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वैज्ञानिकों ने किया दलहन फसलों का नि:शुल्क बीज वितरण

बिहार के समस्तीपुर जिले में प्रखंड के पुसहो गांव में  कृषि विज्ञान केंद्र, बिरौली के द्वारा सामूहिक दलहन फसल प्रत्यक्षण कार्यक्रम के तहत नि:शुल्क बीज किया गया। कृषि विज्ञान केंद्र बिरौली 

fasalkranti.in
समाचार, 22 Jul, 2021

बिहार के समस्तीपुर जिले में प्रखंड के पुसहो गांव में  कृषि विज्ञान केंद्र, बिरौली के द्वारा सामूहिक दलहन फसल प्रत्यक्षण कार्यक्रम के तहत नि:शुल्क बीज किया गया। कृषि विज्ञान केंद्र बिरौली एवं डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विवि, पूसा के नोडल पदाधिकारी डॉ. संजय कुमार के द्वारा दर्जनों किसानों के बीच अरहर का बीज के साथ बीजोपचार के लिए बोरान एवं सल्फर, कीटनाशक दवा का वितरण किया गया। कलस्टर प्रत्यक्षण दलहन योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। 

कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक ने उपस्थित किसानों को कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्नालय, भारत सरकार द्वारा दिए गए निर्देशों की जानकारी दी। जहां तक संभव हो परिचित व्यक्ति से ही खेतों में काम कराएं। अंजान व्यक्ति से काम न कराएं। वे कोरोना महामारी का कारण बन सकते है। साथ ही जहां तक हो सके कृषि कार्य मशीन से ही कराई जाए। मशीनों से कार्य शुरू करने के पहले तथा बाद में उसे बीच-बीच में भी सैनिटाइज किया जाना चाहिए। बोरी एवं पैकेजिंग सामग्री को भी सैनिटाइज करना चाहिए। 

दलहन फसलों के उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि लाने के लिए जिला को आच्छादित किया गया है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र हमेशा तत्पर एवं कार्यरत है। प्रबंधन, अगैती सब्जी एवं फल प्रबंधन में उत्पादित सब्जी के महत्व, उत्पादकता, उत्पादन के बारे में किसानों को अवगत कराकर अपने उत्पाद का अधिकतम मूल्य किसान स्वयं प्राप्त कर सकते हैं। 

सदियों से चली आ रही पारंपरिक खेती की पद्धतियों और ग्रामीणों द्वारा पीढ़ी दर पीढ़ी अपने भरण-पोषण के लिए जिंदा रखी गई, उन तकनीकों की जानकारी के साथ-साथ खेती में आधुनिक तकनीकों को अपनाकर उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम इस्तेमाल करके खेती में आने वाली लागत को कम करना आज के समय की आवश्यकता है। वैज्ञानिक तकनीक के साथ पारंपरिक खेती के सिद्धांतों का उपयोग करके कृषि को मुनाफे वाला व्यवसाय बनाया जा सकता है। 

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