भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक एवं कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव डॉ. एम. एल. जाट ने नई दिल्ली में 11 सदस्यीय जापानी प्रतिनिधिमंडल के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व जापान इंटरनेशनल रिसर्च सेंटर फॉर एग्रीकल्चरल साइंसेज (JIRCAS) के अध्यक्ष ओसामु कोयामा ने किया। बैठक के दौरान भारत और जापान के बीच कृषि अनुसंधान सहयोग को और मजबूत बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई।
इस अवसर पर डॉ. जाट ने BNI (बायोलॉजिकल नाइट्रीफिकेशन इनहिबिशन)-व्हीट परियोजना के तहत चल रही साझेदारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि ICAR, CIMMYT-BISA, JIRCAS और JICA के बीच यह परियोजना अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण परिणाम दे रही है।
बैठक के दौरान डॉ. जाट ने बताया कि BNI-व्हीट परियोजना के अंतर्गत अब तक उल्लेखनीय प्रगति हुई है। साथ ही उन्होंने इस परियोजना के अनुसंधान दायरे और प्रभाव को और व्यापक बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों और कृषि प्रबंधन पद्धतियों का BNI-व्हीट की कार्यक्षमता पर क्या प्रभाव पड़ता है, इसका गहन अध्ययन आवश्यक है, ताकि भारत के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में इस तकनीक को सफलतापूर्वक अपनाया जा सके।
डॉ. जाट ने यह भी बताया कि BNI-व्हीट तकनीक भारत में नाइट्रोजन उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसके साथ ही यह तकनीक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में भी सहायक हो सकती है, जिससे कृषि अधिक पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ बन सकेगी।
उन्होंने इस साझेदारी के प्रति ICAR की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए आशा व्यक्त की कि BNI-व्हीट परियोजना को वर्ष 2027 के बाद भी अगले पांच वर्षों तक बढ़ाया जा सकता है। इससे भारत में BNI-व्हीट की नई उन्नत किस्मों के विकास और उनके व्यापक प्रसार का मार्ग प्रशस्त होगा।
बैठक के दौरान ICAR के महानिदेशक और JIRCAS के अध्यक्ष दोनों ने भारत और जापान के बीच कृषि अनुसंधान सहयोग को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता जताई। विशेष रूप से मानव संसाधन विकास, वैज्ञानिक ज्ञान के आदान-प्रदान और संयुक्त अनुसंधान कार्यक्रमों को बढ़ावा देने पर सहमति व्यक्त की गई।
इस अवसर पर JIRCAS के अध्यक्ष ओसामु कोयामा ने ICAR और उसके नेतृत्व द्वारा BNI-व्हीट पहल को दिए जा रहे निरंतर सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि JIRCAS इस साझेदारी के तहत संयुक्त अनुसंधान को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत और जापान के बीच इस तरह के सहयोग से कृषि अनुसंधान में नई तकनीकों का विकास तेज होगा और किसानों को अधिक टिकाऊ, पर्यावरण-अनुकूल और उत्पादक खेती के विकल्प उपलब्ध हो सकेंगे।