भारत एक कृषि प्रधान देश है, और यहाँ की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा खेती पर निर्भर करता है। देश की बढ़ती जनसंख्या और बदलते जलवायु परिदृश्यों के बीच, किसानों की आय बढ़ाना और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना दोनों ही बड़ी चुनौतियाँ हैं। इन्हीं उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने 2007-08 में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (National Food Security Mission - NFSM) की शुरुआत की थी।
इस मिशन का मुख्य उद्देश्य था—धान, गेहूं, दलहन, तिलहन, और मोटे अनाजों (जैसे ज्वार, बाजरा) का उत्पादन बढ़ाना, जिससे देश खाद्य आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ सके। आइए विस्तार से समझें कि NFSM क्या है, इसकी विशेषताएँ, लाभ, कार्यप्रणाली और अब तक की उपलब्धियाँ क्या हैं।
NFSM का अर्थ (Meaning of National Food Security Mission)
National Food Security Mission (NFSM) भारत सरकार की एक प्रमुख योजना है, जिसे कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा 2007-08 में शुरू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य देश में खाद्यान्न उत्पादन को सतत रूप से बढ़ाना, किसानों की आय में वृद्धि करना, और कृषि में आधुनिक तकनीकों का समावेश करना है। प्रारंभ में यह मिशन 312 ज़िलों में लागू हुआ था, लेकिन इसकी सफलता और आवश्यकता को देखते हुए इसे अब लगभग सभी कृषि प्रधान राज्यों तक विस्तारित कर दिया गया है। NFSM के तहत धान, गेहूं, दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों का उत्पादन बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जिससे भारत खाद्य आत्मनिर्भरता की दिशा में और मजबूत हो सके।
NFSM की प्रमुख विशेषताएँ (Key Features of NFSM)
1. बहु-फसली दृष्टिकोण: शुरुआत में यह योजना सिर्फ धान, गेहूं और दलहन तक सीमित थी, लेकिन बाद में तिलहन और मोटे अनाजों को भी इसमें शामिल किया गया।
2. तकनीकी सहायता: किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज, जैविक खाद, मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड, और नई तकनीकों के उपयोग के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है।
3. क्षेत्र विशेष योजना: हर राज्य की जलवायु और मिट्टी के अनुसार फसलें चुनी जाती हैं। उदाहरण के लिए, मध्य प्रदेश में दालें और तेलहन पर जोर दिया गया है, जबकि पश्चिम बंगाल और बिहार में धान और गेहूं।
4. फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन: NFSM के तहत किसानों को एक ही फसल पर निर्भर न रहकर विविध फसलों की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया जाता है।
5. राज्य और केंद्र का संयुक्त संचालन: यह मिशन केंद्र और राज्य सरकारों की साझेदारी से चलाया जाता है, जहाँ खर्च का एक हिस्सा केंद्र द्वारा वहन किया जाता है और बाकी राज्य सरकार द्वारा।
NFSM के प्रमुख घटक (Major Components of NFSM)
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क्रमांक |
घटक (Component) |
मुख्य उद्देश्य |
प्रमुख गतिविधियाँ |
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1 |
NFSM – Rice (धान) |
धान उत्पादन में वृद्धि और उपज सुधार |
उच्च उत्पादक किस्मों के बीज, उर्वरक सहायता, जल प्रबंधन तकनीकें, खेत प्रदर्शन |
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2 |
NFSM – Wheat (गेहूं) |
गेहूं की उपज और गुणवत्ता में सुधार |
रोग-प्रतिरोधी बीज वितरण, मृदा परीक्षण, सिंचाई सुधार और प्रशिक्षण |
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3 |
NFSM – Pulses (दलहन) |
दाल उत्पादन बढ़ाना और आयात निर्भरता घटाना |
उन्नत बीज, फसल विविधीकरण, एकीकृत कीट प्रबंधन, भंडारण सुविधा |
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4 |
NFSM – Coarse Cereals (मोटा अनाज) |
पोषण सुरक्षा और जलवायु अनुकूल फसलों को बढ़ावा देना |
ज्वार, बाजरा, कोदो आदि फसलों का संवर्धन, सूखा-रोधी किस्में |
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5 |
NFSM – Oilseeds & Oil Palm (तेलहन एवं ऑयल पाम) |
खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता बढ़ाना |
