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पिंडो से जैविक खाद

बिहार के गया में अक्षयवट पिंडवेदी पर पिंड से जैविक खाद बनाने के लिए दो मशीनें लगी हैं। यहां हर दिन पांच सौ किलोग्राम जैविक खाद बन रही है। पिंडवेदी पर पिंड को इकट्ठा करने के लिए दस सफाईकर्मियों

fasalkranti.in
समाचार, 24 Sep, 2021, (अपडेटेड 24 Sep, 2021 04:56PM)

बिहार के गया में अक्षयवट पिंडवेदी पर पिंड से जैविक खाद बनाने के लिए दो मशीनें लगी हैं। यहां हर दिन पांच सौ किलोग्राम जैविक खाद बन रही है। पिंडवेदी पर पिंड को इकट्ठा करने के लिए दस सफाईकर्मियों को लगाया गया है। कर्मकांड संपन्न होने के बाद सफाईकर्मी पिंड को डस्टबिन में उठा लेते हैं। इसके बाद डस्टबिन से पिंडनिकालकर मशीन में डालते हैं। मशीन में लगा डिब्बा पिंड से भर जाने के बाद चालू कर दिया जाता है, जिससे खाद बनकर निकलने लगती है। 

मान्यता है कि पिंड प्रेतात्मा का आहार होता है। इसी उद्देश्य से श्रद्धकर्म में प्रेतात्मा को पिंड अर्पित किया जाता है। पितृपक्ष में बड़ी संख्या में पिंडदानी कर्मकांड करते हैं, बड़ी मात्ना में पिंड इकट्ठा हो जाते हैं। पिंडों को नगर निगम अक्षयवट पिंडवेदी के पास ले जाकर जैविक खाद तैयार कर रहा है। अक्षयवट पिंडवेदी पर मशीन से तैयार जैविक खाद को पैकिंग के लिए नैली स्थित नगर निगम के डंपिंग ग्राउंड पर भेजा जा रहा है। जहां सूखने के बाद जैविक खाद को पैक किया जाएगा। दरअसल, सुखाने के लिए अक्षयवट पिंडवेदी के पास पर्याप्त जगह नहीं है। 

पिंड से जैविक खाद बनाने के लिए नगर निगम ने पांच मशीनों की तीन साल पहले खरीदी थी, तीन मशीन विष्णुपद श्मशान घाट और दो मशीन अक्षयवट पर लगाई गई थी, लेकिन पितृपक्ष में दो मशीनों से ही जैविक खाद बन रही है। श्मशान घाट पर लगीं तीन मशीनें बंद पड़ी हैं। नगर निगम के सहायक अभियंता शैलेंद्र कुमार सिन्हा ने बताया कि अक्षयवट ¨पडवेदी पर लगीं दो मशीनों से जैविक खाद तैयार की जा रही है। पितृपक्ष तक खाद बनाने का काम चलेगा। प्रत्येक दिन पांच सौ किलोग्राम जैविक खाद बन रही है।

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