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खाद की कालाबाजारी शुरू, किसान परेशान

बिहार के बांका में खेती किसानी का समय शुरू होते ही खाद माफिया मुनाफाखोरी को लेकर सिक्रय हो गये हैं। बीते दो तीन दिनों में हुई अच्छी बारिश के बाद पंजवारा व आसपास के सीमावर्ती क्षेत्नों 

fasalkranti.in
समाचार, 21 Jul, 2021, (अपडेटेड 21 Jul, 2021 07:47PM)

बिहार के बांका में खेती किसानी का समय शुरू होते ही खाद माफिया मुनाफाखोरी को लेकर सिक्रय हो गये हैं। बीते दो तीन दिनों में हुई अच्छी बारिश के बाद पंजवारा व आसपास के सीमावर्ती क्षेत्नों में किसान धानरोपनी को लेकर खेतों का रूख करने लगे हैं। धानरोपनी के दौरान खेतों में उर्वरक के उपयोग को लेकर किसान खाद खरीदने बाजार में आने लगे हैं। बाजार में खाद दुकानदार इसे अवसर समझ भुनाने की फिराक में लगे हैं।

स्थानीय सूत्नों की मानें तो असली पारस डीएपी खाद 1600 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से बिक रहा है। यूरिया 300 रुपये प्रति बोरी से ऊपर के भाव बिक रही है, जबकि डीएपी 1250 तथा यूरिया 266 रुपये बोरी के हिसाब से बिक्री मूल्य है। खाद किसानों को उचित मूल्य पर मिले, इसके लिए विभाग ने हाल में सभी उर्वरक विक्रेताओं से शपथ पत्न भी भरवाया है। इसके बावजूद मुनाफाखोरी का धंधा अपने हिसाब से जारी है। इसके अलावा पंजवारा बाजार में मिलावटी डीएपी खाद बाजार में बिकने की बात चर्चा में है। 

सूत्नों की माने तो बंगाल में निर्मित हरी फसल नामक नकली खाद को पारस डीएपी के बोरी में पैकिग करा ऊंचे दाम बिक्री की जा रही है। इसके अलावा इफको डीएपी की रिबैगिंग कर उसे भी ऊंचे दाम पर बेच किसानों को चूना लगाया जा रहा है। इस धंधे में शामिल खाद माफिया की कारगुजारी भोले भाले किसानों के अरमानों पर पानी फेर रहा है। 

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