठिन प्रयासों से मिली सफलता
वैश्विक स्तर पर अश्वगंधा बाजार तेजी से बढ़ रहा है। अनुमान है कि 2029 तक यह 102 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच जाएगा। हर्बल, फार्मास्युटिकल और न्यूट्रास्यूटिकल उद्योगों में इसकी भारी मांग है। भारत में 7,000 टन सालाना मांग के मुकाबले उत्पादन मात्र 1,500 टन है। GI टैग प्राप्त 'नागौरी अश्वगंधा' इस कमी को पूरा करने और निर्यात बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
वैश्विक बाजार में धमाल
इस GI टैग का सबसे बड़ा लाभ स्थानीय किसानों को मिलेगा। अब 'नागौरी अश्वगंधा' एक ब्रांडेड उत्पाद के रूप में बिकेगी, जिससे इसके दाम 20-30 प्रतिशत तक बढ़ने की उम्मीद है। यह मिलावट पर अंकुश लगाएगी और किसानों को बिचौलियों से मुक्त कर सीधा बाजार उपलब्ध कराएगा। इससे युवाओं को औषधीय खेती की ओर आकर्षित करने और रोजगार सृजन में भी मदद मिलेगी।
किसानों की आय में बढ़ोतरी
भविष्य की चुनौतियों में जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और जल संकट प्रमुख हैं, जिसके लिए उन्नत कृषि तकनीकों और सरकारी सहयोग पर ध्यान देने की जरूरत है। फिर भी, 'नागौरी अश्वगंधा' की यह सफलता एक मिसाल है, जो दर्शाती है कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी दुनिया को स्वास्थ्य देने वाला 'ग्रीन गोल्ड' पैदा किया जा सकता है और स्थानीय संसाधनों से वैश्विक ब्रांड बनाया जा सकता है।