सरसों, मूंगफली, तिल व तेल पाम की खेती को बढ़ावा, प्रसंस्करण इकाइयाँ |
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6 |
NFSM – Nutri-Cereals (पोषक अनाज) |
पौष्टिक अनाजों का उत्पादन और उपभोग बढ़ाना |
किसानों को प्रोत्साहन, जागरूकता कार्यक्रम और बाजार उपलब्धता सुधार |
NFSM के लक्ष्य (Objectives of NFSM)
1. देश में खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाकर आत्मनिर्भरता हासिल करना ताकि हर नागरिक को पर्याप्त और पौष्टिक भोजन मिल सके और कृषि अर्थव्यवस्था मजबूत हो।
2. किसानों को नई आधुनिक खेती तकनीकों, वैज्ञानिक पद्धतियों और स्मार्ट कृषि उपकरणों से जोड़ना ताकि उपज और गुणवत्ता दोनों में सुधार हो।
3. भूमि की उत्पादकता बढ़ाने के लिए मृदा परीक्षण, जैविक खाद, फसल चक्रण और मिट्टी स्वास्थ्य सुधार कार्यक्रमों को बढ़ावा देना।
4. सिंचाई और जल प्रबंधन में सुधार के लिए ड्रिप इरिगेशन, वर्षा जल संचयन और माइक्रो सिंचाई तकनीकों का विस्तार करना।
5. फसल हानि को कम करने के लिए कीट प्रबंधन, मौसम पूर्वानुमान, बीमा योजनाएँ और सुरक्षित भंडारण तकनीकें लागू करना।
6. कृषि में युवाओं और महिला किसानों की भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराना।
NFSM की कार्यप्रणाली (Procedure & Implementation)
1. योजना निर्माण: कृषि मंत्रालय राष्ट्रीय स्तर पर नीति और दिशा-निर्देश तैयार करता है, जिन्हें राज्यों को भेजा जाता है।
2. जिला-स्तरीय कार्यान्वयन: हर जिले में “District Mission Committee” बनाई जाती है जो योजना के स्थानीय कार्यान्वयन की ज़िम्मेदारी संभालती है।
3. फंड आवंटन: केंद्र सरकार राज्यों को फंड जारी करती है, जिसे जिलों में योजनाओं के हिसाब से बाँटा जाता है।
4. किसानों का चयन: स्थानीय कृषि अधिकारी पात्र किसानों का चयन करते हैं, जिन्हें बीज, उर्वरक, कृषि उपकरण और प्रशिक्षण जैसी सहायता दी जाती है।
5. निगरानी और मूल्यांकन: NFSM की प्रगति की निगरानी “National Food Security Mission Executive Committee” करती है। इससे योजना के प्रभाव का मूल्यांकन होता है और सुधार किए जाते हैं।
NFSM के लाभ (Benefits of NFSM)
1. खाद्यान्न आत्मनिर्भरता: NFSM के तहत गेहूं, धान और दलहन की पैदावार में बड़ा सुधार हुआ है, जिससे भारत ने खाद्य आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।
2. किसानों की आय में वृद्धि: बेहतर बीज, आधुनिक तकनीक, उर्वरक प्रबंधन और सरकारी प्रशिक्षण सहायता से किसानों की उपज में सुधार हुआ है, जिससे उनकी आमदनी और जीवन स्तर दोनों में स्थायी वृद्धि हुई है।
3. नवाचार को बढ़ावा: ड्रिप सिंचाई, जैविक खाद और नई फसल किस्मों के उपयोग से खेती अधिक टिकाऊ, जल-संरक्षण आधारित और उच्च उत्पादन वाली बन गई है, जिससे किसानों को बेहतर लाभ मिला।
4. जलवायु अनुकूल खेती: NFSM के तहत जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखकर किसानों को मौसम, मिट्टी और जल संसाधनों के अनुसार फसल योजना बनाने की समझ और सहायता मिली है।
5. ग्रामीण रोजगार सृजन:NFSM से कृषि आधारित उद्योगों, प्रसंस्करण इकाइयों और फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिला, जिससे ग्रामीण युवाओं के लिए नए रोजगार और आय के अवसर बने।
निष्कर्ष
National Food Security Mission (NFSM) ने भारतीय कृषि को एक नई दिशा दी है। इस मिशन ने न केवल देश में खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित किया बल्कि किसानों को आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से सशक्त बनने का अवसर भी दिया। NFSM के तहत किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज, आधुनिक खेती तकनीक, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई, जिससे उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि हुई। इस योजना ने स्थायी खेती, जल प्रबंधन और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देकर कृषि क्षेत्र में नवाचार और स्थिरता की नई मिसाल कायम की है। भविष्य में, यदि इस योजना को और अधिक पारदर्शिता, स्थानीय जरूरतों और जलवायु अनुकूल रणनीतियों के साथ लागू किया जाए, तो यह भारत को एक कृषि-सशक्त और खाद्य सुरक्षित राष्ट्र बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।