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वाधवानी एआई और गूगल ने विकसित किया कॉटनऐस ऐप  

भारत में, 70 प्रतिशत ग्रामीण परिवार कृषि पर निर्भर हैं, जिनमें से 80 प्रतिशत छोटे किसान हैं, जिनके पास दो हेक्टेयर या उससे कम भूमि है। लगभग 6 मिलियन किसान कपास की खेती करते हैं, जो एक नकदी फसल चावल और गेहूं के बाद भारत का तीसरा सबसे बड़ा कृषि उत्पाद है। कपास कीटों के लिए विशेष रूप से कमजोर है। 2017 में, देश के दूसरे सबसे अधिक आबादी वाले राज्य महाराष्ट्र में कपास की पूरी फसल का आधा हिस्सा विशेष रूप से रेवेनस कीट द्वारा नष्ट हो गया था।
इस प्रकार की आपदाओं को रोकने में किसानों की मदद करने के लिए, और फसल की पैदावार और मुनाफे में वृद्धि करने के लिए, एक भारतीय स्टार्टअप, वाधवानी एआई, ने एशिया में अपने पहले उद्यम में गूगल के साथ मिलकर काम करना शुरू किया है। दोनों संस्थाओं ने "एआई-पावर्ड फार्म डिसीजन सपोर्ट सिस्टम" बनाने के लिए एक कॉटनऐस नामक ऐप को विकसित किया है जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके यह पहचानता है कि कौन से कीट फसलों को खा रहे हैं और कौन सी बीमारी लगने वाली है। इस ऐप के द्वारा किसानों को उचित सलाह भी दी जाती है। दोनों ही संगठनों को उम्मीद है कि इससे किसानों की आजीविका की रक्षा करने में मदद मिलेगीऔर कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग पर अंकुश लगेगा।
वाधवानी एआई एक स्टार्टअप है जिसकी परियोजनाएं सामाजिक भलाई के लिए एग्रीकल्चर इंटेलिजेंस का उपयोग करने पर केंद्रित हैं। इस परियोजना के साथ, इसका उद्देश्य कपास उत्पादक किसानों की आय को बढ़ाना है। वास्तव में एक मोथ लार्वा - जो कि एक औसत वर्ष में भारतीय कपास की 20% से 30% फसल को नष्ट करने के लिए जिम्मेदार माने जाते है। ये कीट अपने अंडे कपास के बीजकोष, या बीज कैप्सूल पर रखते हैं और वे लार्वा बीज खाते हैं और तंतुओं को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे उपज का आकार और गुणवत्ता कम हो जाती है। ये इतने छोटे होते हैं कि उन्हें पहचानना मुश्किल होता है। ऐसे में उन्हें इस ऐप के द्वारा खोजने का एक तरीका किसानों के लिए जीवन बदलने वाला हो सकता है।
कॉटनऐस नामक ऐप का उपयोग करते हुए, छोटे जोत वाले किसान बग वाले कीट जाल की तस्वीर आसानी से ले सकते हैं। ऐप पहले सत्यापित करता है कि क्या छवि प्रामाणिक है, फिर कीटों को वर्गीकृत करता है और उनकी संख्या को गिनता है।
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