नयी दिल्ली के एरोसिटी स्थित होटल हॉलीडे इन में स्नेल इंटीग्रल द्वारा Brand R. Comm 2025 के तीसरे संस्करण का सफल आयोजन हुआ। कार्यक्रम में कृषि क्षेत्र के प्रमुख नेता, नवोन्मेषक, नीति-निर्माता और उद्योग विशेषज्ञ शामिल हुए और कृषि तथा ग्रामीण संचार के भविष्य पर विस्तृत चर्चा हुई। इस वर्ष का मुख्य उद्देश्य किसानों तक सटीक, डेटा-आधारित और वैज्ञानिक जानकारी पहुँचाना रहा।
तकनीकी सत्र और महत्वपूर्ण विमोचन
पूरे दिन में मिट्टी, बीज, कृषि-इनपुट, बायोलॉजिकल्स और उर्वरकों पर गहन तकनीकी सत्र आयोजित हुए। इसके साथ ही स्नेल शो कॉफी टेबल बुक, मार्केट इनसाइट कंसल्टेंट्स द्वारा तैयार नॉलेज पेपर का विमोचन किया गया और ब्रैंड आर.कॉम अवॉर्ड्स के माध्यम से कृषि संचार और नवाचार में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित किया गया।
CEO पैनल: किसान-केंद्रित रणनीतियों पर जोर
CEO पैनल का संचालन बायर क्रॉपसाइंस के श्री राजवीर राठी ने किया। उन्होंने कहा कि किसान ही कृषि पारिस्थितिकी तंत्र का केंद्र है और सभी उत्पाद, नीतियाँ तथा नवाचार किसान की जरूरतों पर आधारित होने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट, सटीक और भरोसेमंद संचार को किसान सशक्तिकरण की कुंजी बताया।
मिट्टी की सेहत और बायोलॉजिकल समाधानों की आवश्यकता
श्री राजीव चौधरी ने भारत में घटते मिट्टी कार्बन स्तर पर चिंता जताई और बायोलॉजिकल्स खासकर समुद्री शैवाल आधारित बायोस्टिमुलेंट्स के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इनके सही उपयोग के लिए किसान प्रशिक्षण, जागरूकता और समर्थ नीति ढांचे की जरूरत है। Soil Health Card जैसे प्रयास किसानों को सही इनपुट चुनने में मददगार हैं।
बीज प्रतिस्थापन दर और क्लाइमेट-स्मार्ट सीड्स
श्री मृन्मय चौधरी ने भारत की Seed Replacement Rate बढ़ाने और “वन नेशन, वन सीड लॉ” लागू करने की आवश्यकता बताई। उनके अनुसार गुणवत्तापूर्ण बीज, एकरूपता और समय पर उपलब्धता जलवायु परिवर्तन, कीट दबाव और श्रम की कमी जैसी चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण हैं।
तकनीक की लागत और छोटे किसानों की चुनौतियाँ
श्री मुरारी अग्रवाल ने छोटे और सीमांत किसानों की समस्याओं पर ध्यान आकर्षित किया, खासकर डिजिटल उपकरणों, कृषि-इनपुट और ऋण की उच्च लागत पर। उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म, वित्तीय सहायता, कस्टम हायरिंग सेवाओं और मजबूत बीमा ढाँचे की आवश्यकता बताई, जिससे तकनीक किसान हितैषी सिद्ध हो सके।
मिट्टी पोषण, IPM और बायोलॉजिकल्स पर विशेषज्ञों के विचार
तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने मिट्टी क्षरण, पोषक तत्वों की कमी और कीट प्रबंधन पर प्रभावी समाधान प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने बताया कि बायोलॉजिकल्स पौधों के लिए “ब्लड ट्रांसफ्यूजन” की तरह कार्य करते हैं और मिट्टी की गुणवत्ता, माइक्रोबियल गतिविधि और जल धारण क्षमता बढ़ाते हैं।
संचार, विश्वास और ज्ञान-वितरण की भूमिका
विभिन्न वक्ताओं ने कहा कि लगातार, पारदर्शी और मूल्य-आधारित संचार किसानों के विश्वास को बढ़ाता है। फीडबैक सिस्टम, डिजिटल टूल्स और किसान-से-किसान संचार को मजबूत करने पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने खाद्य सुरक्षा से पोषण सुरक्षा की ओर बढ़ने और सार्वजनिक-निजी साझेदारी को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया।
नवाचार, विज्ञान और संचार का संगम
Brand R. Comm 2025 ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि भारतीय कृषि का भविष्य नवाचार, विज्ञान और किसान-केंद्रित संचार के संगम में निहित है। उद्योग, नीति-निर्माताओं और किसानों के सहयोग से देश एक टिकाऊ, लचीली और लाभकारी कृषि प्रणाली की ओर आगे बढ़ रहा है, जो आने वाले वर्षों में नई हरित क्रांति का मार्ग प्रशस्त करेगा।