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भारत ने 2020-21 के दौरान कृषि निर्यात में शानदार वृद्धि दर्ज कराई

भारत सरकार के वाणिज्य विभाग के सचिव डॉ. अनूप वधावन ने आज कहा कि 2020-21 के दौरान कृषि निर्यात ने शानदार प्रदर्शन किया है। मीडिया के साथ बातचीत करते हुए, उन्होंने जानकारी दी 

fasalkranti.in
समाचार, 11 Jun, 2021, (अपडेटेड 11 Jun, 2021 03:39PM)
भारत सरकार के वाणिज्य विभाग के सचिव डॉ. अनूप वधावन ने आज कहा कि 2020-21 के दौरान कृषि निर्यात ने शानदार प्रदर्शन किया है। मीडिया के साथ बातचीत करते हुए, उन्होंने जानकारी दी कि पिछले तीन वर्षों (2017-18 में 38.43 बिलियन डॉलर, 2018-19 में 38.74 बिलियन डॉलर तथा 2019-20 में 35.16 बिलियन डॉलर) तक स्थिर बने रहने के बाद 2020-21 के दौरान कृषि एवं संबद्ध उत्पादों (समुद्री तथा बागान उत्पादों सहित) का निर्यात तेजी से बढ़कर 41.25 बिलियन डॉलर तक पहुंचा जो 17.34 प्रतिशत की बढोतरी को इंगित करता है। रुपये के लिहाज से यह वृद्धि 22.62 प्रतिशत है जो 2019-20 के 2.49 लाख करोड़ रुपये की तुलना में बढ़कर 2020-21 के दौरान 3.05 लाख करोड़ रुपये तक जा पहुंचा। 2019-20 के इौरान भारत का कृषि और संबद्ध आयात 20.64 बिलियन डॉलर था और 2020-21 के तदनुरुपी आंकड़ें 20.67 बिलियन डॉलर के हैं। कोविड-19 के बावजूद, कृषि में व्यापार संतुलन में 42.16 प्रतिशत का सुधार आया है जो 14.51 बिलियन डॉलर से बढ़कर  20.58 बिलियन डॉलर हो गया।

कृषि उत्पादों (समुद्री तथा बागान उत्पादों को छोड़कर) के लिए वृद्धि 28.36 प्रतिशत है जो 2019-20 के 23.23 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2020-21 के दौरान 29.81 प्रतिशत तक जा पहंचा। भारत कोविड-19 अवधि के दौरान स्टेपल के लिए बढ़ी हुई मांग का लाभ उठाने में सक्षम रहा है। 

अनाजों के निर्यात में भारी वृद्धि देखी गई है जिसमें गैर-बासमती चावल का निर्यात 136.04 प्रतिशत बढ़कर 4794.54 मिलियन डॉलर का रहा, गेहूं का निर्यात 774.17 प्रतिशत बढ़कर 549.16 मिलियन डॉलर का रहा, तथा अन्य अनाजों (मिलेट, मक्का तथा अन्य मोटे अनाज) का निर्यात 238.28 प्रतिशत बढ़कर 694.14 मिलियन डॉलर का रहा। 

अन्य कृषि संबंधी उत्पादों, जिनके निर्यात में 2019-20 के दौरान उल्लेखनीय बढोतरी दर्ज कराई गई, में आयल मील (1575.34 मिलियन डॉलर-90.28 प्रतिशत की बढोतरी), चीनी (2789.97 मिलियन डॉलर-41.88 प्रतिशत की बढोतरी), कच्चा कपास (1897.20 मिलियन डॉलर-79.43 प्रतिशत की बढोतरी), ताजी सब्जियां (721.47 मिलियन डॉलर-10.71 प्रतिशत की बढोतरी) और वेजीटेबल आयल (602.77 मिलियन डॉलर-254.39 प्रतिशत की बढोतरी) शामिल हैं। 

भारत के कृषि उत्पादों के सबसे बड़े बाजारों में अमेरिका, चीन, बांग्लादेश, यूएई, वियतनाम, सऊदी अरब, इंडोनेशिया, नेपाल, ईरान और मलेशिया शामिल हैं। इनमें से अधिकांश गंतव्यों ने वृद्धि प्रदर्शित की है जिसमें सर्वाधिक वृद्धि इंडोनेशिया (102.42 प्रतिशत), बाग्ला देश (95.93 प्रतिशत) और नेपाल (50.49 प्रतिशत) में दर्ज की गई। 

