केंद्र सरकार की प्रमुख किसान कल्याण योजना प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) के तहत अब तक 21 किस्तों के माध्यम से देशभर के पात्र किसानों को ₹4.09 लाख करोड़ से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है। यह जानकारी कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से दी। उन्होंने बताया कि योजना का उद्देश्य खेती योग्य भूमि रखने वाले किसानों की वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करना है, जिसके तहत प्रत्येक वर्ष ₹6,000 की सहायता तीन समान किस्तों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से किसानों के आधार-सीडेड बैंक खातों में भेजी जाती है।
फरवरी 2019 में शुरू की गई यह केंद्रीय क्षेत्र की योजना देश के कृषि क्षेत्र में प्रत्यक्ष आय समर्थन का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है। सरकार द्वारा विकसित किसान-केंद्रित डिजिटल बुनियादी ढांचे ने यह सुनिश्चित किया है कि योजना का लाभ बिना किसी बिचौलिए के सीधे पात्र किसानों तक पहुंचे। लाभार्थियों के पंजीकरण और सत्यापन की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया गया है, जिससे पात्रता और भुगतान की निगरानी प्रभावी ढंग से हो सके।
हालांकि, योजना के सफल क्रियान्वयन के बावजूद बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां किसानों के बैंक खाते आधार से जुड़े नहीं होने के कारण भुगतान लंबित है। 6 फरवरी 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देशभर में कुल 30,18,361 किसानों के बैंक खातों में आधार सीडिंग लंबित है। इस कारण इन किसानों को निर्धारित किस्तों का भुगतान नहीं हो पा रहा है।
राज्यवार आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 10,44,200 किसानों के बैंक खातों की आधार सीडिंग लंबित है। इसके बाद गुजरात में 2,90,358, राजस्थान में 2,13,779, मध्य प्रदेश में 1,87,011 और महाराष्ट्र में 1,72,349 किसानों के मामले लंबित हैं। बिहार, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना जैसे राज्यों में भी बड़ी संख्या में आधार-बैंक लिंकिंग की प्रक्रिया अधूरी है। वहीं, छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों जैसे चंडीगढ़, लक्षद्वीप, पुडुचेरी और अंडमान-निकोबार में यह संख्या अपेक्षाकृत कम है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि पीएम-किसान योजना के तहत भुगतान केवल आधार-सीडेड बैंक खातों में ही संभव है। यदि किसी किसान का बैंक खाता आधार से जुड़ा नहीं है, तो भुगतान संसाधित नहीं किया जा सकता। कई बार किसान अपने बैंक खाते बदलते रहते हैं, जिससे आधार लिंकिंग की स्थिति प्रभावित होती है। ऐसे मामलों में जैसे ही किसान अनिवार्य शर्त पूरी करते हैं, उनका बकाया भुगतान तुरंत उनके आधार से जुड़े खाते में स्थानांतरित कर दिया जाता है।
आधार-बैंक सीडिंग की प्रक्रिया को तेज करने के लिए कृषि विभाग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समन्वय में विशेष संतृप्ति अभियान चला रहा है। इस अभियान में सामान्य सेवा केंद्रों (CSCs) और इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) की भी सक्रिय भागीदारी है। इसके अतिरिक्त, किसानों को एसएमएस के माध्यम से सूचित किया जाता है ताकि वे अपने बैंक खातों को आधार से जोड़कर योजना का निर्बाध लाभ प्राप्त कर सकें।
सरकार का मानना है कि डिजिटल सत्यापन और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण प्रणाली ने योजना में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत किया है। साथ ही, आधार-बैंक सीडिंग की प्रक्रिया पूर्ण होने पर लंबित भुगतानों का निपटारा तेजी से संभव होगा।
पीएम-किसान योजना देश के करोड़ों किसानों के लिए आय सहायता का एक महत्वपूर्ण साधन बन चुकी है, और सरकार का प्रयास है कि तकनीकी अड़चनों को दूर कर सभी पात्र किसानों तक समय पर वित्तीय सहायता सुनिश्चित की जाए।