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श्वेत क्रांति से पहले ही सूख गई धारा

बिहार के जमुई जिले के किसानों की आमदनी दोगुनी करनी थी, लिहाजा श्वेत क्रांति का सपना देखा गया। सपना हकीकत में तब्दील हो इसके लिए उत्तम नस्ल की दुधारू पशुओं पर अनुदान की योजना शुरू की गई।

fasalkranti.in
समाचार, 22 Jul, 2021

बिहार के जहानाबाद जिले में आषाढ़ की समाप्ति में अब चंद दिन शेष रह गए हैं लेकिन इस बार पिछले वर्ष की तुलना में अधिक धान की रोपनी हुई है। धान रोपनी के पहले कोरोना वायरस का साया पिछले दो सालों से लोगों को दहशत में रखा है। पिछले वर्ष आषाढ़ में मात्न आठ फीसद धान रोपनी हुई थी। वहीं इस साल तीन गुना अधिक हुई है। जिले में 46 हजार हेक्टेयर भूमि में धान की रोपनी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें 30 फीसद रोपनी हो गयी है। मौसम अनुकूल रहा तो 10 दिनों के भीतर ही लक्ष्य पूरा हो जाएगा। 

हालांकि, इस बार रोहिणी नक्षत्न से ही अच्छी बारिश होती रही है। बीच में सूखे जैसी स्थिति भी कायम हो गई थी। किसानों की चिंता बढ़ने लगी थी, तभी रविवार को फिर अच्छी बारिश होने से किसान चैन की सांस लेने लगे हैं। हालांकि, रोपनी के बाद भी अच्छी बारिश की जरूरत बनी रहती है। इस वर्ष भू-जल स्तर की बेहतर स्थिति मोटर पंपसेट से सिंचाई को सुगम बना दिया है। किसान बताते हैं कि नियमति रूप से बारिश होने से खरपतवार फसलों को नुकसान नहीं पहुंचाता है। खरपतवार से हर वर्ष फसल को काफी नुकसान पहुंचा है।

इसके अलावा कई तरह के कीडे भी फसलों को चट कर जाते हैं। जिला कृषि पदाधिकारी ने कहा कि  धान के बेहतर पैदावार को लेकर किसानों को हर संभव मदद उपलब्ध कराया जा रहा है। खरपतवार को समाप्त करने को लेकर कई तरह की दवाइयां प्रचिलत है। जिससे किसान मित्न लोगों को अवगत करा रहे हैं। यदि किसी किसान को उसकी विशेष जानकारी की जरूरत है तो वे सीधे विभाग से भी संपर्क कर सकते हैं। इस वर्ष अभी तक 30 फीसद तक धान रोपने का कार्य हो चुका है।

यह है योजना

पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग से समग्र गव्य विकास योजना अंतर्गत अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति तथा अति पिछडा वर्ग के लिए 2 एवं 4 दुधारु  मवेशी की डेयरी इकाई की स्थापना के लिए 75 फीसद अनुदान का प्रावधान है। इसके अलावा सामान्य एवं पिछडा वर्ग के लिए डेयरी इकाई स्थापित करने पर 50 फीसद अनुदान दिया जाता है। योजना के तहत 2 दुधारू मवेशी यूनिट के लिए 1.60 लाख तथा 4 मवेशी यूनिट के लिए 3,38,400 कुल लागत व्यय निर्धारित किया गया है। अत्यंत पिछडा वर्ग, अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लिए पांच फीसद तथा शेष वर्गों के लिए 10 फीसद अंशदान सुनिश्चित है। राज्य सरकार द्वारा अनुदान के पश्चात अत्यंत पिछडा वर्ग अनुसूचित जाति व जनजाति के लिए यूनिट लागत राशि का 20 तथा सामान्य व पिछडा वर्गों के लिए 40 फीसद ही ऋण दिया जाना है।

केस स्टडी

लक्ष्मीपुर प्रखंड अंतर्गत पिडरौन गांव के आवेदक पप्पू सिंह, सुरेंद्र सिंह जिनहरा गांव निवासी मनोज कुमार गुप्ता, काला निवासी धर्मेंद्र पासवान तथा बरमनिया गांव के चंदर यादव ने 2019-20 में डेयरी के लिए आवेदन किया था। जिसे स्वीकृत कर गव्य विकास कार्यालय से भारतीय स्टेट बैंक लक्ष्मीपुर भेजा गया लेकिन वहां से नकारात्मक जवाब मिलने के कारण इन लोगों की गोपालन की योजना अधूरी रह गई।

गव्य विकास क्षेत्नीय पदाधिकारी का कहना है कि 2019-20 वित्तीय वर्ष में 136 यूनिट लक्ष्य के विरुद्ध 16 तथा 2020-21 में 86 के विरुद्ध 7 यूनिट के लिए अलग-अलग बैंक शाखाओं द्वारा ऋण स्वीकृत किया गया। इस साल बैंक ने सकारात्मक कदम का संकेत दिया है।

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