लखनऊ के इंदिरा गांधी कन्वेंशन सेंटर में पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में स्वदेशी नस्लों के विकास एवं आनुवंशिक सुधार पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला की अध्यक्षता केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी और पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह 'ललन सिंह' ने की, जबकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
कार्यशाला में केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, अनुसंधान संस्थानों के विशेषज्ञ, निजी संस्थाएं, नीति निर्माता और देशभर के प्रगतिशील पशुपालक शामिल हुए। इस दौरान 700 से अधिक पशुपालकों और पशु चिकित्सकों ने भाग लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जलवायु, स्वच्छता और उचित देखभाल जैसे कारक पशुधन की उत्पादकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार पशुधन को एफएमडी (फुट एंड माउथ डिजीज) से मुक्त करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो सके।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर गोरखपुर में एक कृत्रिम गर्भाधान प्रशिक्षण संस्थान का उद्घाटन भी किया। इसके अलावा ‘पशुपालन अवसंरचना विकास निधि’ (AHIDF) के तहत तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं — ज्ञानधरा इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड (अमेठी), श्री चंचला फूड्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (बरेली) और ब्रिजवासी केशव मिल्क प्रोडक्ट (मथुरा) — का उद्घाटन किया गया। साथ ही नस्ल संरक्षक संघों की स्थापना के लिए एक रूपरेखा भी लॉन्च की गई।
केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि देश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए नस्ल सुधार आवश्यक है। उन्होंने इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) और सेक्स-सॉर्टेड सीमेन (SSS) जैसी उन्नत तकनीकों की महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि MAITRI कार्यकर्ता कृत्रिम गर्भाधान तकनीक को किसानों के दरवाजे तक पहुंचाकर क्रांतिकारी बदलाव ला रहे हैं।
केंद्रीय सचिव श्रीमती अलका उपाध्याय ने कहा कि पशुधन विकास न केवल कृषि की रीढ़ है बल्कि सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी सहायक है। उन्होंने तकनीकी नवाचार, उत्पादकता बढ़ाने और क्षेत्रीय आवश्यकताओं पर आधारित रणनीति की रूपरेखा प्रस्तुत की।
उत्तर प्रदेश के पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह ने राज्य में पशुपालकों के लिए लागू की जा रही नीतियों और तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य में IVF, SSS और AI जैसी तकनीकों को व्यापक स्तर पर अपनाया जा रहा है।
कार्यशाला में दो पैनल चर्चा सत्र भी आयोजित हुए, जिनमें प्रजनन सुधार, नस्ल चयन, प्रदर्शन रिकॉर्डिंग और अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से पशुधन क्षेत्र में सुधार के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। इन सत्रों का संचालन वर्षा जोशी (अतिरिक्त सचिव, भारत सरकार) और डॉ. अभिजीत मित्रा (पशुपालन आयुक्त) ने किया।
यह कार्यशाला भारत के पशुधन क्षेत्र को वैश्विक मानकों के अनुरूप लाने, स्वदेशी नस्लों के संरक्षण एवं सुधार, और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक ठोस पहल मानी जा रही है।