उत्तर प्रदेश सरकार ने चकबंदी को पारदर्शी और तेज़ बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब राज्यभर में चकबंदी की प्रक्रिया ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से पूरी होगी। इस विशेष जीआईएस पोर्टल पर खसरा, खतौनी, भूमि नक्शे और चकों के बंटवारे से जुड़े सभी दस्तावेज अपलोड किए जाएंगे। इसके लिए एआई और ड्रोन टेक्नोलॉजी की भी मदद ली जाएगी।अब तक जिस प्रक्रिया में सालों लग जाते थे, वह कुछ ही दिनों में पूरी हो सकेगी। सरकार का मानना है कि इससे रिकॉर्ड में हेरफेर पर अंकुश लगेगा और किसानों को पारदर्शिता का लाभ मिलेगा।
फिलहाल इगलास के साथिनी, कोल के पिलखना व वरहद और गभाना के दहेली गांवों में चकबंदी की प्रक्रिया चल रही है। लेकिन इनमें से कुछ गांवों में पिछले 15 वर्षों से काम अधूरा पड़ा है। अब इन गांवों में भी डिजिटल पोर्टल से काम तेज़ी से पूरा किया जाएगा।
चकबंदी में किसानों की ज़मीन से लगभग 2.5% हिस्सा लेकर उसे सार्वजनिक कार्यों के लिए चिह्नित किया जाता है। इसमें नाली, खड़ंजा, श्मशान, स्कूल, खेल मैदान और रास्तों के लिए ज़मीन तय की जाती है। इससे गांवों का समुचित विकास सुनिश्चित होता है।
जिले में 2020 से अब तक 74 गांवों से चकबंदी के लिए आवेदन आए, जिनमें से 70 गांवों को अवैध कब्जों के कारण बाहर कर दिया गया। सरकारी ज़मीन पर निजी कब्जों ने प्रशासन की चुनौती बढ़ा दी है।
नई व्यवस्था में ग्राम पंचायत की प्रबंधक समिति आवेदन देगी, डीएम की संस्तुति के बाद शासन से धारा 4 के अंतर्गत चकबंदी की घोषणा होगी। इसके बाद ड्रोन व तकनीकी टीम गांवों में जाकर डिजिटल सर्वे करेंगी। पूरा काम अब घर बैठे ऑनलाइन ट्रैक भी किया जा सकेगा।