किसानों को सुरक्षित, प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण कीटनाशक उपलब्ध कराने तथा नकली और अवमानक उत्पादों पर सख्त नियंत्रण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2025 का मसौदा तैयार किया है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार द्वारा जारी इस मसौदे पर आम जनता और सभी हितधारकों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। इच्छुक पक्ष 4 फरवरी, 2026 तक अपने विचार और टिप्पणियां भेज सकते हैं।
यह नया विधेयक मौजूदा कीटनाशक अधिनियम, 1968 और उसके अंतर्गत बने कीटनाशक नियम, 1971 का स्थान लेगा। सरकार के अनुसार, यह विधेयक वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप एक किसान-केंद्रित ढांचा प्रस्तुत करता है, जिसमें किसानों के हितों की रक्षा के साथ-साथ जीवन सुगमता और व्यापार सुगमता के बीच संतुलन स्थापित करने पर विशेष जोर दिया गया है।
मसौदा विधेयक में पारदर्शिता और ट्रेसबिलिटी (अनुरेखण) जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं, ताकि कीटनाशकों की आपूर्ति श्रृंखला पर प्रभावी निगरानी रखी जा सके। इसके साथ ही, प्रक्रियाओं को सरल और समयबद्ध बनाने के लिए डिजिटल और तकनीकी माध्यमों के उपयोग को बढ़ावा दिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे किसानों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी और अनावश्यक प्रशासनिक बाधाएं कम होंगी।
नकली और अवमानक कीटनाशकों पर अंकुश लगाने के लिए विधेयक में कड़े दंडात्मक प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं। वहीं, छोटे-मोटे अपराधों के निपटान के लिए कंपाउंडिंग की व्यवस्था भी की गई है, ताकि मामूली उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर रखते हुए नियामक बोझ कम किया जा सके। हालांकि, निवारक प्रभाव बनाए रखने के लिए उच्च दंड निर्धारित करने का अधिकार राज्य-स्तरीय प्राधिकरणों को दिया जाएगा।
एक महत्वपूर्ण प्रावधान के तहत, कीटनाशकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए परीक्षण प्रयोगशालाओं के अनिवार्य प्रत्यायन का प्रावधान किया गया है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि किसानों तक केवल मानक और भरोसेमंद उत्पाद ही पहुंचें।
पूर्व-विधायी परामर्श प्रक्रिया के अंतर्गत, विधेयक का मसौदा और सुझाव देने का निर्धारित प्रारूप कृषि मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध कराया गया है। सभी हितधारक और नागरिक अपने सुझाव ई-मेल के माध्यम से एमएस वर्ड या पीडीएफ प्रारूप में 4 फरवरी, 2026 तक भेज सकते हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित अवधि के भीतर प्राप्त सभी सुझावों पर विधेयक को अंतिम रूप देते समय गंभीरता से विचार किया जाएगा।
यह पहल कृषि क्षेत्र में नियामक सुधारों को मजबूत करने और किसानों के हित में एक आधुनिक, पारदर्शी और प्रभावी कीटनाशक प्रबंधन व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।