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आधुनिक तकनीक से पपीते की खेती करना लाभदायक

बिहार के औरंगाबाद में तकनीकी युग में किसान अगर परंपरागत खेती छोड़कर आधुनिक तकनीक से पपीते की खेती करें तो वे अच्छे लाभ प्राप्त कर सकेंगे। उपरोक्त बातें मगध प्रमंडल गया

fasalkranti.in
समाचार, 18 Aug, 2021, (अपडेटेड 18 Aug, 2021 01:16PM)

बिहार के औरंगाबाद में तकनीकी युग में किसान अगर परंपरागत खेती छोड़कर आधुनिक तकनीक से पपीते की खेती करें तो वे अच्छे लाभ प्राप्त कर सकेंगे। उपरोक्त बातें मगध प्रमंडल गया के उपनिदेशक उद्यान पवन कुमार ने कही। वे डीएचओ जीतेंद्र कुमार के साथ जिले के चिल्हकी बिगहा व मोख्तयार पुर गांव में फसल का मुआयना कर रहें थे। 

उन्होंने कहा कि पपीते की खेती एक ऐसी खेती है जिससे प्रति हेक्टेयर किसान लाखों रुपये आमदनी कर सकते है। रेड लेडी वेरायटी सबसे अच्छी है। अधिकारियों ने उक्त गांव के शशिकांत सिंह के दो एकड जमीन में लगे पपीते की खेत पर पहुंचे। उक्त किसान ने तकरीबन चार माह पूर्व पपीते का फसल लगाया था। डीएचओ ने बताया कि प्लास्टिक मिलचिंग, ड्रीप एरिगेशन के साथ उद्यान विभाग के तहत रेड लेडी वेरायटी उन्हें उपलब्ध कराई गई थी। 

किसान को फसल लगाने से लेकर अब तक करीब एक लाख रुपये लागत लगा है। पपीता एक साल के फल देने वाला पौधा है। सब कुछ ठीक ठाक रहा तो इतनी जमीन में 3 से 4 लाख रुपये आमदनी हो सकती है। इसी क्रम में अधिकारियों ने चिल्हकी बिगहा गांव के प्रगतिशील किसान बृजिकशोर मेहता, रघुपत मेहता व वीरेंद्र मेहता के साथ बैठक कर स्ट्राबेरी की उन्नत खेती करने का सुझाव दिया। 

उपनिदेशक ने कहा कि स्ट्राबेरी के विटर स्टार व विटर डाउन सबसे अच्छी वेरायटी है परंतु इस क्षेत्न के लिए विटर डाउन सबसे अच्छी है। बीएचओ पीयूष पांडेय ने स्ट्राबेरी फसल के बारे में कई तरह की जानकारी दीं। किसानों को बेहतर खेती करने के लिए सरकार द्वारा दी जाने वाले सिब्सडी के बारे में बताया। इस मौके पर दर्जनों किसान मौजूद रहे।

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