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हम कृषि उद्यमिता को बढ़ावा दे रहे हैं डॉ पी.के. गुप्ता

कृषि एक ऐसा क्षेत्र है जिसको देश की रीढ़ की हड्डी कहा जाता हैl यदि कृषि करना किसान बंद कर दे तो देश के सामने भोजन का सबसे बड़ा संकट आ जाएगा. इसलिए किसान और कृषि वैज्ञानिक दिन रात कड़ी मेहनत करते है l  सरकार का प्रयास है कि किसानों की आय को दोगुना किया जाए. इसके लिए लगातार प्रयास भी किए जा रहे हैं l इसी कड़ी में राजधानी दिल्ली स्थित कृषि विज्ञान केंद्र उजवा भी अहम भूमिका निभा रहा है l यह उजवा कृषि विज्ञान केंद्र किस तरीके से किसानों को सशक्त बना रहा है स्वंय बता रहे है कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉ पी.के.गुप्ता l पेश है बातचीत के कुछ मुख्य अंश उन्ही के शब्दों में...
कृषि विज्ञान केंद्र की गतिविधियों के विषय में कुछ बताए ?
कृषि विज्ञान केंद्र उजवा किसानों को अत्याधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने का काम कर रहा है. मै इस कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष के रूप में कार्य कर रहा हूँ l राजधानी दिल्ली के ग्रामीण क्षेत्र में बड़े स्तर पर किसान खेती करते हैं.इस क्षेत्र में मुख्य रूप से गेहूं, धान और सब्जियों की खेती की जाती. कृषि विज्ञान केंद्र का प्रयास है कि यहाँ के किसानों को सशक्त बनाया जाए और आर्थिक रूप से समृद्ध बनाया जाए l
किसानों के लिए आप किस तरीके के कार्यक्रम का आयोजन करते हैं?
इन किसानों को सशक्त बनाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र पर समय समय पर किसानों को प्रशिक्षण दिया जाता है. किसानों को कृषि की नई तकनीकों से अवगत कराया जाता है. इसके अलावा किसानों के लिए कृषि मेलों का भी आयोजन किया जाता है l जिनमें किसानों को बीजों के नयी किस्म, खाद, जैविक खाद एवं कृषि यंत्रों से अवगत कराया जाता है l इसके अलावा किसानों को सरकारी योजनाओं के विषय में बताया जाता है l
हाल ही में हुए कार्यक्रम के विषय में कुछ बताए?
हाल ही में हमने कृषि विज्ञान केंद्र पर एक दिवसीय मेलें का आयोजन किया था. इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि डॉ एके सिंह, डिप्टी डायरेक्टर (एग्रीकल्चर एक्सटेंशन) आईसीएआर ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. इस कार्यक्रम में तक़रीबन 500 से अधिक किसानों ने भाग लिया और 20 से अधिक स्टाल भी लगाए गए l कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र उजवा द्वारा किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के विषय में जागरूक किया गया. साथ ही कृषि की अत्याधुनिक तकनीकों से भी अवगत कराया गया l
किसानों को उद्यमिता से कैसे जोड़ रहे हैं?
मुझे यह बताते हुए गर्व होता है कि हमारे कृषि विज्ञान केंद्र से सबसे अधिक किसान कृषि उद्यमी बनकर निकले है l इसका सर्वोच्च उदहारण है कृष्णा अचार बनाने वाली कृषि उद्यमी कृष्णा यादव जिन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र प्रशिक्षण लेकर आचार बनाने का काम शुरू किया और अब वे एक सफल उद्यमी बन चुकी है l कृष्णा यादव को प्रधानमंत्री द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है. हमारा प्रयास है की हम अधिक से अधिक किसानों को उद्यमी बना सके ताकि किसानों की आय बढ़ सके. इसके लिए किसानों को आचार बनाना, मुरब्बा, जैम, शहद और मशरूम आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है. इस तरह से कृषि विज्ञान केंद्र उजवा किसानों को उद्यमी बना रहा है l
फसल अवशेष प्रबंधन पर आप क्या कर रहे हैं?
जैसा मैंने आपको पहले भी बताया कि हमने फसल अवशेष प्रबंधन एक कार्यक्रम का आयोजन किया था. इसमें किसानों को बताया गया कि किस प्रकार से किसान वें अत्याधुनिक कृषि यंत्रों का प्रयोग करके फसल अवशेष प्रबंधन किया जा सकता है. फसल से बचे हुए अवशेषों को न जलाकर उसका प्रबंधन किया जा सकता है. इसी के साथ फसल अवशेष प्रबंधन करने के लिए वेस्ट डी कंपोजर का इस्तेमाल किया जा सकता है. वेस्ट डी कंपोजर भारतीय कृषि अनुसन्धान संसथान द्वारा तैयार किया गया एक कैप्सूल है जो फसल अवशेष को गलाकर मिटटी में मिला देता है. इनका प्रयोग करके किसान आसानी से फसल अवशेष प्रबंधन को अपना सकते हैं l
कृषि विज्ञान केंद्र से यदि कोई प्रशिक्षण लेना चाहे तो कैसे संपर्क का सकता है?
यदि कोई किसान कृषि सम्बंधित किसी भी तरह का कोई प्रशिक्षण लेना चाहते है तो वे  कृषि विज्ञान केंद्र आ सकते हैं. इसके अलावा हम समय समय पर कृषि विज्ञानं केंद्र की वेबसाइट, रेडियो एवं अख़बारों के माध्यम से जानकारी देते रहते हैं l अंत में यही कहूँगा कि किसान खेती के साथ साथ उद्यमिता को भी अपनाए और कृषि विज्ञानं केंद्र के संपर्क में रहे l
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