केंद्र सरकार के मत्स्य, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अधीन पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार (NGRA) 2025 के विजेताओं की घोषणा कर दी है। यह पुरस्कार देश के पशुधन और डेयरी क्षेत्र में दिए जाने वाले सर्वोच्च सम्मानों में से एक माना जाता है। इस वर्ष प्राप्त 2,081 आवेदनों में से उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले किसानों, डेयरी संगठनों और कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियनों का चयन किया गया है। पुरस्कार 26 नवंबर 2025 को राष्ट्रीय दुग्ध दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रदान किए जाएंगे, जिनका वितरण केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह करेंगे, वहीं राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल और श्री जॉर्ज कुरियन भी समारोह में उपस्थित रहेंगे।
विभाग द्वारा घोषित सूची के अनुसार, श्रेष्ठ देशी नस्ल के पशुओं का पालन करने वाले डेयरी किसानों की श्रेणी में गैर-पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए पहला पुरस्कार महाराष्ट्र के कोल्हापुर के अरविंद यशवंत पाटिल को मिलेगा। दूसरे स्थान पर तेलंगाना के हैदराबाद के डॉ. कंकनाला कृष्ण रेड्डी तथा तीसरे स्थान पर राजस्थान के सीकर के हर्षित झुरिया और महाराष्ट्र के अहमदनगर की कुमारी श्रद्धा सत्यवान धवन संयुक्त रूप से चयनित हुए हैं। वहीं पूर्वोत्तर/हिमालयी राज्यों की श्रेणी में हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर की विजय लता और उत्तराखंड के चंपावत के प्रदीप पंगड़िया को सम्मानित किया जाएगा।
श्रेष्ठ डेयरी सहकारी समिति/दूध उत्पादक कंपनी/एफपीओ श्रेणी में गैर-पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए पहला पुरस्कार केरल के वायनाड की मीनन गडी क्षीर उत्पादक सहकारणा संघम लिमिटेड को प्राप्त होगा। दूसरा पुरस्कार केरल की कुन्नमकट्टुपथी क्षीर उत्पादक सहकारणा संघम, तथा राजस्थान की घिनोई दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति को संयुक्त रूप से दिया जाएगा, जबकि तीसरे स्थान पर तमिलनाडु की TYSPL 37 सेंदुरई मिल्क प्रोड्यूसर्स को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड चयनित हुई है। पूर्वोत्तर/हिमालयी श्रेणी में उत्तराखंड के उधम सिंह नगर की कुल्हा दूध उत्पादक सहकारी समिति को सम्मान मिलेगा।
श्रेष्ठ कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन (AIT) श्रेणी में गैर-पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए पहला पुरस्कार ओडिशा के अनुगुल के दिलीप कुमार प्रधान, दूसरा राजस्थान के हनुमानगढ़ के विकास कुमार, और तीसरा आंध्र प्रदेश के नंद्याल की अनुराधा चकाली को मिलेगा। वहीं पूर्वोत्तर/हिमालयी क्षेत्र में असम के बरपेटा के दिलुवार हसन को सम्मानित किया जाएगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि पहले दो प्रमुख वर्गों—श्रेष्ठ डेयरी किसान तथा श्रेष्ठ DCS/FPO/MPCs—के पुरस्कार स्वरूप प्रमाणपत्र, स्मृति चिन्ह और नकद राशि प्रदान की जाएगी। प्रथम स्थान के लिए ₹5 लाख, द्वितीय के लिए ₹3 लाख, तृतीय के लिए ₹2 लाख, और पूर्वोत्तर/हिमालयी राज्यों के लिए विशेष पुरस्कार के रूप में ₹2 लाख दिए जाएंगे। हालांकि AIT श्रेणी में केवल प्रमाणपत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान किया जाएगा, इसमें नकद पुरस्कार शामिल नहीं है।
गौरतलब है कि दिसंबर 2014 में शुरू हुई राष्ट्रीय गोकुल मिशन देशी पशु नस्लों के वैज्ञानिक संरक्षण और संवर्धन पर केंद्रित है। वर्ष 2021 से यह पुरस्कार प्रतिवर्ष प्रदान किए जा रहे हैं, जिसका उद्देश्य दुग्ध उत्पादक किसानों, डेयरी सहकारी समितियों और कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियनों को प्रोत्साहित करना है।
यह पहल न केवल देशी पशुधन संरक्षण को बढ़ावा देती है, बल्कि बेहतर दुग्ध उत्पादन और डेयरी क्षेत्र के समग्र विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।