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मौसम्बी की खेती कर गोपाल ने बनाया अलग पहचान

बिहार के भागलपुर  जिले में एक प्रगतिशील किसान गोपाल सिंह कई वर्षों से मौसम्बीकी खेती कर रहे हैं। वे कई तरह के फलों की खेती कर रहे हैं, लेकिन मौसम्बी के व्यवसायिक उत्पादन से 

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कामयाब किसान, 30 Aug, 2021, (अपडेटेड 30 Aug, 2021 08:00PM)

बिहार के भागलपुर  जिले में एक प्रगतिशील किसान गोपाल सिंह कई वर्षों से मौसम्बीकी खेती कर रहे हैं। वे कई तरह के फलों की खेती कर रहे हैं, लेकिन मौसम्बी के व्यवसायिक उत्पादन से उन्हें सबसे ज्यादा कमाई हो रही है। गोपाल सिंह वही किसान हैं, जिन्होंने बिहार में सेब की खेती  कर किसानों को नया रास्ता दिखाया है। 45 डिग्री तक की गर्मी झेलने की क्षमता रखने वाली किस्म  R99 सेब के पेड़ उनके खेतों में कई सालों से लहरा रहे हैं और अब तो सेब का व्यवसायिक उत्पादन भी होने लगा है। बहरहाल यहां हम बात कर रहे हैं मौसम्बी की।

बहुवर्षीय बागवानी फसल है मौसम्बी

भागलपुर-नवगछिया मुख्य सड़क के किनारे गोपाल सिंह ने अपने बड़े प्लॉट पर मौसम्बी के पेड़ लगाए हैं। मौसम्बी की खेती के बारे में जानने के लिए हम उनके खेत पहुंचे, जहां मौसम्बी के सैकड़ों पेड़ लहलहा रहे थे। मौसम्बी बहुवर्षीय बागवानी फसल है। काफी हद तक फलों की तोड़ाई हो चुकी थी और इन्हें मार्केट में थोक के भाव बेचा भी जा चुका था। इसके बावजूद अभी पेड़ों में खूब सारे फल लदे हुए थे न केवल बड़े पेड़ों में बल्कि छोटे पेड़ों में भी खूब सारे फल लदे थे। मौसम्बी की खेती के बारे में जानने के लिए हमने गोपाल सिंह से बात की:

मौसम्बीकी खेती की शुरु आत को लेकर गोपाल सिंह ने बताया कि पहले वे उनके घर-बगीचे में नींबू के पेड़ लगे हुए थे। उन्होंने सोचा कि नींबू वर्ग के फल मौसम्बी के पेड़ भी लगाए जा सकते हैं और महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्न के मुकाबले यहां की जलवायु तो अच्छी ही है। यही सोचकर वे नागपुर गए और वहां से 100-200 कर के 2 से 3 बार में कई हजार पेड़ ले आए और अपने खेतों में लगाया।

कौन सी मिट्टी है उपयुक्त, कैसे करें सिंचाई?

उन्होंने बताया कि मौसम्बी की खेती के लिए बलूही दोमट मिट्टी भी अच्छी है और सामान्य मिट्टी, जिसे केबाल कहते हैं, वह भी उपयुक्त है। किसी भी मिट्टी में इसे आसानी से उपजाया जा सकता है। सिंचाई के लिए फ्लड एरिगेशन भी कर सकते हैं। हर 15-20 दिन में पानी चाहिए होता है। ड्रिप एरिगेशन यानी टपक सिंचाई पद्धति भी इसमें उपयुक्त मानी जाती है।

चौथे साल से ही एक पेड़ में 50 किलो फल

पेड़ लगाने के बाद तीसरे साल से अच्छे-खासे फल आने लगते हैं, जबकि पांचवे साल से व्यवसायिक उत्पादन होने लगता है। चौथे साल से ही एक पेड़ में 20 से 50 किलो तक फल होने लगता है। ऐसे में अगर आपके खेत में 100 पेड़ भी लगे हुए हैं तो एक बार में 50 क्विंटल फल होंगे। पांचवे साल से उत्पादन और बढ़ेगा तो अच्छी खासी कमाई होगी।

किन बातों का रखना होगा ध्यान

मौसम्बी की खेती कहीं भी आसानी से की जा सकती है। केवल बाढ़ग्रस्त इलाका नहीं होना चाहिए। अच्छे उत्पादन के लिए नियमति खाद और उर्वरक देना चाहिए। मक्खी, सिल्ला, लिंफ माइनर, इल्ली वगैरह से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए कीटनाशक का उपयोग करना चाहिए। कभी पौधों के सूखने का डर रहता है, ऐसे में रसायनिक उपचार कर उन्हें बचाया जा सकता है। बहुत ज्यादा परेशानी वाली कोई बात नहीं होती। इंसेक्टिसाइट, गोबर खाद या रासायनिक खाद का प्रयोग कर सकते हैं।

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