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सहजन से बनेगा टी बैग और स्वास्थ्यवर्द्धधक कैप्सूल, 25 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार

बिहार के गया जिले में सहजन की खेती के जरिए लोगों को रोजगार से जोड़ा जाएगा। इसके लिए वन विभाग ने पहल की है। लक्ष्य है जिले भर में पहाड़ी व जंगल क्षेत्र से सटे इलाकों में करीब 25 हजार लोगों को रोजगार दिलाना। सहजन से जुड़े हर तरह के उत्पाद जिले में तैयार होंगे। पौधा लगाने से लेकर उनके फूल, पत्ते, फल आदि हर चीज से अलग-अलग तरह का उत्पाद तैयार किया जाएगा। सहजन के पत्तों से जहां पौष्टिक पाउडर बनेगा वहीं इन्हीं पाउडर से फिर कैप्सूल भी तैयार किए जाएंगे। सहजन से ही टी बैग भी बनाने की योजना है। इन सबके लिए जिले में अलग-अलग जगहों पर प्रोसेसिंग प्लांट भी लगाए जाने की योजना है। सहजन की खेती और उससे जुड़े उत्पाद को तैयार करने में तकरीबन 10 करोड़ का खर्च आएगा। इस पूरी कार्ययोजना को जमीन पर उतारने के लिए बीते पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर वन विभाग और आइसीआइसीआइ फाउंडेशन के बीच करार हुआ है।
गया जिले में अतरी-जेठियन का इलाका सहजन की खेती के लिए उपर्युक्त माना गया है। इन इलाकों में अभी अधिक पेड़-पौधे नहीं हैं। अनेक जगहों पर वीरानी सी है। ऐसे में वन विभाग की योजना है कि अतरी-जेठियन के इलाके में अधिक से अधिक सहजन के पेड़ लगाए जाएं। वैसे जिले के अतरी, बेलागंज, बाराचटी व इमामंज में सोलर ग्राइंड का प्रोसेसिंग प्लांट लगाया जाना तय हुआ है। सभी उत्पादों पर वन विभाग का ब्रांड लोगो लगेगा। जो इसे मार्केट उपलब्ध कराने में सहूलियत देगी। गांव-कस्बे की महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा रोजगार देने की तैयारी की गई है। सहजन की खेती और उससे जुड़े उत्पाद को तैयार करने के काम में महिलाओं को लगाया जाएगा। वन विभाग की तैयारी है कि 25 हजार लोगों को रोजगार देने का जो लक्ष्य है उसमें अधिकाधिक महिलाएं जुड़ें। वन समितियों के माध्यम से सभी जगहों पर सहजन के पौधे लगाए जाने हैं। इन्हीं के जिम्मे पौधों की देखरेख होगी। जिले में अभी सहजन के छह लाख पौधे तैयार हैं। पूरे गया जिलें में पांच लाख पौधा लगाने का लक्ष्य रखा गया है। जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों तक सहजन के तैयार उत्पाद पहुंचेंगे।
एक आकलन के मुताबिक बिहार में 65 फीसद महिलाएं व बच्चे कुपोषित होते हैं। कुपोषण को दूर करने में सहजन को बहुत मददगार बताया गया है। इसके लिए वन विभाग और आइसीडीएस के अधिकारियों की बात में मीटिंग होगी। फिलहाल पौधा लगाने पर जोर है। जिला उद्यान पदाधिकारी शशांक कुमार सहजन के फायदे बताते हैं। इसमें प्रचुर मात्रा में कैल्शियम और प्रोटीन पाया जाता है। इसमें दूध की तुलना में चार गुना कैल्शियम और दोगना मात्रा में प्रोटीन होता है। प्राकृतिक रूप से इसमें मैंग्नीशियम, शरीर में कैल्शियम को आसानी से पचाने में मदद करता है। जिंक, खून की कमी पूरी करने में सहायक है। सहजन में ओलिक ऐसिड शरीर के लिए अति आवश्यक है। सहजन में अधिक मात्रा में कैल्शियम होने के कारण यह हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है। इसमें विटामिन सी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर रोगों से लड़ने की शिक्त प्रदान करता है। कुपोषण दूर करने में यह सहायक है। शशांक कुमार सहजन को हर तरह से सेहत के लिए फायदेमंद बताते हैं। इसके अनेकों औषधीय गुण भी हैं।
वन प्रमंडल पदाधिकारी अभिषेक कुमार बताते हैं कि विश्व पर्यावरण दिवस पर वन विभाग और आइसीआइसीआइ फाउंडेशन के बीच एक करार हुआ है। जिसमें गया जिले में बड़े पैमाने पर सहजन की खेती कराई जाएगी। इससे कई तरह के उत्पाद तैयार किए जाएंगे। जिले में चार जगहों पर प्रोसेसिंग प्लांट लगाने की योजना है। इस पूरे कार्य योजना से करीब 25 हजार लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मुहैया कराया जाएगा।
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