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दरभंगा और मधुबनी सहित समूचे मिथिला क्षेत्र पान की खेती

बिहार के दरभंगा और मधुबनी सहित समूचे मिथिला क्षेत्न में 38 गांव में पान की खेती होती है। 38 में से करीब 15 गांवों में मलतौनी पान की खेती हो विशेषकर सिंहवाड़ा, सनहपुर, मनितौली, तारालाही,

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समाचार, 24 Sep, 2021, (अपडेटेड 24 Sep, 2021 04:02PM)

बिहार के दरभंगा और मधुबनी सहित समूचे मिथिला क्षेत्न में 38 गांव में पान की खेती होती है। 38 में से करीब 15 गांवों में मलतौनी पान की खेती हो विशेषकर सिंहवाड़ा , सनहपुर, मनितौली, तारालाही, हाया घाट और समैसीपुर आदि में विशेष तौर पर इसकी खेती होती है। अन्यथा अधिकतर गांवों में कलकतिया पान की खेती ही ज्यादातर हो रही है क्योंकि पान की दुकानदार इसे बड़े पत्ते की वजह से खरीदते हैं। 

बिहार में मिथिला के पान की डिमांड काफी अधिक है। ताराबाई और मलतौनी पान का स्वाद आज भी मिथिला की पहचान में मिठास घोलता है। बिहार में करीब 20 लाख पान की बिक्री रोज होती है। मिथिला के लोग अपनी परंपराओं को आसानी से नहीं छोड़ते. पान के संदर्भ में यह बात सौ टके फिट बैठती है। बेशक बाजार में कलकतिया और उड़िया पान बेचा जा रहा हो, लेकिन मैथिल लोगों के घरों में शताब्दियों से खाये जा रहे ताराबाई और मलतौनी पान का ही राज है. किसानों और पान को पसंद करने वाले मिथिला के लोगों की यह जिद है कि पान खाने की परंपरा टूटेगी नहीं .पान से भावनात्मक लगाव का इससे बड़ा कोई उदाहरण शायद ही मिले।

 

मिथिला के विशेष कर नगरीय क्षेत्नों व कस्बों में बहुत कम ऐसे घर होंगे, जिसकी सुबह लाल डंडी वाले ताराबाई और मलतौनी पान की मिठास से न होती हो़ दरअसल शताब्दियों पुरानी पान की इन किस्मों की गुणवत्ता में रत्ती भर भी बदलाव नहीं आया है। बदला है तो केवल मिथिला का मौसम,जिसकी वजह से पान की खेती प्रभावित हुई है। हालांकि, दरभंगा सहित समूचे मिथिला के पान के खास शौकीन लोगों ने इसकी मांग कम नहीं होने दी है.

लिहाजा अब भी काफी किसानों ने भी पान के बराजे(पान के विशेष खेत) अपनी मेहनत से गुलजार रखे हैं। वहीं, मिथिला क्षेत्न की पूजा और दूसरे मंगल उत्सवों में पान की केवल यही दो किस्मों का उपयोग किया जाता है। पप्पू भगत का दावा है कि मिथिला क्षेत्न से रोजाना बीस लाख पान बिकने के लिए स्थानीय और बाहरी बाजार में जाता है। बनौली गांव के किसान बताते हैं कि हमारे ताराबाई और मलतौनी पान का आकार छोटा होने की वजह से पान की दुकान वाले नहीं खरीदते है।

 

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