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जल जीवन मिशन के तहत 2021-22 के लिए 7,064 करोड़ रुपये का अनुदान 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सभी घरों को नल द्वारा साफ पानी उपलब्ध कराने के सपने को साकार करने के लिए, केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन के तहत महाराष्ट्र सरकार के लिए सहायता अनुदान वर्ष 2021-22 में बढ़ाकर 7,064.41 करोड़ कर दिया है

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योजनाएं, 11 Jun, 2021, (अपडेटेड 11 Jun, 2021 04:22PM)
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सभी घरों को नल द्वारा साफ पानी उपलब्ध कराने के सपने को साकार करने के लिए, केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन के तहत महाराष्ट्र सरकार के लिए सहायता अनुदान वर्ष 2021-22 में बढ़ाकर 7,064.41 करोड़ कर दिया है, जो कि वर्ष 2020-21 में 1,828.92 करोड़ रुपये था। आवंटन में चार गुना वृद्धि को मंजूरी देते हुए केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने 2024 तक सभी ग्रामीण घरों में नल से पानी की आपूर्ति के लिए हर तरह की सहायता देने का आश्वासन दिया।
2019 में इस मिशन की शुरुआत में, देश के कुल 19.20 करोड़ ग्रामीण घरों में से केवल 3.23 करोड़ (17%) घरों में नल से पानी की आपूर्ति होती थी। पिछले 21 महीनों में, कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन जैसी बाधाओं के बावजूद, जल जीवन मिशन का कार्यान्वयन तेजी से किया गया और 4.27 करोड़ घरों को पाइप से पानी का कनेक्शन प्रदान किया गया। कवरेज में 22% की इस वृद्धि के साथ, देशभर में वर्तमान में 7.51 करोड़ (39.12%) ग्रामीण घरों को नल से पानी की आपूर्ति की जा रही है। गोवा, तेलंगाना, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और पुदुच्चेरी ने ग्रामीण क्षेत्रों के 100% घरों में नल कनेक्शन का लक्ष्य प्राप्त कर लिया और हर घर जल बन गए हैं। प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’के सिद्धांत का पालन करते हुए मिशन का आदर्श वाक्य है कि ‘कोई भी पीछे ना छूटे’ और एक गांव के प्रत्येक घर को नल से पानी का कनेक्शन मिलना चाहिए। वर्तमान समय में, 62 जिलों और 92 हजार से अधिक गांवों में, प्रत्येक घर को नल से पानी की आपूर्ति हो रही है।
Grant of Rs 7,064 crore for 2021-22 under Jal Jeevan Mission - Fasal Kranti

महाराष्ट्र में, 142 लाख ग्रामीण घरों में से, 91.30 लाख घरों (64.14%) को नल से पानी का कनेक्शन उपलब्ध करवाया गया है। 15 अगस्त 2019 को जल जीवन मिशन की शुरुआत में, केवल 48.43 लाख (34.02%) घरों के पास नल से पानी की आपूर्ति की सुविधा थी। 21 महीनों में, राज्य के 42.86 लाख घरों को नल के पानी का कनेक्शन प्रदान किया गया है। राज्य ने प्रत्येक ग्रामीण घर में नल से पानी की आपूर्ति के लिए 2021-22 में 27.45 लाख घरों, 2022-23 में 18.27 लाख घरों और 2023-24 में 5.14 लाख घरों  को नल के पानी का कनेक्शन देने की योजना बनाई है।

महाराष्ट्र के 29,417 गांवों में नल से पानी का कनेक्शन प्रदान करने के लिए जलापूर्ति का काम अभी तक शुरू नहीं हुआ है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जोर दिया कि सभी गांवों में नल कनेक्शन देने का काम शुरू हो जाना चाहिए ताकि राज्य 2024 तक सभी घरो में नल से पानी की आपूर्ति प्रदान कर सके। उन्होंने राज्य से कार्यान्वयन की गति को तेज करने का आग्रह किया है, जो कि 2020-21 की पिछली तिमाही में प्रति माह 1.59 लाख नल के पानी का कनेक्शन थी, मगर अप्रैल और मई में घटकर 9,800 नल के पानी का कनेक्शन हो गई।

2020-21 में राज्य को ग्रामीण क्षेत्रों में नल से जलापूर्ति के लिए 1,828.92 करोड़ रुपये का केंद्रीय अनुदान दिया गया था लेकिन इसमें से 1,371.69 करोड़ रुपये का इस्तेमाल राज्य नहीं कर सका और इस अनुदान को वापस लौटा दिया। इस साल केंद्रीय आवंटन में चार गुनी वृद्धि (7,064.41 करोड़ रुपये), 268.99 करोड़ रुपये का अव्ययित शेष, 2020-21 में राज्य के मैचिंग शेयर में 149.43 करोड़ रुपये की कमी और वर्तमान साल के मैचिंग शेयर के साथ, राज्य के पास 2021-22 में जल जीवन मिशन के तहत जलापूर्ति के काम के लिए 14,547.24 करोड़ रुपये की निश्चित उपलब्धता है। अतः जलापूर्ति के लिए फंड की कोई कमी नहीं है। 