अदरक, काली मिर्च, दाल चीनी, इलायची, हल्दी, केसर आदि जैसे मसालों जो उपचारात्मक गुणों के लिए जाने जाते हैं, के निर्यात में भी भारी बढोतरी दर्ज की गई है। 2020-21 के दौरान, काली मिर्च के निर्यात में 28.72 प्रतिशत की बढोतरी हुई जो बढ़कर 1269.38 मिलियन तक जा पहुंचा, दाल चीनी के निर्यात में 64.47 प्रतिशत की बढोतरी हुई जो बढ़कर 11.25 मिलियन तक जा पहुंचा, जायफल, जावित्री और इलायची के निर्यात में 132.03 प्रतिशत की बढोतरी हुई (जो 81.60 मिलियन डॉलर से बढ़कर 189.34 मिलियन तक जा पहुंचा), अदरक, केसर, हल्दी, अजवायन, तेज पत्ता आदि के निर्यात में 35.44 प्रतिशत की बढोतरी हुई जो बढ़कर 570.63 मिलियन तक जा पहुंचा। मसालों के निर्यात ने 2020-21 के दौरान लगभग 4 बिलियन डॉलर का अब तक का सर्वोच्च स्तर छू लिया। 

2020-21 के दौरान जैविक निर्यात 1040 मिलियन डॉलर का रहा जो 2019-20 में 689 मिलियन डॉलर का था, यह 50.94 प्रतिशत की बढोतरी दर्शाता है। जैविक निर्यातों में ऑयल केक/मील, तिलहन, अनाज एवं बाजरा, मसाले एवं कोंडीमंट (छौंक), चाय, औषधीय पादप उत्पाद, सूखे मेवे, चीनी, दलहन, काफी आदि शामिल हैं। 

पहली बार कई क्लस्टरों से भी निर्यात हुए हैं। उदाहरण के लिए, वाराणसी से ताजी सब्जियों तथा चंदौली से काले चावल का पहली बार निर्यात हुआ है जिससे उस क्षेत्र के किसानों को सीधा लाभ हासिल हुआ है। अन्य क्लस्टरों अर्थात नागपुर से संतरे, थेनी और अनंतपुर से केले, लखनऊ से आम आदि से भी निर्यात हुए हैं। महामारी के बावजूद, मल्टीमोडल मोड द्वारा ताजी बागवानी ऊपज का निर्यात हुआ और खेपों को इन क्षेत्रों से हवाई जहाज और समुद्र के रास्ते दुबई, लंदन तथा अन्य गंतव्यों पर भेजा गया। मार्केट लिंकेज के लिए विभाग, फसल उपरांत वैल्यू चेन विकास तथा एफपीओ जैसे संस्थागत संरचनाओं की आरंभिक सहायता से पूर्वोत्तर के किसान भारतीय सीमाओं से आगे भी अपने मूल्य वर्द्धित उत्पादों को भेज सकने में सक्षम हुए। 

अनाज निर्यात का प्रदर्शन भी 2020-21 के दौरान बहुत अच्छा रहा है। हम पहली बार कई देशों को निर्यात करने में सक्षम रहे हैं। उदाहरण के लिए, चावल का तिमोर-लेस्टे, प्यूर्तो रिको, ब्राजील आदि जैसे देशों में निर्यात किया गया है। इसी प्रकार, गेहूं का निर्यात भी यमन, इंडोनेशिया, भूटान आदि देशों में किया गया है और अन्य अनाजों का निर्यात सूडान, पोलैंड बोलिविया आदि को किया गया है।

