भैंस की तुलना में गाय से दूध उत्पादन कम होने के बावजूद, भारत गाय के दूध के उत्पादन में देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में पहले स्थान पर है। हाल के आँकड़ों से पता चलता है कि देश में गाय का दूध उत्पादन न केवल भैंस से अधिक है, बल्कि भारत ने इस मामले में अमेरिका और चीन जैसे देशों को भी पीछे छोड़ दिया है।
केंद्रीय पशुपालन और डेयरी मंत्रालय द्वारा जारी ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024-25 में देश का कुल दूध उत्पादन 24.8 करोड़ टन रहा। इसमें गाय के दूध की हिस्सेदारी 53.60% (लगभग 13.3 करोड़ टन) रही, जबकि भैंस के दूध का योगदान 43.15% रहा। यानी कुल उत्पादन में गाय का दूध स्पष्ट रूप से अधिक है।
इंटरनेशनल डेयरी फेडरेशन (आईडीएफ) की 'वर्ल्ड डेयरी सिचुएशन 2024' रिपोर्ट भी इस तथ्य की पुष्टि करती है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में भारत में 12.9 करोड़ टन गाय के दूध का उत्पादन हुआ। यूरोपीय संघ का आंकड़ा 15.4 करोड़ टन अवश्य है, लेकिन वह 27 देशों का संयुक्त उत्पादन है। इसलिए एकल राष्ट्र के रूप में भारत सबसे बड़ा उत्पादक माना जा रहा है। अमेरिका में यह उत्पादन 10 करोड़ टन, जबकि चीन में मात्र 42 लाख टन ही है।
राष्ट्रीय गोकुल मिशन (आरजीएम) को इस उपलब्धि में एक बड़ा कारक माना जा रहा है। 2014 में शुरू इस योजना का मुख्य उद्देश्य देसी नस्लों के संरक्षण और दूध उत्पादन बढ़ाना था। परिणामस्वरूप, दुधारू पशुओं की संख्या 2013-14 के 8.4 करोड़ से बढ़कर 2021-22 में 12 करोड़ हो गई। गोपशु दूध उत्पादन 2014-15 के 3.5 करोड़ टन से उछलकर 2024-25 में लगभग 13 करोड़ टन पर पहुँच गया।
विशेषज्ञ मानते हैं कि संकर नस्लों (30.80%) के बढ़ते प्रचलन और सरकारी योजनाओं के समर्थन ने गाय के दूध उत्पादन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह प्रगति न केवल डेयरी क्षेत्र के लिए, बल्कि देश की आर्थिक स्थिरता के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है।