15वें वित्त आयोग द्वारा ग्रामीण स्थानीय निकायों/पंचायती राज संस्थाओं को पानी और स्वच्छता के लिए सुनिश्चित अनुदान के रूप में महाराष्ट्र को 2021-22 में 2,584 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया था। अगले पांच वर्ष यानी 2025-26 तक राज्य को 13,628 करोड़ रुपये का निश्चित फंड दिया जाएगा। महाराष्ट्र के ग्रामीण क्षेत्रों में इतना बड़ा निवेश आर्थिक गतिविधियों को तेज करेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। इससे गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। 

देश के स्कूलों, आश्रमशालाओं और आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए नल का सुरक्षित पानी सुनिश्चित करने के लिए, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 100 दिवसीय अभियान की घोषणा की थी, जिसका 2 अक्टूबर 2020 को केंद्रीय मंत्री गजेंद्र शेखावत ने शुभारंभ किया था। इसके परिणामस्वरूप, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, गुजरात, आंध्र प्रदेश, गोवा, तमिल नाडु, तेलंगाना, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह जैसे राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने सभी स्कूलों, आश्रमशालाओं और आंगनवाड़ी केंद्रों में नल से पानी की व्यवस्था की है। महाराष्ट्र में 65,301 स्कूलों (76%)और 60,082 आंगनवाड़ी केंद्रों (66%)को नल के पानी का कनेक्शन उपलब्ध करवाया गया है। केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से बच्चों की अच्छी सेहत, बेहतर स्वच्छता और हाईजीन के लिए अगले कुछ महीनों में बाकी बचे सभी स्कूलों, आश्रमशालाओं और आंगनवाड़ी केंद्रों में भी नल के सुरक्षित पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है।

जल जीवन मिशन के तहत, राज्यों को पानी की कमी वाले क्षेत्रों, गुणवत्ता प्रभावित गांवों, महत्वाकांक्षी जिलों, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति की अधिकता वाले गांवों और सांसद आदर्श ग्राम योजना (एसएजीवाई) गांवों के लिए भी प्राथमिकता सुनिश्चित करने की आवश्यकता होती है। 

जल गुणवत्ता जांच और निगरानी गतिविधियों को भी शीर्ष प्राथमिकता देनी है जिसके लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशाकर्मियों, स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों, पंचायती राज संस्थाओं के सदस्यों, स्कूल शिक्षों आदि को प्रशिक्षित किया जा रहा है ताकि वह फील्ड टेस्ट किट (एफटीके) के प्रयोग द्वारा दूषण के लिए पानी के सैंपलों का परीक्षण कर सकें। यहां 177 जिलों और सब-डिविजनल लैबोरेट्रीज में से केवल 10 एनएबीएल द्वारा मान्यता प्राप्त हैं।

जल जीवन मिशन एक ‘बॉटम अप’ अप्रोच के साथ काम करता है जिसमें समुदाय योजना से लेकर कार्यान्वयन, प्रबंधन, संचालन और रखरखाव तक अहम भूमिका निभाता है। इसकी प्राप्ति के लिए, राज्य सरकार कई सहायक गतिविधियां शुरू करेगी जैसे कि ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति (वीडब्ल्यूएससी)/पानी समिति को मजबूत करना, अगले पांच सालों के लिए ग्राम कार्य योजना का विकास, ग्रामीण समुदायों के मार्गदर्शन व सहायता के लिए राज्य कार्यान्वयन एजेंसी (आईएसए) को लगाना और लोगों के बीच जागरुकता कार्यक्रम चलाना।

Grant of Rs 7,064 crore for 2021-22 under Jal Jeevan Mission - Fasal Kranti

अब तक महाराष्ट्र के 40,596 गांवों में 25,926 वीडब्ल्यूएससी या पानी समितियां हैं। वर्ष 2020-21 में, राज्य ने 139 गैर सरकारी संगठनों को राज्य कार्यान्वयन समिति के रूप में लगाने की योजना बनाई थी लेकिन इसे लागू नहीं किया जा सका। साल 2021-22 में, 104 आईएसए को इस कार्य में शामिल करने की योजना बनाई है जिनमें से प्रत्येक 300 गांवों की सहायता करेंगे। इस तरह का मार्गदर्शन और क्षमता निर्माण प्रत्येक घर को जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए  जलापूर्ति के बुनियादी ढांचे की दीर्घकालिक वहनीयता, संचालन और रखरखाव में अहम भूमिका निभाता है।  

15 अगस्त 2019 को लाल किले से प्रधानमंत्री द्वारा घोषित जल जीवन मिशन का कार्यान्वयन 2024 तक देश के हर ग्रामीण घर को नल के पानी का कनेक्शन प्रदान करने के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की साझेदारी के साथ क्रियान्वित किया जा रहा है। 2021-22 में जल जीवन मिशन का कुल बजट 50,011 करोड़ रुपये है। राज्यों के अपने संसाधनों और 15वें वित्त आयोग द्वारा आरएलबी/पीआरआई को जल एवं स्वच्छता के लिए जारी 26,940 करोड़ रुपये के अनुदान के रूप में, इस साल ग्रामीण पेयजल आपूर्ति क्षेत्र में 1 लाख करोड़ से अधिक का निवेश किया जा रहा है। यह गांवों में रोजगार की नई संभावनाएं पैदा कर रहा है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे रहा है।

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