कोविड-19 महामारी के दौरान किए गए उपाय
  1. अपीडा, म्पीडा तथा कमोडिटी बोर्डों ने निर्बाधित निर्यात सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न मान्यताओं/प्रत्यायनों अर्थात पैकहाउस रिकौगनिशन, पीनट यूनिट रजिस्ट्रेशन, रजिस्ट्रेशन-कम-मेंबरशिप सर्टिफिकेट्स, इंटीग्रेटेड मीट प्लांट रिकौगनिशन, चीन एवं अमेरिका को चावल के निर्यात के लिए प्लांट का रजिस्ट्रेशन , राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम के तहत सर्टिफिकेशनों एवं प्रत्यायनों की वैधता को व्यापक विस्तार उपलब्ध कराया है।
  2. निर्यात के लिए आवश्यक विभिन्न प्रमाणपत्रों को ऑॅनलाइन जारी करने के लिए भी व्यवस्थाएं की गई हैं। 
  3. कोविड-19 लॉकडाउन (2020) के दौरान, निर्यातकों को खेपों/ट्रकों/लेबर की आवाजाही, प्रमाणपत्रों को जारी किए जाने, लैब टेस्टिग रिपोर्ट, सैंपल कलेक्शन आदि से संबंधित मुद्वों के समाधान में मदद करने के लिए अपीडा/कमोडिटी बोर्डां में 24 घ्ंटे काम करने वाले एक इमर्जेंसी रिस्पांस सेल का निर्माण किया गया। लॉकडाउन के पहले सप्ताह में ही, सेल को निर्यातकों के सामने आने वाले विभिन्न मुद्वों के संबंध में लगभग एक हजार काल आए और सेल ने संबंधित प्राधिकारियों अर्थात राज्य प्रशासन, कस्टम्स, पोर्ट, शिपिंग, डीजीएफटी आदि के समक्ष उन्हें उठाने के जरिये उन मुद्वों का समाधान किया तथा निर्यातों को वास्तविक समय मंजूरी सुनिश्चित की। 
  4. 2020 में लॉकडाउन अवधि के दौरान, नए पैक हाउस आवेदकों के लिए वर्चुअल जांच आरंभ की गई। पिछले प्रदर्शन के आधार पर बिना जांच किए विद्यमान पैक हाउसों की वैधता बढ़ा दी गई। लगभग 216 पैक हाउस बिना किसी वास्तविक जांच या अनुपालनों की प्रक्रिया के निर्बाधित रूप से कार्य करते रहे हैं। कोविड-19 की वर्तमान लहर के दौरान भी पैक हाउसों की मान्यता ऑटोमैटिक रूप से बढ़ा दी गई है। इससे लगभग 100 पैक हाउसों, जिनकी मान्यता की अवधि समाप्त हाने वाली थी, को लाभ हुआ और बागवानी उत्पादों के निर्यातकों को राहत मिली। 
  5. महामारी के दौरान, निर्यात जांच परिषद और निर्यात जांच एजेन्सियों ने सुनिश्चित किया कि निर्यात वर्ग को दी जाने वाली सेवाएं जैसेकि निर्यात के लिए प्रमाण पत्र जारी करना, स्वास्थ्य प्रमाण पत्र और उद्भव का प्रमाणपत्र आदि सुगमता से तथा समय पर डेलीवर हो जाएं। 
  6. व्यवसाय करने की सुगमता को बढ़ावा देने के लिए, नियामकीय अनुपालनों को न्यूनतम करने तथा विभिन्न जुर्मों को अपराध से बाहर किए जाने की प्रक्रिया आरंभ की गई है। 
  7. चूंकि, कोविड-19 महामारी के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों का आयोजन नहीं किया जा रहा है, अपीडा ने भारतीय निर्यातकों एवं आयातकों के बीच संपर्क स्थापित करने के लिए वर्चुअल ट्रेड फेयर (वीटीएफ) के आयोजन के लिए एक इन-हाउस प्लेटफार्म डेवेलप किया है। दो वीटीएफ-भारतीय चावल एवं कृषि कमोडिटी शो‘ तथा भारतीय फल, सब्जियों तथा फ्लोरीकल्चर शो का पहले ही आयोजन किया जा चुका है। अपीडा 2021-22 के दौरान, इंडियन प्रोसेस्ड फूड शो, इंडियन मीट एंड पोल्ट्री शो, इंडियन ऑर्गेनिक प्रोडक्ट शो का भी आयोजन करेगा। 
  8. देश के विभिन्न क्षेत्रों में निर्यातकों को सुविधा प्रदान करने के लिए, अपीडा ने 2020-21 के दौरान निम्नलिखित क्षेत्रीय/विस्तार/प्रोजेक्ट कार्यालय खोले: चेन्नई, चंडीगढ़, अहमदाबाद, कोच्चि, जम्मू एवं कश्मीर, भोपाल में विस्तार कार्यालय तथा वाराणसी में प्रोजेक्ट ऑफिस। 
  9. विभाग ने आपरेशन ग्रीन स्कीम के प्रभावी उपयोग के लिए खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के साथ निरंतर समन्वय रखा है जिसे कोविड-19 के कारण अधिकांश बागवानी फसलों तक विस्तारित कर दिया गया है। इसी प्रकार, विभाग ने माल ढुलाई की उच्च दरों के दबाव को कम करने के लिए कृषि उड़ान तथा कृषि रेल के उपयोग के लिए क्रमशः नागरिक उड्डयन मंत्रालय तथा रेल मंत्रालय के साथ सहयोग किया है। इस प्रयास का परिणाम मध्य पूर्व, ईयू तथा दक्षिण पूर्व एशिया के महत्वपूर्ण बाजारों तक शीघ्र नष्ट हो जाने वाली वस्तुओं की सुगम आवाजाही के रूप में आया। कृषि रेल परियोजना ने पूर्वोत्तर राज्यों के ताजे फलों एवं मसालों के निर्यातकों की निर्णायक रूप से सहायता की है। 
  10. कई राज्यों में, लॉकडाउन के दौरान भी, सुनिश्चित किया जा रहा है कि राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम के तहत सभी मान्यता प्राप्त प्रमाणन निकाय इलेक्ट्रोनिक मोड में प्रचालनगत बने रहें। प्रमाणन निकायों के प्रत्यायन को 3 महीने तक विस्तारित कर दिया गया है जिससे कि ऑनलाइन ट्रेसियबिलिटी सिस्टम को ऐक्सेस तथा आपरेट करने तथा प्रमाणपत्र जारी करने में उन्हें सक्षम बनाया जा सके।  
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