भारत सरकार गहरे समुद्र में मछली पकड़ने (डीप-सी फिशिंग) को बढ़ावा देने के लिए नए नियमों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और वित्तीय सहायता योजनाओं के माध्यम से महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इसका उद्देश्य समुद्री मत्स्य संसाधनों का सतत उपयोग सुनिश्चित करते हुए मछली उत्पादन और मछुआरों की आय बढ़ाना है।
Ministry of External Affairs ने 4 नवंबर 2025 को Territorial Waters, Continental Shelf, Exclusive Economic Zone and Other Maritime Zones Act, 1976 के तहत सस्टेनेबल हार्नेसिंग ऑफ फिशरीज इन एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन (EEZ) नियम, 2025 अधिसूचित किए। इन नियमों के अनुसार 24 मीटर या उससे अधिक लंबाई वाले यंत्रीकृत मछली पकड़ने वाले जहाजों तथा ट्यूना और ट्यूना जैसी प्रजातियों के शिकार में लगे मोटर चालित जहाजों को भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में संचालन के लिए एक्सेस पास जारी किए जा रहे हैं।
सरकार के अनुसार 5 मार्च 2026 तक ऑनलाइन ReALCraft पोर्टल के माध्यम से तटीय राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से प्राप्त आवेदनों के आधार पर कुल 707 एक्सेस पास जारी किए जा चुके हैं। राज्यों में Gujarat को सबसे अधिक 274 पास मिले हैं, जबकि Andhra Pradesh को 162 पास जारी किए गए हैं। इसके अलावा Kerala, Odisha और West Bengal सहित अन्य तटीय राज्यों को भी पास दिए गए हैं। आंध्र प्रदेश में Kakinada और Visakhapatnam जिलों में सबसे अधिक मछली पकड़ने वाले जहाजों को अनुमति मिली है।
विशेषज्ञ समिति के अनुमान के अनुसार भारत के EEZ में मछली उत्पादन की संभावित क्षमता लगभग 53.1 लाख टन है। इनमें से करीब 3.65 लाख टन क्षमता केवल आंध्र प्रदेश के तटवर्ती क्षेत्र में आंकी गई है। पिछले पांच वर्षों (2020-21 से 2024-25) के दौरान आंध्र प्रदेश में समुद्री मछली उत्पादन 5.54 लाख टन से बढ़कर 6.51 लाख टन तक पहुंचा है, जिसमें समुद्री खेती (मैरिकल्चर) और गहरे समुद्र में मछली पकड़ने से प्राप्त उत्पादन भी शामिल है।
गहरे समुद्र में मछली पकड़ने की क्षमता बढ़ाने के लिए Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं। इस योजना के अंतर्गत National Fisheries Development Board को प्रशिक्षण कार्यक्रम लागू करने की जिम्मेदारी दी गई है। ये कार्यक्रम Central Institute of Fisheries Nautical and Engineering Training के सहयोग से आयोजित किए जाते हैं। अब तक देशभर में 8040 मछुआरों को गहरे समुद्र में मछली पकड़ने और जहाज पर मछली प्रबंधन से संबंधित प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिनमें 874 मछुआरे आंध्र प्रदेश के हैं।
इसके अलावा Fishery Survey of India द्वारा आधुनिक गहरे समुद्र में मछली पकड़ने की तकनीकों, विशेषकर ट्यूना लॉन्गलाइनिंग और उच्च गुणवत्ता वाली ट्यूना हैंडलिंग पर भी विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। वर्ष 2025-26 के दौरान Andaman and Nicobar Islands और Lakshadweep के 112 मछुआरों को सर्वेक्षण जहाजों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें आधुनिक नेविगेशन उपकरण, समुद्री सुरक्षा और मछली पकड़ने की उन्नत तकनीकों की जानकारी दी गई।
सरकार ने गहरे समुद्र में मछली पकड़ने को प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई है। पहले Blue Revolution Scheme के तहत पारंपरिक मछुआरों को गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाले जहाज खरीदने तथा ट्रॉलर को विशेष मछली पकड़ने वाले जहाजों में परिवर्तित करने के लिए सहायता दी गई थी। आंध्र प्रदेश में इस योजना के तहत 12 डीप-सी फिशिंग जहाजों को मंजूरी दी गई, जिनकी कुल परियोजना लागत 9.6 करोड़ रुपये थी, जबकि 57 ट्रॉलरों को परिवर्तित करने के लिए भी वित्तीय सहायता प्रदान की गई।
इसके बाद वर्ष 2020-21 से लागू प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत भी पारंपरिक मछुआरों को नए डीप-सी फिशिंग जहाज खरीदने और मौजूदा जहाजों को आधुनिक बनाने के लिए सहायता दी जा रही है। इस योजना के अंतर्गत आंध्र प्रदेश के मछुआरों के लिए 50 डीप-सी फिशिंग जहाजों को मंजूरी दी गई, जिनकी कुल परियोजना लागत 60 करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा 15.26 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई है।
यह जानकारी केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन और डेयरी मंत्री Rajiv Ranjan Singh ने Rajya Sabha में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी। सरकार का कहना है कि इन पहलों से गहरे समुद्र में मछली पकड़ने की क्षमता बढ़ेगी, मछुआरों की आय में वृद्धि होगी और देश के समुद्री संसाधनों का सतत उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।