केंद्र सरकार ने मंगलवार को बड़ा फैसला लेते हुए साफ कर दिया कि एक्सपोर्ट सपोर्ट स्कीम RoDTEP के तहत कम रेट और वैल्यू कैप का नियम कृषि और प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स के निर्यात पर लागू नहीं होगा। इसका सीधा मतलब यह है कि प्याज जैसे कृषि उत्पादों को इस कटौती से बाहर रखा गया है और उनके लिए RoDTEP के तहत मिलने वाला एक्सपोर्ट कंसेशन पहले की तरह जारी रहेगा।
दरअसल, सोमवार को डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने एक सर्कुलर जारी कर प्याज के एक्सपोर्ट कंसेशन (RoDTEP) में 50 प्रतिशत की कटौती का ऐलान किया था। इस फैसले के बाद देशभर के प्याज व्यापारियों और किसानों में नाराजगी देखी गई। उनका कहना था कि अचानक इतनी बड़ी कटौती से निर्यात प्रभावित होगा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा कम होगी और किसानों को कीमतों में गिरावट का सामना करना पड़ सकता है।
व्यापारियों और किसान संगठनों ने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की थी। उनका तर्क था कि पहले से ही वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा कड़ी है, ऐसे में सब्सिडी कम होने से भारतीय निर्यातकों की स्थिति कमजोर हो सकती है। इसी बढ़ते विरोध और चिंता को देखते हुए सरकार ने स्थिति स्पष्ट की और कृषि व प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स को इस कटौती से बाहर कर दिया।
DGFT के नए नोटिफिकेशन में कहा गया कि 23 फरवरी 2026 के नोटिफिकेशन नंबर 60 के तहत RoDTEP बेनिफिट्स के कम रेट और वैल्यू कैप ITC HS चैप्टर 01 से 24 के तहत आने वाले एक्सपोर्ट प्रोडक्ट्स पर लागू नहीं होंगे। ITC HS चैप्टर 1 से 24 में कृषि और प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स शामिल हैं। इसका मतलब यह हुआ कि प्याज समेत सभी कृषि उत्पादों को राहत दी गई है।
RoDTEP यानी ‘Remission of Duties and Taxes on Exported Products’ योजना की शुरुआत 2021 में की गई थी। इस स्कीम के तहत निर्यातकों को माल की ढुलाई और अन्य अप्रत्यक्ष करों पर राहत दी जाती है। सरकार निर्यातकों को उनके खर्च का एक हिस्सा रिफंड के रूप में देती है। इस योजना के तहत रिफंड की दर 0.3 प्रतिशत से 3.9 प्रतिशत तक होती है। फिलहाल यह स्कीम इस साल मार्च तक मान्य है।
फैसले पर चिंता जताते हुए मुंबई के एक्सपोर्टर और टेक्नोक्राफ्ट इंडस्ट्रीज इंडिया के फाउंडर चेयरमैन शरद कुमार सराफ ने कहा था कि RoDTEP में अचानक 50 प्रतिशत की भारी कटौती निर्यातकों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर सकती है। उनका कहना था कि इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित होगी।
सरकार के ताजा स्पष्टीकरण के बाद निर्यातकों और किसानों ने राहत की सांस ली है। अब उम्मीद की जा रही है कि प्याज का निर्यात बिना किसी अतिरिक्त दबाव के जारी रहेगा और किसानों को भी बेहतर दाम मिलते रहेंगे।