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किसानों की आजीविका के साथ मवेशियों की जान पर भी संकट

बिहार के शेखपुरा में किसानों के खेत पर जबरन कब्जा कर कांग्रेस घास के नाम से प्रसिद्ध खरपतवार तेजी से प्रसार करते हुए उसे बंजर बना रही है। इसे गाजर घास भी कहते हैं। 

fasalkranti.in
समाचार, 21 Jul, 2021, (अपडेटेड 21 Jul, 2021 07:40PM)

बिहार के शेखपुरा में किसानों के खेत पर जबरन कब्जा कर कांग्रेस घास के नाम से प्रसिद्ध खरपतवार तेजी से प्रसार करते हुए उसे बंजर बना रही है। इसे गाजर घास भी कहते हैं। इस खरपतवार के नाश को लेकर किसान के द्वारा किया गया प्रयास लगातार असफल हो रहा है। वहीं इसके संपर्क में आने से त्वचा रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। जिले के गांवों में इसका प्रसार व्यापक हो चुका है। 

इसको लेकर बरबीघा के शेरपर गांव निवासी किसान धर्मराज सिंह व रुस्तम कुमार ने बताया कि खेत में इसके फैलाव से काफी परेशानी हो रही है। इस संबंध में कृषि विशेषज्ञ शांति भूषण ने बताया कि इस घास के बीज को पांच दशक पहले भारत में अकाल की स्थिति के दौरान अमेरिका से आए गेहूं में पाया गया था। उस समय कांग्रेस की सरकार थी अत: इसे कांग्रेस घास लोग कहने लगे। उधर, कृषि विभाग में कृषि समन्वयक संदीप कुमार ने बताया कि एक पौधा एक हजार से लेकर 50 हजार तक अति सूक्ष्म बीज पैदा करता है। यह तेजी से बढ़ता और विकास करता है। इसे अत्यधिक खाने से मवेशी की जान भी जा सकती है और खेतों में यह 30 से 40 फीसद तक पैदावार में कम कर देती है।

सिविल सर्जन डा. कृष्ण मुरारी प्रसाद सिंह ने बताया कि गाजर घास काफी एलर्जी वाली है। इसके संपर्क में आने से बचना चाहिए। इस घास के संपर्क में आने से डर्मेटाइिटस, एिक्जमा, एलर्जी, बुखार, दमा आदि हो सकता है।

इसके बचाव के बारे में जानकारी देते हुए विशेषज्ञ शांति भूषण ने बताया कि फूल आने से पहले ही सुरक्षात्मक उपाय अपनाकर इसे खेत से नष्ट कर देना चाहिए। खरपतवार नाशक रसायन का प्रयोग भी इस पर काफी कारगर सिद्ध होता है।

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