राजस्थान की रेगिस्तानी धरती पर जब पानी की एक-एक बूँद तरसाती थी, तब इंदिरा गांधी नहर परियोजना ने चमत्कार कर दिखाया। देश की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजनाओं में शुमार इस नहर ने बंजर ज़मीन को उपजाऊ खेतों में बदलकर किसानों की तकदीर संवार दी है।
पहले जहां जैसलमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर जैसे ज़िले सालों तक सूखे की मार झेलते थे, अब वही ज़मीन गेहूं, सरसों, चावल और कपास जैसी नकदी फसलों से भर गई है। किसान अब मानसून के भरोसे नहीं, बल्कि 24x7 सिंचाई के भरोसे खेती कर रहे हैं।
इंदिरा गांधी नहर का सबसे बड़ा फायदा यह रहा कि इससे फसल उत्पादन में भारी बढ़ोतरी हुई। सिंचाई सुविधा मिलने से एक ओर जहां किसानों की आमदनी में इज़ाफा हुआ, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को भी जबरदस्त बढ़ावा मिला।
खेतों में सालभर काम मिलने से ग्रामीण पलायन में कमी आई है। पहले जहां किसान काम की तलाश में शहरों की ओर जाते थे, अब अपने ही गांव में सम्मानजनक जीवन बिता रहे हैं। सिंचाई के साथ-साथ गांवों में सड़क, बिजली, स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाएं भी बेहतर हुई हैं।
जानकारों का मानना है कि इंदिरा गांधी नहर सिर्फ एक सिंचाई परियोजना नहीं, बल्कि एक सामाजिक-आर्थिक क्रांति है, जिसने मरुस्थल को खेती और जीवन के केंद्र में ला खड़ा किया है।