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वकालत पूरी करने के बाद शुरू की जैविक खेती, युवाओं के लिए बने रोल मॉडल

भारत की पहचान खेतों से होती है. देश की अधिकतर जीविका खेती पर ही निर्भर करती है. पिछले कुछ दशकों में देश में खेती करने के तरीकों में काफी बदलाव आया है. शहरी युवाओं का खेती की ओर काफी रुझान बढ़ा है. 

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कामयाब किसान, 26 Jul, 2021, (अपडेटेड 26 Jul, 2021 08:53PM)

भारत की पहचान खेतों से होती है. देश की अधिकतर जीविका खेती पर ही निर्भर करती है. पिछले कुछ दशकों में देश में खेती करने के तरीकों में काफी बदलाव आया है. शहरी युवाओं का खेती की ओर काफी रुझान बढ़ा है. पढ़े लिखे युवा अच्छी नौकरिया छोड़कर भी खेती की ओर रुख कर रहे हैं और एक सफल किसान की तरह आगे बढ़ रहे हैं. हम एक ऐसे ही युवा किसान के विषय में आपको बता रहे हैं जिन्होंने वकालत की उच्च स्तरीय पढाई करने के बाद जैविक खेती की ओर रुख किया. हम बात कर रहे हैं मूलरूप से बिहार के रहने वाले नितीश ठाकुर की. जिन्होंने जैविक खेती को अपनाया.  

नितीश ठाकुर मूलरूप से बिहार के रहने वाले है उनका परिवार नॉएडा में रहता है. पूरी शिक्षा उन्होंने नॉएडा और  दिल्ली से हासिल की है. नितीश बताते हैं कि बिहार के सितामर्ही डिस्ट्रिक्ट में उनके गाँव में खेती की भूमि है. इसलिए शुरुआत से ही खेती से उनका लगाव है. आई.पी यूनिवर्सिटी से बीए और एलएलबी करने के बाद नितीश ठाकुर अपने घर पर थे. क्योंकि कोरोना के चलते देशभर में लॉकडाउन लगा  था ऐसे में नितीश ने अपने खाली समय का सदउपयोग किया. उन्होंने अपने आसपास के क्षेत्र किसानों को देखा और महसूस किया कि किस तरीके से किसानों को अधिक लाभ दिलाया जा सके. नितीश बताते है कि इसकी चर्चा उन्होंने अपने मित्रों से की किस तरह से खेती में अधिक लाभ लिया जा सकता है. तभी हमारे दिमाग में जैविक खेती करने का विचार आया. इसके बाद हमने फिर पूरे एक साल तक इस पर अनुसन्धान किया. क्योंकि पूरे अनुसंधान के बाद हमें यह समझ में आया कि जो भी हम खा रहे हैं वह केमिकल युक्त है. ऐसे में जो व्यक्ति शुद्ध और केमिकल मुक्त खायेगा वही स्वस्थ रहेगा.

तभी से हमने यह लक्ष्य बना लिया कि शुरुआत से जो हमारे बाप दादा शुद्ध खाना खाते आए हैं. वही शुद्ध खाना हमें सबको खिलाना है. हमने यही से जैविक खेती की शुरुआत की. इसके लिए हमने नॉएडा में किराए पर खेती की 25 बीघा ज़मीन ली और इस पर जैविक सब्जियों की खेती शुरुआत की. नितीश ठाकुर बताते है कि "हम सीजन के हिसाब से यहाँ पर खेती करते हैं. मौजूदा समय इस जमीन पर हम सब्जियों की खेती कर रहे हैं. हम इस जमीन में अत्याधुनिक तरीके से खेती कर रहे हैं. खेती की इस भूमि पर हमने 5 एचपी का सोलर पैनल, ड्रिप इरीगेशन सिस्टम लगाया है. हम प्राकृतिक संसाधनों के माध्यम से खेती कर रहे हैं. खेतो में हम जीवामृत का प्रयोग कर रहे हैं.

खेत पर ही जीवामृत बनाने के लिए हमने 12000 लीटर की एक होदी बना रखी है. जिसमें हम गौमूत्र, नीम, गुड आदि डालकर जीवामृत तैयार करते हैं. ड्रिप इरीगेशन सिस्टम का प्रयोग हम इसलिए करते हैं क्योंकि फ्लड इरीगेशन सिस्टम में पानी की बर्बादी बहुत ज्यादा होती है. इसलिए हमारा प्रयास है कि अधिक से अधिक पानी की बचत करके अच्छी पैदावार ली जाए." नितीश ने खेती की इस ज़मीन में करेला, तौरी, टमाटर और मिर्च आदि लगे हुए है. इसके अलावा नितीश कुछ समय के बाद गोभी की पौध खेती में लगाएगे साथ ही साथ दूसरी अन्य सब्जियों को भी खेत में लगाएंगे. उन्होंने अपने खेत में वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाने की यूनिट भी स्थापित की हुयी है.  जिसमें जैविक खाद बनाते हैं. हालांकि नितीश ठाकुर ने जैविक खेती के लिए किसी संसथान से कोई प्रशिक्षण नही लिया है. उन्होंने जो भी सीखा है स्वंयं ही सीखा है. यहाँ तक कि इस पूरे प्रोजेक्ट में  उनका अपना पैसा लगा है किसी तरह की कोई सरकारी मदद नही ली है. अपनी कड़ी मेहनत की बदौलत नितीश ठाकुर एक सफल किसान बन चुके हैं और युवाओं को प्रेरित कर रहे हैं.

कृषि विज्ञान केंद्र ने की तकनिकी मदद : नितीश ठाकुर बताते हैं कि शुरुआत में उनको केवीके या फिर किसी प्रकार के प्रशिक्षण के विषय में नही पता था. बस वे एक बाद पूसा गए थे. लेकिन जैसे ही उन्होंने खेती करना शुरू किया तो उनका संपर्क कृषि विज्ञान केंद्र मुरादनगर के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. अरविन्द कुमार से हुआ और उन्होंने नितीश ठाकुर को जैविक खेती में कीट प्रबंधन के विषय  में तकनिकी जानकारी दी. बताया कि किस तरीके से वो कीट प्रबंधन कर सकते हैं.    

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