कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने तमिलनाडु में किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने जानकारी देते हुए बताया कि यह समिति एफपीओ के शासन, बाजार संपर्क, मूल्यवर्धन और दीर्घकालिक स्थिरता से जुड़े मुद्दों की गहन समीक्षा करेगी तथा व्यावहारिक और समयबद्ध सुधारात्मक सिफारिशें प्रस्तुत करेगी।
यह निर्णय श्री शिवराज सिंह चौहान की हालिया इरोड (तमिलनाडु) यात्रा के बाद लिया गया, जहां किसानों और विभिन्न हितधारकों ने एफपीओ से जुड़ी परिचालन, तकनीकी और विपणन संबंधी चुनौतियों को उनके समक्ष रखा था। मंत्री ने इन समस्याओं के जमीनी स्तर पर आकलन और त्वरित समाधान के लिए मंत्रालय को आवश्यक निर्देश दिए थे, जिसके परिणामस्वरूप इस समिति का गठन किया गया है।
समिति में नाबार्ड, नाफेड, एसएफएसी-तमिलनाडु, आईसीएआर-राष्ट्रीय केला अनुसंधान केंद्र (एनआरसीबी), एफपीओ प्रतिनिधि, गैर-सरकारी संगठन और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारी शामिल किए गए हैं। यह बहु-हितधारक संरचना एफपीओ की वास्तविक स्थिति का व्यापक और व्यावहारिक मूल्यांकन सुनिश्चित करेगी।
समिति एफपीओ से जुड़े प्रमुख पहलुओं—जैसे संस्थागत शासन एवं प्रबंधन प्रणाली, व्यावसायिक संचालन और आर्थिक स्थिरता, तकनीकी सहयोग और विस्तार सेवाएं, एकत्रीकरण, मूल्यवर्धन एवं विपणन चुनौतियां, साथ ही क्षमता निर्माण और मार्गदर्शन की आवश्यकताओं—की गहन जांच करेगी। इसके आधार पर यह बेहतर व्यापार मॉडल, उन्नत तकनीकी एवं परामर्श समर्थन, संस्थागत समन्वय तथा मजबूत बाजार संपर्क विकसित करने के उपाय सुझाएगी।
विशेष रूप से समिति तमिलनाडु की प्रमुख फसलों और कृषि प्रणालियों पर ध्यान केंद्रित करेगी, जिनमें केला, हल्दी, नारियल, टैपिओका तथा प्राकृतिक और जैविक खेती शामिल हैं। जमीनी सच्चाई को समझने के लिए समिति एफपीओ, सदस्य किसानों, बाजार चैनलों, प्रसंस्करण इकाइयों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ परामर्श और क्षेत्रीय दौरे भी करेगी।
समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट दो महीने के भीतर कृषि एवं किसान कल्याण विभाग को सौंपेगी। आईसीएआर-राष्ट्रीय केला अनुसंधान केंद्र (एनआरसीबी), तिरुचिरापल्ली, केवीके के सहयोग से आईसीएआर-एटीएआरआई, हैदराबाद के माध्यम से इस समिति की मेजबान संस्था के रूप में कार्य करेगा और बैठकों, क्षेत्र भ्रमण तथा रिपोर्ट तैयार करने के लिए आवश्यक तकनीकी और सचिवीय सहयोग उपलब्ध कराएगा।
यह पहल केंद्र सरकार के किसान-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसका उद्देश्य एफपीओ को मजबूत, आत्मनिर्भर और टिकाऊ बनाना है। इससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा, बल्कि तमिलनाडु के कृषि क्षेत्र में मूल्य संवर्धन और बाजार एकीकरण को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।