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यूरिया का अधिक प्रयोग मृदा पर डालता है विपरीत प्रभाव

बिहार के बांका जिले में फसलों के अधिक उत्पादन के लिए खेतों में अधिक मात्ना में उर्वरकों का प्रयोग फसल के लिए हानिकारक है। किसान जानकारी के अभाव में ज्यादा उत्पादन के लिए खतों में 

fasalkranti.in
समाचार, 26 Jul, 2021, (अपडेटेड 26 Jul, 2021 08:57PM)

बिहार के बांका जिले में फसलों के अधिक उत्पादन के लिए खेतों में अधिक मात्ना में उर्वरकों का प्रयोग फसल के लिए हानिकारक है। किसान जानकारी के अभाव में ज्यादा उत्पादन के लिए खतों में अधिक उर्वरक डालते हैं। जो फसल व खेतों को नुकसान पहुंचाता है। सबसे अधिक यूरिया की खपत खरीफ फसल में होती है। इस सीजन में 19 हजार 683 एमटी यूरिया की खपत होती है। किसान अपने खेतों में दो बार खाद का प्रयोग करते है। पहला धान की नीराई के बाद दूसरा धान में बाली होने के समय। अभी तक लगभग 30 फीसद धान की रोपाई हो सकी है। 

धान की रोपाई के 25 दिन के बाद इसकी निराई की जाती है। अभी किसानों को आसानी से खाद उपलब्ध हो जा रहा है। लेकिन 15 अगस्त के बाद और सितंबर माह में खाद की मांग अधिक हो जाती है। ऐसे में किसानों को खाद नहीं मिलता है। इस कारण किसानों को अधिक कीमत पर यूरिया खरीदना पडता है। हालांकि इस बार सरकार द्वारा तय कीमत पर खाद उपलब्ध कराने के लिए कई ठोस कदम उठाए गए है। 

केवीके के शस्य विज्ञानी डा. रघुवर साहू ने बताया कि फसल उत्पादन के लिए कुछ पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। इसमें तीन प्रमुख है, यूरिया, फास्फोरस व पोटाश। किसान खेतों में यूरिया, डीएपी और पोटाश का अधिक प्रयोग करते है। यूरिया का अधिक प्रयोग खेतों में मृदा पर विपरीत प्रभाव डालता है। खेतों में फसल अवशेष को जलाने से जीवाशम कार्बन की कमी हो रही है। इसमें फसल अल्प आयु में ही अधिक वृद्धि हो जाती है। यूरिया का वैज्ञानिक विधि से संतुलित मात्ना में प्रयोग करने के साथ ही देसी गोबर खाद का भी प्रयोग करना चाहिए। खेतों में फसल अवशेषों के जलाने के बजाय सडाकर खेतों में डालना चाहिए।

जिले में उपलब्ध खाद एमटी में

खाद    आवश्यकता   उपलब्ध

यूरिया    19683        6500

डीएपी     6583        1875

एनपीके   4393          819

एमओपी  2100          120

एसएसपी 2600            61

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