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कृषि की नई तकनीकों के लिए कृषि विज्ञान केंद्र से जुड़ें किसानः डाॅ. पी.के. सिंह

ग्रामीण भारत में रहने वाले लोगों की पूरी आजीविका कृषि पर निर्भर है। एक किसान को यही लालसा होती है कि उसके खेत में अच्छी पैदावार हो जिससे वह अच्छी आय ले सके। इसके लिए किसानों का नयी कृषि तकनीकों को प्रयोग में लाना बहुत आवश्यक है। पिछले कुछ समय से किसान खेती में नयी कृषि तकनीकों को प्रयोग में भी लेकर आ रहे हैं। किसानों तक कृषि की आधुनिक तकनीकों को पहुंचाने में कृषि विज्ञान केन्द्रों का बहुत बड़ा योगदान है। कृषि विज्ञान केंद्र किसान और तकनीक के बीच की अहम कड़ी है। इसी के सन्दर्भ में फसल क्रांति की टीम ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर बघरा स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य अधिकारी डॉ प्रवीन कुमार सिंह से बात कि किस तरीके से उनका कृषि विज्ञान केंद्र किसान हित के लिए कार्य कर रहा है। पेश हैं उनसे बातचीत के कुछ मुख्य अंश।
अपने विषय में कुछ बताएं?
मैं अपने विषय में बताना चाहूंगा मुझे कृषि क्षेत्र में कार्य करते हुए तक़रीबन 25 साल हो गए। मैंने जीबी पन्त कृषि विश्वविद्यालय, पन्तनगर से एग्रोनोमी में पीएचडी किया है। शुरुआती दिनों में पन्तनगर में ही मैं कार्यरत था। उसके बाद उत्तर प्रदेश में ही कृषि के क्षेत्र में कार्यरत रहा। कृषि विज्ञान केंद्र मुज़फ्फरनगर में मैं वर्ष 2013 से कार्यरत हूं। अपने इस 25 वर्ष के कार्यकाल में मैंने विश्व बैंक की एक मुख्य परियोजना के तहत भी कार्य किया। जिसमें मैंने पश्चिमी देश इथोपिया में अपना 2 साल कार्यकाल पूरा किया और इस दौरान मैंने विदेशी कृषि विशेषज्ञों के साथ काम कर 76000 कृषि विकास एजेंट जोड़े। फिलहाल मैं मुज़फ्फरनगर जिले के दोनों कृषि विज्ञान केन्द्रों का प्रभार देख रहा हूं। इसके अलावा मैंने कई राज्यों जैसे झारखण्ड, उत्तर प्रदेश, झारखण्ड, तमिलनाडु आदि में प्रसार सलाहकार के रूप में भी कार्य किया है।
पिछले 7 साल में कृषि विज्ञान केंद्र में क्या नए बदलाव देखने को मिले?
कृषि विज्ञान केंद्र की पिछले सात वर्षों के विकास की बात करें तो, कृषि विज्ञान केंद्र, बघरा मुज़फ्फरनगर ने कई सराहनीय कार्य किए गए है। इस कार्यकाल के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद् द्वारा हमारे केवीके को सम्मानित किया गया। इसी के साथ हमने किसानों के लिए कृषि तकनीक केंद्र भी स्थापित किया है।
कृषि विज्ञान केंद्र पर प्रशिक्षण की क्या सुविधा है?
हमारे कृषि विज्ञान केंद्र के द्वारा किसानों को समय-समय पर कई तरह के प्रशिक्षण दिए जाते हैं। किसानों को यहां पर कृषि की अत्याधुनिक तकनीकों से अवगत कराया जाता है। इसी के साथ किसानों को जैविक खेती, प्राकृतिक खेती, फसल प्रबंधन और खेती में किस समय पर कौन सा कार्य करना उचित रहेगा आदि का प्रशिक्षण देने के लिए कार्यशाला का आयोजन किया जाता है। किसानों के अलावा दूसरे संस्थानों के छात्र भी यहां पर प्रशिक्षण लेने आते हैं।
कृषि उद्यमिता को आप कैसे बढ़ावा दे रहे हैं?
समय-समय पर हम सरकार की परियोजनाओं को भी बढ़ावा देते है। जैसा की सरकार प्रयास कर रही है कि किसानों की आय को दोगुना किया जाए इसी को ध्यान में रखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र कृषि उद्यमिता को बढ़ावा दे रही है। इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किसानों को मूल्य संवर्धन करना सिखाया जाता है। जिसमें खासकर महिला किसानों को आचार, जैम, जैली, शहद आदि तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के बाद हम किसानों को उत्पाद को मार्केट करना भी बताते हैं। हमारा कृषि विज्ञान केंद्र प्रदेश के इकलौता ऐसा केवीके है जिसको आर्या (ARYA & Attracting and Retaining Youth in Agriculture)  में चयन हुआ ताकि किसानों को कृषि उद्यमिता की ओर आकर्षित किया जा सके।
किसानों से आप क्या कहना चाहेंगे?
मैं किसानों से यही कहना चाहूंगा कि किसानों को कृषि की अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करना चाहिए ताकि उनकी आय में इजाफा हो सके। सबसे जरुरी है कि किसान अपने जिले के नजदीकी कृषि विज्ञान केन्द्रों पर जाए और कृषि विशेषज्ञों के संपर्क में रहे क्योंकि कृषि विज्ञान केंद्र से किसानों को बहुत फायदा है। केवीके का हमेशा प्रयास रहता है कि किसानों की समस्याओं को समझे और और अत्याधुनिक तकनीकों से जोड़े। जिले के कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा प्रशिक्षण पाने के बाद जिले के प्रगतिशील किसान ओमकार त्यागी जी के साथ कई किसानों को सम्मानित किया गया है। इसलिए मेरा अनुरोध है कि किसान हमेशा कृषि विज्ञान केंद्र के संपर्क रहे।
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