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85 हजार हेक्टेयर में की जानी है धान की खेती

बिहार के सुपौल जिले में जो मानसून किसानों को खुशी देती है उसका नाम सुनते ही किसान सिहर उठते हैं। मानसून की हो रही लगातार बारिश ने जहां धान रोपाई पर ब्रेक लगा दी है, वहीं पहले से रोपे गए

fasalkranti.in
समाचार, 23 Jul, 2021, (अपडेटेड 23 Jul, 2021 08:23PM)

बिहार के सुपौल जिले में जो मानसून किसानों को खुशी देती है उसका नाम सुनते ही किसान सिहर उठते हैं। मानसून की हो रही लगातार बारिश ने जहां धान रोपाई पर ब्रेक लगा दी है, वहीं पहले से रोपे गए धान को भी पानी बर्बाद कर रहा है जिससे किसान हताश और निराश बने हुए हैं। दरअसल कई वर्षों बाद मानसून ने शुरुआती काल में ही दस्तक दे दी थी जिससे किसानों को बिचड़ा लगाने में मशक्कत नहीं करनी पड़ी साथ ही धान की रोपाई भी शुरु आती काल से शुरू हो गई। किसानों को लग रहा था कि इस बार धान की खेती अगता होगी और उत्पादन भी बेहतर होगी। अब यही मानसून किसानों के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है मानसून की लगातार बारिश से जहां जिले में धान रोपनी थम सी गई है वहीं लगाई गई फसल डूब गई है। 

किसानों का कहना है कि लगातार हो रही बारिश ने खेती को चौपट कर रखा है। गहरी जमीन में पानी भरे रहने के कारण धान की रोपाई बाधित है इधर जुलाई का महीना लगभग समाप्त होने को है बिचड़ा भी बड़ा हो रहा है। यदि इन बिचड़ों को खेतों में जल्द से जल्द नहीं रोपे गए तो इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा। इधर कोसी तटबंध के अंदर की स्थिति तो और बदतर है। एक तो कोसी का पानी और दूसरी तरफ लगातार बारिश से खेत पानी से लबालब भरा हुआ है जिससे रोपाई का पूर्ण रूप से ठप पड़ा हुआ है कृषि विभाग की मानें तो जिले में अब तक लक्ष्य के करीब 50 फीसद धान की रोपाई ही संभव हो पाई है।

खरीफ फसल के लिए जिले को जो लक्ष्य प्राप्त हुआ है उसके मुताबिक इस बार 85 हजार हेक्टेयर में धान की खेती की जानी है इसके लिए जिले में 8500 हेक्टेयर में बिचड़ा लगाए गए हैं। समय से मानसून उतर जाने के कारण किसानों ने बिचड़ा बोने में भी तेजी दिखाई और समय से बिचड़ा भी तैयार हो गया। लगातार बारिश होते रहने से ऊंची जमीन की रोपाई पूरी की गई। किसानों को लग रहा था कि बारिश रुकते ही गहरी जमीन में रोपाई तेजी से कर ली जाएगी परंतु लगातार बारिश होते रहने से इन खेतों में पानी घट नहीं रहा है जिससे किसान हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। 

किसान श्याम सुंदर मंडल, मोहन मंडल, सुखदेव मेहता, ललित यादव, अमन यादव आदि ने बताया कि शुरुआती काल में ही मानसून के दस्तक दे देने से वे लोग खरीफ फसल को ले काफी उत्साहित थे। लग रहा था कि खरीफ फसल की पैदावार इस वर्ष बेहतर होगी। लगातार बारिश होते रहने से पहले ऊंची जमीन की रोपाई कर ली। उम्मीद थी की बारिश रुकेगी तो फिर गहरे खेतों की रोपाई कर ली जाएगी लेकिन लगातार बारिश होने के कारण खेतों से पानी घटने का नाम नहीं ले रहा है जिससे रोपाई ठप पड़ी है। फसल लगे खेतों में भी पानी लगे रहने के कारण उसमें खाद का छिड़काव संभव नहीं हो पा रहा है जिससे पौधे का विकास रुक सा गया है। ऐसे में यदि बारिश नहीं रुकती है तो शेष खेतों की रोपाई हो पाएगी यह फिलहाल संभव नहीं दिख रहा है।  

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