केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई डिजिटल कृषि पहलों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में लिखित उत्तर में बताया कि वर्ष 2025 के दौरान प्रारंभ या पूर्व से संचालित डिजिटल कार्यक्रमों का नियमित मूल्यांकन किया जा रहा है, जिससे कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता, दक्षता और सेवा वितरण में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
एग्रीस्टैक बना डिजिटल आधार
एग्रीस्टैक को डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के रूप में विकसित किया गया है, जिसमें किसान रजिस्टर, भू-संदर्भित ग्राम मानचित्र और बोई गई फसल का रजिस्टर शामिल है। इन डाटाबेस का निर्माण और रखरखाव राज्य सरकारें कर रही हैं। यह प्रणाली किसानों की पहचान, भूमि विवरण और फसल संबंधी जानकारी का विश्वसनीय स्रोत प्रदान करती है।
4 फरवरी 2026 तक देशभर में 8.48 करोड़ से अधिक किसान आईडी जारी की जा चुकी हैं। किसान आईडी के माध्यम से पीएम-किसान, पीएम फसल बीमा योजना, एमएसपी आधारित खरीद, ऋण वितरण, इनपुट आपूर्ति और आपदा राहत जैसी योजनाओं का एकीकरण सुगम हुआ है।
डिजिटल फसल सर्वेक्षण से सटीक आकलन
खरीफ 2025 में डिजिटल फसल सर्वेक्षण 604 जिलों में 28.5 करोड़ से अधिक खेतों को कवर करते हुए संचालित किया गया। इससे खेत-स्तर पर फसल डेटा उपलब्ध हुआ, जिससे खरीद, रसद और इनपुट आपूर्ति के लिए साक्ष्य-आधारित योजना बनाना संभव हुआ।
राज्यों में सफल क्रियान्वयन
महाराष्ट्र ने एग्रीस्टैक का उपयोग कर खरीफ 2025 की फसल क्षति के लिए 89 लाख किसानों को 14,000 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता सीधे हस्तांतरित की। छत्तीसगढ़ में एमएसपी आधारित धान खरीद में किसान आईडी और डिजिटल फसल सर्वेक्षण के संस्थागत उपयोग से 32 लाख से अधिक किसानों को लाभ मिला, जिससे पारदर्शिता और भुगतान की समयबद्धता में सुधार हुआ।
कृषि निर्णय सहायता प्रणाली
यह भू-स्थानिक मंच उपग्रह चित्रों, मौसम, मिट्टी और फसल डेटा को एकीकृत कर कृषि नियोजन में सहायता करता है। वेब-पोर्टल आधारित यह प्रणाली लक्षित सलाह और विश्लेषण उपलब्ध कराती है।
किसान ई-मित्र से त्वरित समाधान
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से जुड़े प्रश्नों के समाधान के लिए विकसित एआई-आधारित वॉइस चैटबॉट ‘किसान ई-मित्र’ 11 क्षेत्रीय भाषाओं में सेवाएं प्रदान कर रहा है। यह प्रतिदिन औसतन 8,000 से अधिक प्रश्नों का उत्तर देता है और अब तक 95 लाख से अधिक सवालों का समाधान कर चुका है।
राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली
एआई और मशीन लर्निंग आधारित यह प्रणाली 65 फसलों और 400 से अधिक कीटों की निगरानी करती है। 10,000 से अधिक कृषि विस्तार कार्यकर्ता इसका उपयोग कर रहे हैं। किसान कीटों की तस्वीर अपलोड कर समय पर सलाह प्राप्त कर सकते हैं, जिससे फसल क्षति को कम करने में मदद मिलती है।
‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना से महिला सशक्तिकरण
सरकार ने महिला स्वयं सहायता समूहों को 15,000 ड्रोन उपलब्ध कराने के लिए 1,261 करोड़ रुपये की केंद्रीय योजना को स्वीकृति दी है। प्रमुख उर्वरक कंपनियों द्वारा 500 ड्रोन वितरित किए जा चुके हैं। एडीआरटीसी, बेंगलुरु के अध्ययन के अनुसार, ड्रोन अपनाने से एसएचजी की आय में वृद्धि, कृषि पद्धतियों में सुधार और ग्रामीण महिलाओं के लिए नए अवसर सृजित हुए हैं।
एसएटीएचआई और राष्ट्रीय बीज ग्रिड
बीज उत्पादन, गुणवत्ता प्रमाणीकरण और वितरण की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ‘एसएटीएचआई’ डिजिटल प्लेटफॉर्म और राष्ट्रीय बीज ग्रिड स्थापित किया गया है, जिससे सभी हितधारकों को एकीकृत डिजिटल प्रणाली में जोड़ा गया है।
सरकार का मानना है कि इन डिजिटल पहलों से कृषि क्षेत्र में डेटा-आधारित निर्णय, लक्षित सहायता और किसानों को समयबद्ध लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया मजबूत हुई है, जिससे कृषि प्रणाली अधिक पारदर्शी और परिणामोन्मुख बन रही है।