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वकालत के साथ शुरू की मशरूम की खेती

ग्रामीण क्षेत्र में अर्थव्यवस्था का मुख्य स्त्रोत कृषि है, लेकिन आज ग्रामीण युवा खेती करना नहीं चाहते। आजकल ग्रामीण युवा खेती से मुंह मोड़ते नज़र आ रहे हैं, लेकिन इसके विपरीत युवाओं का एक तबका ऐसा भी है, जो नौकरी और व्यवसाय वाली जिंदगी को छोड़कर कृषि में हाथ आजमा रहा है और अच्छा मुनाफा भी कमा रहे हैं। हमारे सामने ऐसे बहुत से उदहारण हैं जहां अच्छे पढ़े लिखे युवा नौकरी को छोड़कर खेती की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसे ही एक युवा हैं दिल्ली के रहने वाले योगित राठी। योगित राठी ने बहुत ही कम समय में खेती में अपनी एक अलग पहचान बनायी है और दूसरे युवाओं के लिए एक प्रेरणा स्त्रोत हैं। 
युवा किसान योगित राठी का परिवार बागपत जिले के बिजवाड़ा गांव का रहने वाला है। बहुत पहले इनके परिवार वाले बिजवाड़ा से दिल्ली आ गए थे। इसलिए योगित राठी का जन्म दिल्ली में ही हुआ है। योगित राठी बताते हैं कि वे मूल रूप से दिल्ली के रहने वाले है। हाल ही में इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से अपनी वकालत की पढ़ाई (एलएलबी) को पूरा किया है। पढ़ाई के साथ-साथ कॉलेज पॉलिटिक्स में भी सक्रिय रहे हैं। योगित राठी बताते हैं कि पिछले साल कोरोना के चलते जब लॉकडाउन लगा तो वें घर पर ही रहते थे। घर पर रहने के कारण इनके पास काफी समय होता था। समय बिताने के लिए सोशल मीडिया सबसे अच्छा विकल्प था। तभी योगित ने यूट्यूब पर खेती से सम्बंधित कई विडियो देखे। एक दिन मशरूम की खेती पर विडियो देखकर योगित सबसे अधिक प्रभावित हुए। यही से उनके मन में खेती करने का जज्बा पैदा हुआ। योगित बताते हैं कि बचपन में वो जब गाँव जाते थे तो उनको खेतों में लहलाती फसलें बहुत प्रभावित करती थी। वे कहते हैं कि अब खेती उनकी हॉबी है। पिछले साल अक्टूबर में इस युवा किसान ने खेती की शुरुआत की और इन्होंने सबसे पहले मशरूम की खेती को तवज्जो दी। 
योगित बताते हैं कि सबसे पहले भूमि का चयन करने की आवश्यकता थी क्योंकि उनकी जमीन उनके घर से बहुत दूर थी। इसलिए उन्होंने बागपत जिले के सिखैडा गाँव में अपने मामा की कृषि भूमि पर मशरूम की खेती की शुरुआत की। चूंकि इनको कृषि में पहले से कोई अनुभव नही था इसलिए इन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र से मशरूम की खेती का प्रशिक्षण प्रशिक्षण लिया और उसके बाद मशरूम की खेती शुरू किया। इसमें उनके परिवार वालों और उनके मामा ने पूरा साथ दिया। शुरुआत में योगित राठी ने मशरूम की दो शेड लगायी। इसमें एक शेड का साइज़ 30x60 फीट रखा। योगित बताते हैं कि एक शेड को बनाने में उनका जो खर्च आया वह तकरीबन पौने दो लाख रूपये था। यानी दो शेड में उनके तक़रीबन साढ़े तीन लाख रुपए का खर्च आया है। वह बताते हैं कि इसमें सबसे अधिक खर्च बांस का होता है, किन्तु यह आपकी अचल सम्पति होती है। इसलिए इसमें कोई जोखिम नही है। अब वह इन दोनों शेड से मशरूम का अच्छा उत्पादन ले रहे हैं और उनको उम्मीद है कि इस सीजन में अच्छा मुनाफा उनको मिल जाएगा। 
गाँव के अधिकतर लोग मशरूम को नही जानते:  
योगित राठी बताते हैं कि गांव में अधिकतर व्यक्ति मशरूम को नही जानते हैं। गांव के लोग इसको साधारण भाषा में सांप की छतरी के नाम से जानते हैं। लेकिन अब गांव के बहुत सारे लोग योगित राठी को देखकर मशरूम की खेती कर रहे हैं। वो कहते हैं यदि किसान इसकी खेती करें तो उनको बहुत अच्छी आय हो सकती है। 

इन बातों का ध्यान रखेः  

युवा किसान योगित राठी मशरूम की खेती में अपने अनुभव को साझा करते हुए बताते हैं कि शुरुआत में तो उनको कई समस्याओं का सामना करना पड़ा जैसे कि इसमें प्रयोग होने वाली सामग्री। शुरू में उन्हें कोकोपिट और जिप्सम कहां से ले कैसे चयन करें आदि को लेकर काफी दिक्कत थी लेकिन धीरे-धीरे सब सही हो गया। योगित कहते है कि यह ठन्डे प्रदेशों की खेती है। इसलिए इसकी खेती करते समय तापमान का खास ध्यान रखा जाता है और यह फंगस को बहुत जल्दी पकड़ता है। इसलिए इसकी खेती में फंगस से बचाने का विशेष ध्यान रखा जाता है। अन्यथा आपके उत्पादन में कमी आ सकती है।
मार्किट में है अच्छी मांग: 
मशरूम की खेती करते समय अक्सर यह दिमाग में रहता है कि इसको कहा बेचेंगे इसका मार्केट कहा है लेकिन इसको मार्केट करने में कोई भी समस्या नही आती है क्योंकि यह एक लक्ज़री सब्जी है। इसकी ज्यादातर मांग बड़े-बड़े होटलों में होती है जिसकी अच्छी कीमत भी मिलती है। इसी के साथ इसको स्थानीय मंडी में भी आसानी से बेचा जा सकता है। योगित अपने मशरूम उत्पादन को स्वयं जाकर आजादपुर और राजधानियों की अन्य मंडी में बेचकर आते हैं। 
योगित कहते हैं कि वह आगे भी खेती करना जारी रखेंगे और मशरूम के अलावा अन्य फसलों की भी खेती शुरू करेंगे। योगित राठी आज युवाओं के लिए एक प्रेरणा स्त्रोत हैं। फसल क्रांति की पूरी टीम उनके सुनहरे भविष्य की कामना करती है।   
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