भारतीय निगम मामलों के संस्थान (IICA) ने डिजिटल गवर्नेंस और साइबर सुरक्षा विषय पर एक ज्ञानवर्धक और प्रभावशाली सत्र का आयोजन किया, जिसमें BISAG-N, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के विशेष महानिदेशक और पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर, NICSI, श्री विनय ठाकुर ने हिस्सा लिया। डिजिटल परिवर्तन, सॉल्यूशन आर्किटेक्चर, क्लाउड डिप्लॉयमेंट, साइबर सुरक्षा और पोस्ट क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (PQC) जैसे उभरते क्षेत्रों पर उन्होंने विस्तृत और व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम की शुरुआत IICA के महानिदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री ज्ञानेश्वर कुमार सिंह द्वारा स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने कहा कि भारत के सामाजिक–आर्थिक विकास के लिए भविष्य-उन्मुख डिजिटल कौशल और सुरक्षित तकनीकों की उपलब्धता बेहद आवश्यक है।
अपने संबोधन में श्री ठाकुर ने भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) की ताकत, व्यापकता और विकास यात्रा को विस्तार से रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि आधार, यूपीआई, डिजीलॉकर, भारतनेट, को-विन, उमंग, मेघराज क्लाउड और BISAG-N के जीआईएस-आधारित प्लेटफॉर्म जैसी पहलों ने भारत में शासन, जन सेवा वितरण और नागरिक सशक्तिकरण को एक नई ऊंचाई प्रदान की है।
उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की डिजिटल इंडिया दृष्टि का परिणाम हैं, जिसने तकनीक को सामाजिक समावेशन, पारदर्शिता और आर्थिक गति के साधन के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि डिजिटल इंडिया केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक व्यापक परिवर्तनकारी आंदोलन है जो शहरी–ग्रामीण अंतर को कम कर रहा है और भारत को वैश्विक डिजिटल शक्ति के रूप में स्थापित कर रहा है।
श्री ठाकुर ने बढ़ते साइबर खतरों और डिजिटल इकोसिस्टम की सुरक्षा के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा ढांचे की अनिवार्यता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने DPDP अधिनियम, एआई-आधारित साइबर हमलों, पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी की तात्कालिक जरूरत और डिजिटल संप्रभुता के लिए स्वदेशी तकनीकों के महत्व पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम में IICA के संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और वक्ता से गहन सवाल पूछे। इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तर सत्र में प्रतिभागियों ने डिजिटल गवर्नेंस, डेटा सुरक्षा, क्लाउड सिक्योरिटी और उभरती तकनीकों के विभिन्न पहलुओं को समझा।
सत्र का समापन धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ, जिसमें श्री ठाकुर के दूरदर्शी विचारों के लिए आभार व्यक्त किया गया और यह स्वीकार किया गया कि ऐसे सत्र भविष्य के नेताओं की सोच को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।