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इजरायल ने ईरान पर किया बड़ा हमला, नष्ट किए कई सैन्य प्रतिष्ठान

13 Jun, 2025 10:35 AM

इजरायल ने कल देर रात ईरान के खिलाफ एक व्यापक और सुनियोजित सैन्य अभियान की शुरुआत की, जिसे ‘ऑपरेशन राइजिंग लॉयन’ नाम दिया गया है।

FasalKranti
Emren, समाचार, [13 Jun, 2025 10:35 AM]
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इजरायल ने कल देर रात ईरान के खिलाफ एक व्यापक और सुनियोजित सैन्य अभियान की शुरुआत की, जिसे ऑपरेशन राइजिंग लॉयन’ नाम दिया गया है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक वीडियो संदेश में इस ऑपरेशन की पुष्टि करते हुए कहा कि यह कोई सीमित कार्रवाई नहीं है, बल्कि एक दीर्घकालिक और रणनीतिक सैन्य ऑपरेशन है, जिसका उद्देश्य देश की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

नेतन्याहू ने स्पष्ट रूप से कहा, "जब तक इजरायल के अस्तित्व पर खतरा बना रहेगा, तब तक ईरान पर कार्रवाई जारी रहेगी।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह ऑपरेशन तब तक चलेगा जब तक इजरायल को अपनी सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित नहीं हो जाती। यह बयान दर्शाता है कि यह केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि इजरायल की सुरक्षा नीति का एक निर्णायक कदम है।

ऑपरेशन की शुरुआत

इस सैन्य अभियान की शुरुआत देर रात उस समय हुई जब इजरायली वायुसेना ने ईरान के भीतर कई सामरिक ठिकानों पर अचानक हवाई हमले किए। यह हमले प्री-एम्पटिव स्ट्राइक (पूर्व चेतावनी हमले) की श्रेणी में आते हैं, जिनका उद्देश्य संभावित खतरों को पहले ही निष्क्रिय करना होता है। इजरायली हवाई हमलों में ईरान की मिसाइल निर्माण इकाइयों, एयर डिफेंस सिस्टम और कमांड कंट्रोल सेंटर्स को निशाना बनाया गया। हमलों के तुरंत बाद इजरायल में आपातकाल लागू कर दिया गया और नागरिकों को सतर्क रहने के निर्देश जारी किए गए हैं।

खुफिया एजेंसी मोसाद की भूमिका

इस ऑपरेशन में इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद  ने अहम भूमिका निभाई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोसाद ने तेहरान और अन्य प्रमुख ईरानी शहरों में गुप्त मिशन संचालित किए, जिनका उद्देश्य मिसाइल प्रोग्राम और एयर डिफेंस सिस्टम को निष्क्रिय करना था। बताया जा रहा है कि इन अभियानों के तहत कई संवेदनशील ठिकानों को पहले से चिन्हित किया गया था।

परमाणु वैज्ञानिकों की मौत की पुष्टि

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम और न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट्स के अनुसार, इस अभियान में ईरान के दो प्रमुख परमाणु वैज्ञानिक मारे गए हैं। इनमें डॉ. मोहम्मद मेहदी तेहरानची  और फेरेयदून अब्बासी  के नाम शामिल हैं। अब्बासी वही वैज्ञानिक हैं, जिन पर 2010 में पहले भी जानलेवा हमला किया गया था, लेकिन वे तब बच गए थे।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने चार वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों के हवाले से बताया है कि इजरायल ने तेहरान के आस-पास कम से कम छह सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों में सैन्य परिसरों, कमांडरों के ठिकानों और रिहायशी इलाकों को भी नुकसान पहुंचा है।

नतांज न्यूक्लियर फैसिलिटी पर बड़ा हमला

रिपोर्ट्स के अनुसार, इन हमलों का सबसे बड़ा निशाना ईरान की प्रमुख परमाणु सुविधा नतांज न्यूक्लियर फैसिलिटी  रही। Press TV द्वारा जारी किए गए वीडियो में देखा गया कि नतांज स्थल से काला धुआं उठता हुआ आसमान में फैल रहा है, जिससे स्पष्ट होता है कि हमला अत्यधिक प्रभावी और गहराई तक किया गया है। यह वही स्थान है जिसे पहले भी कई बार साइबर हमलों और गुप्त अभियानों का निशाना बनाया जा चुका है।

रिहायशी इलाकों में भी नुकसान

ईरानी मीडिया द्वारा जारी की गई तस्वीरों और वीडियो में देखा जा सकता है कि हमलों का असर सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजधानी तेहरान के रिहायशी इलाकों में भी भारी नुकसान हुआ है। एक वीडियो में एक अपार्टमेंट बिल्डिंग आग की लपटों में घिरी दिखाई देती है, वहीं दूसरी क्लिप में एक गगनचुंबी इमारत की ऊपरी मंज़िलों के शीशे टूटे हुए नजर आते हैं।

उच्चस्तरीय हत्याएं और तोड़फोड़ की खबरें

इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस अभियान के तहत मोसाद ने न सिर्फ सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, बल्कि ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स, शिक्षाविदों और कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों पर भी हमले किए हैं। कई गुप्त ठिकानों पर तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आई हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो पाई है।

 ‘ऑपरेशन राइजिंग लॉयन’ को इजरायल की अब तक की सबसे आक्रामक और रणनीतिक सैन्य कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। यह स्पष्ट संकेत है कि इजरायल अब ईरान के परमाणु कार्यक्रम और संभावित खतरों को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा। आने वाले दिनों में यह टकराव और भी गंभीर रूप ले सकता है, क्योंकि ईरान की प्रतिक्रिया अभी आनी बाकी है। क्षेत्रीय तनावों में अचानक बढ़ोतरी ने वैश्विक समुदाय की चिंता बढ़ा दी है।

 




Tags : Iran attack Israel | Iran Conflict

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